राजस्थान में भजनलाल सरकार को सत्ता संभाले काफी वक्त हो चुका है। लेकिन अभी भी महत्वपूर्ण आयोगों और बोर्डों को राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार है। कई बोर्ड ऐसे हैं जो आमजन की समस्याओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। लेकिन वहां भी अध्यक्ष का इंतजार है। अध्यक्ष की कुर्सी खाली होने की वजह से पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इन नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश में भाजपा का संगठन पर्व भी खत्म हो चुका है। हालांकि अभी प्रदेश कार्यकारिणी का गठन होना बाकी है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल में फेर बदल की चर्चाएं भी लंबे समय से चली आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश संगठन और मंत्रिमंडल में फेर बदल के बाद ही राजनीतिक नियुक्तियां दी जाएंगी। सरकार की कोशिश रहेगी की विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जिन नेताओं को टिकट नहीं दिए गए और साथ ही साथ जिन विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है उन्हें राजनीतिक नियुक्तियां देकर साधने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा पार्टी कोशिश करेगी की प्रदेश कार्यकारिणी में जातीय और क्षेत्रीय आधार पर नेताओं को नियुक्त किया जाए। नवंबर में पंचायतों और नगरीय निकाय चुनाव भी होने है ऐसे में सरकार इन नियुक्तियों को पहले करने की कोशिश करेगी।
राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं में वरिष्ठ नेताओं के नाम
भारतीय जनता पार्टी इन नियुक्तियों के जरिए समाज और विशेष वर्ग की नाराजगी को दूर कर चुनाव में इसका लाभ लेने का प्रयास करेगी। लगातार राजनीतिक नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि सरकार के स्तर पर काम हो रहा है कई समीकरण देखकर नियुक्तियां होती है। यह मुख्यमंत्री का विशेष अधिकार होता है कि वह नियुक्ति करेंगे। इसमें संगठन के स्तर पर कोई भी दखल नहीं होता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है की नियुक्तियों के लिए पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, श्री चंद्र कृपलानी, संतोष अहलावत जैसे कई बिगेस्ट नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही अपूर्वा पाठक, राखी राठौर, मनन चतुर्वेदी को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। जोधपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, अलवर, सीकर, श्रीगंगानगर, भरतपुर, पाली आदि में यूआईटीज में चेयरमैन को कैबिनेट और स्टेट मिनिस्टर का दर्जा भी दिया जाता है। इनमें भाजपा सरकार विशुद्ध राजनीतिक लोगों को पद देना चाहती है।
महत्वपूर्ण आयोगों और बोर्डों को राजनीतिक नियुक्तियां का इंतजार
आपको बता दे की भाजपा सरकार की ओर से लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भी राजनीतिक नियुक्तियां दी गई थी। इसमें पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद के नाम शामिल थे। पूर्व सांसद ओंकार सिंह लखावत, जसवंत विश्नोई और सीआर चौधरी को धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण, जीव जंतु कल्याण बोर्ड और किसान आयोग का चेयरमैन बनाया था। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान भी राजनीतिक नियुक्तियां देने में दो से ढाई साल का वक्त लगा था। पिछली सरकार ने चुनावी साल में कई नए बोर्ड और आयोग का ऐलान किया था। साल 2022-23 के दौरान गठित होने के बाद इन बोर्ड और आयोग में कई पद खाली रह गए थे। खास बात यह है कि 26 बोर्ड का गठन तो चुनाव से ठीक 6 माह पहले ही किया गया था। प्रदेश में पंचायत चुनाव होने हैं ऐसे में सरकार जिन नेताओं को संगठन में एडजस्ट नहीं कर पाएगी उन्हें बोर्ड निगम और आयोग के जरिए एडजस्ट किया जाएगा। नियुक्तियों के दौरान भाजपा सरकार पूरी कोशिश करेगी कि वह जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रख कर ही नियुक्तियां दे। और यही कारण है की राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार खत्म होने में समय लग रहा है।