जयपुर।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए घोषणा की है कि अब कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएँ साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को बेहतर अवसर देना और परीक्षा के दबाव को कम करना बताया गया है।
बोर्ड के अनुसार यह नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सिफारिशों के अनुरूप लागू की जा रही है, जिससे छात्र अपने प्रदर्शन को सुधारने का एक अतिरिक्त मौका पा सकेंगे।
छात्रों को मिलेगा स्कोर सुधार का अवसर
नई प्रणाली के तहत छात्र पहली परीक्षा के बाद यदि अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो दूसरी परीक्षा में शामिल होकर अपने स्कोर को बेहतर बना सकेंगे। अंतिम परिणाम में छात्रों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे एक ही परीक्षा पर निर्भरता खत्म होगी और छात्रों में परीक्षा का मानसिक दबाव भी कम होगा।
कब से लागू होगी नई व्यवस्था
RBSE अधिकारियों के मुताबिक यह बदलाव शैक्षणिक सत्र 2025–26 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। परीक्षा कैलेंडर, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली को भी इसी के अनुरूप संशोधित किया जाएगा।
बोर्ड जल्द ही इससे संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश (Guidelines) और परीक्षा शेड्यूल जारी करेगा।
शिक्षकों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
इस फैसले का शिक्षकों और अभिभावकों ने स्वागत किया है। शिक्षकों का कहना है कि इससे छात्रों को सीखने और सुधार करने का पर्याप्त समय मिलेगा। वहीं, अभिभावकों का मानना है कि यह निर्णय बच्चों के भविष्य के लिए सकारात्मक साबित होगा।
हालांकि कुछ शिक्षा विशेषज्ञों ने परीक्षा प्रबंधन और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव की आशंका भी जताई है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार
शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम राजस्थान की शिक्षा प्रणाली को छात्र-केंद्रित, लचीला और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। आने वाले समय में मूल्यांकन प्रणाली को और पारदर्शी व तकनीक आधारित बनाने पर भी काम किया जाएगा।
आगे क्या?
अब छात्रों, स्कूलों और शिक्षकों की नजर RBSE द्वारा जारी होने वाले विस्तृत नियमों पर टिकी है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो राजस्थान शिक्षा सुधारों के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।