राजस्थान में पेट्रोल-डीजल महंगा, प्राइवेट कंपनी ने बढ़ाए दाम; 900 से ज्यादा पंपों पर नई दरें लागू
राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्राइवेट कंपनी नायरा एनर्जी ने अपने फ्यूल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की दरों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की है। नई दरें गुरुवार सुबह से पूरे प्रदेश में लागू कर दी गई हैं।
इस फैसले के बाद नायरा के पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने वाले वाहन चालकों को अब पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। अचानक हुई इस बढ़ोतरी से आम लोगों के बजट पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
900 से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर असर
राजस्थान में नायरा एनर्जी के 900 से अधिक पेट्रोल पंप संचालित हैं। वहीं, पूरे देश में कंपनी के करीब 6700 से ज्यादा फ्यूल स्टेशन हैं। ऐसे में इस मूल्य वृद्धि का असर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। खासकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर, टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए यह बढ़ोतरी अतिरिक्त बोझ बन सकती है।
रोजाना वाहन का उपयोग करने वाले लोगों के लिए भी यह बदलाव चिंता का विषय है, क्योंकि ईंधन महंगा होने से सीधे तौर पर घरेलू खर्च और परिवहन लागत बढ़ती है।
बढ़ोतरी के पीछे क्या कारण
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऑपरेटिंग लागत में वृद्धि को मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि, कंपनी की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बदलाव का असर सीधे तौर पर प्राइवेट कंपनियों की दरों पर पड़ता है, क्योंकि वे बाजार के अनुसार कीमतों में तेजी से बदलाव करती हैं।
डीलरों ने बताया कंपनी का निर्णय
राजस्थान में नायरा पेट्रोल पंप डीलर महेश राणा के अनुसार, यह फैसला पूरी तरह कंपनी स्तर पर लिया गया है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट पेट्रोल डीलर होने के कारण उन्हें कंपनी द्वारा तय की गई कीमतों के अनुसार ही ईंधन बेचना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्राइवेट कंपनियों को सरकार से किसी प्रकार की सब्सिडी नहीं मिलती है, जिसके चलते उन्हें बाजार की परिस्थितियों के अनुसार कीमतें तय करनी पड़ती हैं।
आमजन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ता है। ट्रक, बस, टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए यह लागत सीधे तौर पर बढ़ा देती है। इसके परिणामस्वरूप किराए में वृद्धि होने की संभावना भी रहती है, जिसका असर आम यात्रियों पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आवश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं, क्योंकि परिवहन लागत बढ़ने का असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहता है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में आम लोगों और व्यवसायों को अपने खर्चों की योजना बनाकर चलना होगा।
राजस्थान में प्राइवेट कंपनी द्वारा की गई इस मूल्य वृद्धि ने एक बार फिर ईंधन की कीमतों को चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में अन्य कंपनियां भी इसी तरह के कदम उठाती हैं या नहीं, इस पर सबकी नजर बनी रहेगी।
Golden Hind Desk