महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय, समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) द्वारा महिला पर्यवेक्षक के 416 पदों पर नियुक्ति के आदेश जारी किये गए हैं। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। विभाग में कार्मिकों की कमी नहीं होने से कार्य सुगमता से होंगे जिससे महिला एवं बाल विकास की योजनाओं से आमजन सरलता और सुगमता से लाभान्वित हो सकेंगे। निदेशक आईसीडीएस ओ. पी. बुनकर ने बताया कि विभाग में 416 कार्मिकों को पोस्टिंग मिली है। इसमें से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोटे से 216 कार्यकर्ताओं की और सीधी भर्ती से 200 महिला पर्यवेक्षकों की भर्ती की गई है। निदेशक ने बताया कि इससे विभाग के कार्य संपादन और मॉनिटरिंग में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि विभाग को नवीन कार्मिक मिलने से उसकी कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। उक्त कैडर के 20 प्रतिशत से अधिक कार्मिकों का मिलना विभागीय कार्यों के संपादन में उपयोगी होगा। निदेशक आईसीडीएस ने बताया कि राज्य की बाल विकास परियोजनाओं में कार्यरत सभी सीडीपीओ को निर्देशित किया है कि उक्त आदेश में दिए गए निर्देशानुसार कार्मिकों की पर्सनल फाइल का संधारण सुव्यवस्थित ढ़ंग से किया जाए और कार्मिकों की सर्विस बुक भी को समय पर बनाकर उसमें तथ्यात्मक सूचनाएं सावधानी से सुस्पष्टता से भरी जाए। अधूरी सर्विस बुक बाद में समस्या का कारण बनती है। उन्होंने कार्मिकों की फोटो, हस्ताक्षर , अँगुली और अंगूठे के निशान, शैक्षणिक योग्यता इत्यादि सभी एंट्री पूर्ण सावधानी से करने के निर्देश दिए।निदेशक ओ.पी. बुनकर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोटे से भर्ती हुई कार्यकर्ता से विभाग द्वारा आवंटित फोन तथा समस्त रिकार्ड अन्य कार्यकर्ता/ सहायिका जिसको भी चार्ज दिया जा रहा है, को सुपुर्द करने के उपरांत ही कार्यमुक्त आदेश जारी करने के सीडीपीओ को निर्देश दिए। उन्होंने सीडीपीओ को उक्त कार्मिकों को कार्यमुक्ति आदेश के साथ नियुक्ति आदेश भी जारी करने और निर्देशानुसार फोटो युक्त अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी किया करने और इनका संधारण कार्मिक की पर्सनल फाइल में करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग का हो रहा सुदृढ़ीकरण
महिला पर्यवेक्षक के 416 पदों पर नियुक्ति के आदेश हुए जारी

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रफीक खान ने कहा-क्या मेरा मुसलमान होना कोई गुनाह, आखिर क्यों छलका विधायक का दर्द...
आखिर विधानसभा में ऐसा क्या हुआ की मीडिया के सामने भावुक हो गए कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान। विधायक रफीक खान का दर्द छलक उठा और वह भावुक हो गए। मीडिया से बात करते हुए रफीक खान का गला भर आया और उन्होंने कहा कि सदन में मेरा चरित्र हनन किया गया। क्या मेरा मुसलमान होना कोई गुनाह है। सदन में मुझे गालियां दी गई। मैं अपने आप को पीड़ित महसूस कर रहा हूं। रफीक खान ने कहा कि अगर मुसलमान होना गुनाह है तो भाजपा के लोगों से कह रहा हूं कि आप कोई कानून लेकर आ जाओ। और यह कह दो कि आगे से कोई मुसलमान विधायक चुनकर नहीं आएगा। रफीक खान भावुक होते हुए कहने लगे कि आज अगर मेरे पिता जिंदा होते तो यह शब्द सुन भी नहीं पाते। मेरे पिता हिंदी के कवि रहे और उन्होंने हमेशा हिंदी को बढ़ावा दिया है। दरअसल रफीक खान का यह दर्द इसलिए छलक क्योंकि विधानसभा में हंगामे के दौरान पाकिस्तानी-पाकिस्तानी के नारे लगाए गए थे। यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसे लेकर कांग्रेस में रोष व्याप्त है और कांग्रेस लगातार इसकी निंदा कर रही हैं।
पाकिस्तानी कहने पर छलका विधायक रफीक खान का दर्द
रफीक खान ने कहा कि मैं विधानसभा अध्यक्ष से मिला तो उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री से बात करो। मैं संसदीय कार्य मंत्री से मिला तो उन्होंने कहा कि हम चर्चा नहीं करेंगे। शब्द डिलीट कर देंगे, लेकिन यह शब्द पूरे मीडिया में है। यूट्यूब पर हैं तो क्या वहां से यह शब्द डिलीट हो जाएंगे। रफीक खान ने कहा कि विधायक गोपाल शर्मा ने जिस तरह से मेरे चरित्र का चीर हरण किया वह बर्दाश्त के लायक नहीं है। रफीक खान ने कहा की विधानसभा में चर्चा कर रहे हो तो बातचीत से समाधान होना चाहिए था। आपने चर्चा के दौरान न केवल शब्दों की मर्यादा तोड़ी, जिस तरह मेरे व्यक्तित्व का चीर हरण किया गया। इस तरह के शब्द मेरे लिए इस्तेमाल किए गए , मैं उम्मीद करता हूं यह बात पूरी सरकार सुनेगी और इस बात पर चर्चा करेगी ।
राजस्थान विधानसभा में लगे थे पाकिस्तानी-पाकीस्तानी के नारे
यह मामला तब शुरू हुआ जब राजस्थान विधानसभा में नगरीय विकास और स्वायत्त शासन की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल अचानक गरमा गया। कांग्रेस के सचेतक रफीक खान जब अपनी बात रख रहे थे,रफीक खान ने भजनलाल सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल को नाकाम बताया। साथ ही उन्होंने एक शेर पढ़ा ‘जो रईस हैं खानदानी मिजाज रखते हैं, नरम अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है‘। तभी भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने उन पर पाकिस्तानी -पाकिस्तानी का नारा लगाया। गोपाल शर्मा के इस बयान पर कांग्रेस विधायकों ने कड़ा ऐतराज जताया, जिससे सदन में तकरीबन दो मिनट तक नोकझोंक होती रही। इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी रोष जताया था।
खान ने कहा- मुस्लिम विधायक होना गुनाह तो पास करवा दो कानून
टीकाराम जूली ने इस मामले को लेकर कहा था की सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा द्वारा कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक रफीक खान पर की गई टिप्पणी बेहूदा एवं स्तरहीन है। भाजपा नेताओं में बयानबाजी का स्तर दिनोंदिन गिराने की होड़ लग गई है। इन्हें विधानसभा में बोलने और सड़क पर दिए जाने वाले भाषणों में कोई अन्तर नहीं लगता है। ये भूल जाते हैं कि रफीक खान उस शेखावटी की भूमि से आते हैं जहां सभी धर्मों के लोग सेना में जाकर इस देश के लिए फक्र से अपनी जान देते हैं। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं सदन के नेता भजनलाल शर्मा को इस पर संज्ञान लेकर विधायक पर कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसी टिप्पणियां असहनीय एवं निंदनीय हैं। मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या ऐसे बयानों में क्या उनकी स्वीकारोक्ति है
राजस्थान के उपचुनावों में पार्टीयों के बीच गठबंधन को लेकर पशोपेश ।
जयपुर : उपचुनावों की घोषणा के साथ ही राजस्थान में भी चुनावी रण छिड गया है। सभी 7 सीटो पर नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 13 नवंबर को वोटिंग व 23 नवंबर को उपचुनाव का परिणाम आयेगा। चुनावी घोषणा के साथ ही, राज्य की सभी पार्टियां अपनी अपनी रणनितियो मे जूट गई है। गठबंधन पर भी बैठको का दौर शुरू हो गया है। हालंकि गठबंधन पर सभी पार्टियों के अपने -अपने मत है। राजस्थान में होने वाले 7 सीटो पर उपचुनाव में 4 प्रमुख पार्टिया सामने निकलकर आ रही है - भाजपा, कांग्रेस, BAP और RLP और चारो ही पार्टिया असमजम में दिख रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड का कहना है - कि वो उपचुनाव मे किसी से गठबंधन के लिए आग्रह नही करेगे , लेकिन अगर आगे से कोई निवेदन आता है - तो उसे मना भी नहीं करेंगें। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने उप-चुनावो को काग्रेस के लिए लिए सभी चुनौती माना , जबकि भाजपा के सभी 7 सीटो पर आश्वस्त दिखे।वहीं काग्रेस ने गठबंधन पर फैसला दिल्ली आलाकमान पर छोड़ा है। आपको बता दे ,लोकसभा चुनाव में राष्टीय पार्टी काग्रेस ने क्षेत्रीय पार्टी BAP से गठबंधन किया था।आदिवासी बेल्ट चौरासी विधानसभा सीट पर BAP जीत सुनिश्चत मान रही है| ऐसे में माना जा रहा था- यदि चौरासी सीट पर दोनो पार्टीयो का गठबंधन हो जाता है, तो यह बीजेपी की साख पर सवाल बन जायेगी। लेकिन कल भारत आदिवासी पार्टी ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का ऐलान करके सभी प्रकार की सुगबुगाहट पर पुरण विराम लगा दिया है। BAP के मोहनलाल रोत का कहना है कि हम किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगें। चौरासी व सलूबर सीट से पार्टी अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। देवली -उनियार सीट पर अभी विचार जारी है। हालंकि मोहनलाल रोत का यह भी कहना है कि- वो गठबंधन नही करेंगे, हाँ यदि काग्रेस समर्थन देती है, तो स्वागत है।
बेनीवाल ने कहा- भाजपा हमारी दुश्मन न०-1
वही दूसरी तरफ RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का गुरुवार को एक बयान आया है.बेनीवाल ने बताया की BJP उनकी दुश्मन न०-1 है| भाजपा को सभी 7 सीटो पर मात के लिए वह काग्रेस से गठबंधन के लिए तैयार है। लेकिन देवली व खींवसर सीट पर वे अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे | बेनीवाल के अनुसार दो तीन दिन में यह साफ हो जायेगा कि दोनो पार्टियों में अलाइंस होता है कि नहीं। लेकिन अगर काग्रेस, RLP की शर्ते मान कर उनकी दो सीट की डिमांड पूरी कर देती है और सभवतः गठबंधन हो जाता है, तो बीजेपी की जीत की डगर कठिन हो सकती है, हाँ यदि मुकाबला त्रिकोणीय होता है भाजपा की जीत की संभावना अधिक हो जाती है |RLP प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि गठबंधन नहीं होता है ये देवली- उनियारा व खींवसर समेत रामगढ व झुंझुनूं यानि 4 सीटों पर चुनाव लडेंगें । इन सभी , चर्चाओ पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि वे राज्य की सभी 7 सीटो पर चुनाव लड़ने केलिए पूर्णतय तैयार हैं। लेकिन गठबंधन पर निर्णय के लिए दिल्ली में कमेटी बनायी गयी है। आलाकमान जो तय करेगा हमें वह मान्य होगा।
आपको बता दे - दौसा विधानसभा सीट पर कांग्रेस सचिन पायलट के समर्थक को टिकट देने की संभावना बतायी जा रही| वही झुंझुनूं विधानसभा सीट पर भाजपा की तरफ से बबलू चौधरी की दावेदारी मानी जा रही है। रामगढ़ सीट पर दिवंगत विधायक जुबेर खान की पत्नी व बेटे को चुनावी मैदान में उतारकर कांग्रेस अपना इमोशल कार्ड खेल सकती है जबकि भाजपा अपने पुराने प्रत्यशी सुखवंत सिंह को टिकट दे सकती है। चौरासी विधानसभा सीट पर BAP का दबदबा है व देवली- उनियारा , खीवंसर सीट पर RLP का वर्चस्व बना हुआ है। ( रिपोर्ट: अनुश्री यादव )
राजस्थान में राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कब होगा खत्म, मंत्रीमंडल में फेरबदल की चर्चाएं भी तेज...
राजस्थान में भजनलाल सरकार को सत्ता संभाले काफी वक्त हो चुका है। लेकिन अभी भी महत्वपूर्ण आयोगों और बोर्डों को राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार है। कई बोर्ड ऐसे हैं जो आमजन की समस्याओं से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। लेकिन वहां भी अध्यक्ष का इंतजार है। अध्यक्ष की कुर्सी खाली होने की वजह से पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इन नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश में भाजपा का संगठन पर्व भी खत्म हो चुका है। हालांकि अभी प्रदेश कार्यकारिणी का गठन होना बाकी है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल में फेर बदल की चर्चाएं भी लंबे समय से चली आ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश संगठन और मंत्रिमंडल में फेर बदल के बाद ही राजनीतिक नियुक्तियां दी जाएंगी। सरकार की कोशिश रहेगी की विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जिन नेताओं को टिकट नहीं दिए गए और साथ ही साथ जिन विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है उन्हें राजनीतिक नियुक्तियां देकर साधने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा पार्टी कोशिश करेगी की प्रदेश कार्यकारिणी में जातीय और क्षेत्रीय आधार पर नेताओं को नियुक्त किया जाए। नवंबर में पंचायतों और नगरीय निकाय चुनाव भी होने है ऐसे में सरकार इन नियुक्तियों को पहले करने की कोशिश करेगी।
राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चाओं में वरिष्ठ नेताओं के नाम भारतीय जनता पार्टी इन नियुक्तियों के जरिए समाज और विशेष वर्ग की नाराजगी को दूर कर चुनाव में इसका लाभ लेने का प्रयास करेगी। लगातार राजनीतिक नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि सरकार के स्तर पर काम हो रहा है कई समीकरण देखकर नियुक्तियां होती है। यह मुख्यमंत्री का विशेष अधिकार होता है कि वह नियुक्ति करेंगे। इसमें संगठन के स्तर पर कोई भी दखल नहीं होता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है की नियुक्तियों के लिए पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, श्री चंद्र कृपलानी, संतोष अहलावत जैसे कई बिगेस्ट नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही अपूर्वा पाठक, राखी राठौर, मनन चतुर्वेदी को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। जोधपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, अलवर, सीकर, श्रीगंगानगर, भरतपुर, पाली आदि में यूआईटीज में चेयरमैन को कैबिनेट और स्टेट मिनिस्टर का दर्जा भी दिया जाता है। इनमें भाजपा सरकार विशुद्ध राजनीतिक लोगों को पद देना चाहती है।
महत्वपूर्ण आयोगों और बोर्डों को राजनीतिक नियुक्तियां का इंतजार आपको बता दे की भाजपा सरकार की ओर से लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भी राजनीतिक नियुक्तियां दी गई थी। इसमें पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद के नाम शामिल थे। पूर्व सांसद ओंकार सिंह लखावत, जसवंत विश्नोई और सीआर चौधरी को धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण, जीव जंतु कल्याण बोर्ड और किसान आयोग का चेयरमैन बनाया था। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान भी राजनीतिक नियुक्तियां देने में दो से ढाई साल का वक्त लगा था। पिछली सरकार ने चुनावी साल में कई नए बोर्ड और आयोग का ऐलान किया था। साल 2022-23 के दौरान गठित होने के बाद इन बोर्ड और आयोग में कई पद खाली रह गए थे। खास बात यह है कि 26 बोर्ड का गठन तो चुनाव से ठीक 6 माह पहले ही किया गया था। प्रदेश में पंचायत चुनाव होने हैं ऐसे में सरकार जिन नेताओं को संगठन में एडजस्ट नहीं कर पाएगी उन्हें बोर्ड निगम और आयोग के जरिए एडजस्ट किया जाएगा। नियुक्तियों के दौरान भाजपा सरकार पूरी कोशिश करेगी कि वह जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रख कर ही नियुक्तियां दे। और यही कारण है की राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार खत्म होने में समय लग रहा है।
राइजिंग राजस्थान पर सियासत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और राजेंद्र राठौड़ के बीच शायराना जंग
राइजिंग राजस्थान को लेकर सियासी पारा हाई हो चुका है। राइजिंग राजस्थान को लाइजिंग राजस्थान कहने पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बीच शायराना जंग छिड़ गई है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राइजिंग राजस्थान में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने शायराना अंदाज में भाजपा सरकार पर तंज कसा। जूली ने कहा तराजू नहीं है इनके पास, मेरा सच तोलने को, सवाल उठा रहे हैं वो, जो खुद आदतन हैं झूठ बोलने को। जिस पर पलटवार करते हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा तराजू हाथ में लेकर खुद बेकसूर बन बैठे पर इतिहास उठाकर देख लो, कितने कसूर कर बैठे। राठौड़ ने जूली पर निशाना साधते हुए कहा आपने जमीन हथियाने का जो आरोप लगाया है तो आप यह खुलास करें कि कितनी फर्जी कंपनियों ने जमीन हथिया ली? इसकी सूची जारी करें ! महज आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदलती, हिम्मत है तो प्रमाण पेश करें।
टीकाराम जूली ने राठौड़ पर शायराना अंदाज में कसा तंज नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा मैंने राइजिंग राजस्थान को लेकर सामने आ रहे सच पर सवाल क्या उठाए, भाजपा के तमाम विधायक, मंत्री और पूर्व मंत्री तक सरकार के बचाव में उतर आए। सबकी भाषा भी एक जैसी है जिसे देखकर लगता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने शायद उन्हें आदेश दिया है कि वो जनता को गुमराह करें। जुली ने कहा राजेंद्र राठौड़ आप तो स्वयं नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। मुझे अब तक विश्वास था कि आप इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारियों से भली-भांति परिचित हैं, लेकिन अब प्रतीत होता है कि आप भी अपनी राह से भटक गए हैं और प्रदेशवासियों को गुमराह करने में जुट गए हैं। आप और मुख्यमंत्री दोनों ने "राइजिंग राजस्थान" को "लाइजिंग राजस्थान" बना दिया उसमे आपने 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू की बात कही। मैंने सदन में स्पष्ट रूप से पूछा था कि ये 35 लाख करोड़ के एमओयू किन-किन निवेशकों के साथ हुए हैं ? यह जानकारी प्रदेश की जनता के समक्ष सार्वजनिक की जाए, लेकिन आप ने इसे छुपाया और मुख्यमंत्री कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। जूली ने कहा राजेंद्र राठौड़ वैसे आप नाराज मत होइए, आंकड़ों के साथ खिलवाड़ करना भाजपा का पुराना नाता है। वास्तविकता यह है कि भाजपा सरकार ने अपने पिछले 15 माह के कार्यकाल में धरातल पर कोई ठोस कार्य नहीं किया है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने साधा टीकाराम जूली ने निशाना वहीं टीकाराम जूली पर पलटवार करते हुए राजेंद्र राठौड़ ने कहा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मैं स्वयं नेता प्रतिपक्ष रहा हूं और मैंने इस पद की गरिमा और जिम्मेदारी को बखूबी समझा है लेकिन कांग्रेस की तरह विधानसभा में सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद कभी नहीं रहा। मैंने मेरे कार्यकाल के अंदर कभी भी सामाजिक सम्मान जैसे 'दादी' शब्द को लेकर सदन में गतिरोध उत्पन्न करने जैसी घटना को अंजाम नहीं दिया था। राठौड़ ने कहा राइजिंग राजस्थान को लाइजिंग राजस्थान बनाने के आपके आरोपों को मैंने पढ़ा। अच्छा रहता कि आप 35 लाख करोड़ के एमओयू में से किन-किन एमओयू में तथाकथित लाइजिंग हुई है उसका तर्कसंगत व सत्यता के साथ खुलासा करते। हवा में बातें उछालने से सच्चाई नहीं बदलती। आप नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे हैं, इस पद की मर्यादा का भी ध्यान रखें। आपके कार्यकाल में निवेशक फोन तक उठाने को तैयार नहीं थे इसलिए पिछली कांग्रेस सरकार में इन्वेस्ट समिट के 12.5 लाख करोड़ के एमओयू में से मात्र 2 प्रतिशत ही धरातल पर उतर सके जबकि भाजपा सरकार के राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट ने निवेशकों का विश्वास बहाल किया जिसकी बदौलत बड़े-बड़े प्रोजेक्ट धरातल पर आ रहे हैं, हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है लेकिन हैरानी है कि आपको बेचैनी हो रही है।राठौड़ ने कहा आप झूठ और भ्रम की राजनीति से बाहर आइए और राजस्थान के विकास में साझा भागीदार बनिए। नहीं तो जनता का फैसला 2028 में भी वैसा ही रहेगा जैसा 2023 में था।
वक्फ संशोधन बिल पर बोले मदन राठौड़ बाहुबलियों का कब्जा होगा खत्म, डोटासरा ने कहा-चहेतों को मलिक बनाना चाहती है सरकार
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक बहुमत से पास हो गया है। विधेयक के पक्ष में 288, जबकि विरोध में 232 मत पड़े। सदन ने विपक्ष के सभी संशोधनों को भी ध्वनिमत से खारिज कर दिया। विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। बीजेपी की सहयोगी पार्टियों ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन किया। वहीं, विपक्ष ने बिल का विरोध किया। वक्फ संशोधन बिल को लेकर लगातार पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर निशाना साधने में लगी हुई है।वक्फ संशोधन बिल को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा की वक्फ की संपत्तियों पर बाहुबलियों का कब्ज खत्म हो जाएगा। जिससे सभी को लाभ मिलेगा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। डोटासरा ने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर सरकार की नियत में खोट है और सरकार अपने चहेतो को वक्फ संपत्तियों का मालिक बनाना चाहती है।
वक्फ संशोधन बिल पर मदन राठौड़ ने कहा मुस्लिम समाज को मिलेगा लाभ वक्फ संशोधन बिल पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि मुस्लिम समुदाय का अधिकांश वर्ग इस संशोधन से खुश है। क्योंकि यह बिल गरीब मुसलमानों के हित में बनाया गया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन बिल का पूरे देश में स्वागत हो रहा है। यह बिल किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता और इसमें मौजूदा वक्फ संपत्तियों को छेड़छाड़ से बचाने का प्रावधान भी शामिल है। राठौड़ ने वक्फ संशोधन बिल को वर्तमान समय की जरूरत बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि वक्फ की संपत्ति पर कई लोगों ने कब्जा कर रखा है। वक्फ की संपत्ति अल्लाह को दी गई है तो इसकी संपत्ति पर बाहुबली और मठाधीशों का कब्जा क्यों है। कुछ बाहुबली लोग इस संपत्ति का उपयोग करते हुए लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम समाज को इसका लाभ तक नहीं मिल रहा। वक्फ बिल संशोधन मुसलमानों के हित में है, गरीब मुसलमानों के भलाई के लिए इस धन का उपयोग किया जाएगा। जबकि अब तक बाहुबली ही इसका उपयोग कर रहे थे। मदन राठौड़ ने कहा कि यह कैसा कानून है जो यह कहता है कि किसी भी संपत्ति को कह दो कि यह वक्फ की संपत्ति है और वह उसकी हो जाए यह भी ठीक नहीं है ईश्वर किसी से भी संपत्ति छिनना नहीं चाहता है। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा की वक्फ की संपत्तियां, जो अल्लाह को समर्पित हैं, लेकिन कुछ प्रभावशाली लोगों और बाहुबलियों ने कब्जा कर रखा है। मदन राठौड़ ने सवाल उठाया कि ऐसी संपत्तियों पर बाहुबली या मठाधीशों का नियंत्रण क्यों है। जबकि मुस्लिम समुदाय को इसका लाभ नहीं मिल रहा।
गोविंद सिंह डोटासरा ने बोला केंद्र सरकार पर हमला बोले- इनकी नियत में खोट वक्फ संशोधन बिल को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। डोटासरा ने कहा की वक्फ संपत्तियों को लेकर भाजपा सरकार की नियत में खोट है। सरकार इसका लाभ अपने चहेतों को पहुंचाना चहाती है। सरकार अपने चहेतों को संपत्तियों का मालिक बनाना चाहती है। डोटासरा ने कहा की देश में कुछ बड़े लोगों को जो पिछले 10 साल में केंद्र सरकार के संज्ञान में आए हैं, उनको वक्फ संपत्तियों का मालिक बनाकर उन्हें अधिकार देना चाहती है। इसलिए यह बिल लेकर आ गए। इसके जरिए हिंदू-मुसलमान भी हो जाएगा और राजनीतिक रोटियां भी सेक ली जाएंगी। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर पहले से ही कानून बना हुआ है। अब इसमें संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी। डोटासरा ने कहा इसके उद्देश्य और कारण बताएं को लेकर ये लोग भ्रम फैलाने लग जाते हैं कि नए संसद भवन को भी वक्फ संपत्ति घोषित कर देंगे। इनसे पूछा जाए कि जो पहले से संसद भवन बना हुआ है, क्या उसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया।