राजस्थान में किसानों को राहत देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक बड़ी घोषणा की है। अब प्रदेश के 22 जिलों के साथ-साथ दौसा और करौली जिले भी दिन में बिजली आपूर्ति योजना से जुड़ गए हैं।
इसके साथ ही प्रदेश के कुल 24 जिलों में किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय दो ब्लॉक में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा सोमवार रात अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सभी जिलों में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराना है, जिससे कृषि कार्य आसान हो और किसानों की जीवनशैली में सुधार आए।
यह योजना राज्य सरकार के उस महत्वाकांक्षी संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2024-25 के बजट में यह लक्ष्य रखा गया था कि वर्ष 2027 तक पूरे राजस्थान में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान में 22 जिलों में यह सुविधा पहले से लागू है और अब दौसा व करौली को जोड़कर इसका विस्तार किया गया है।
सरकार के अनुसार, दौसा जिले में 52,460 और करौली जिले में 35,341 कृषि उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यानी कुल 87,801 किसानों को दिन के समय बिजली मिलने से बड़ी राहत मिलेगी। इससे किसानों को रात के समय खेतों में जाकर सिंचाई करने की मजबूरी से छुटकारा मिलेगा।
रात में सिंचाई के दौरान किसानों को अक्सर कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे ठंड, बारिश और जंगली जानवरों का खतरा। दिन में बिजली मिलने से ये सभी समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी। इसके अलावा किसान अपने परिवार के साथ अधिक समय बिता सकेंगे, जिससे उनके सामाजिक जीवन में भी सुधार होगा।
इस योजना को सफल बनाने के लिए विद्युत ढांचे को मजबूत किया गया है। जयपुर विद्युत वितरण निगम द्वारा दौसा और करौली जिलों में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। दौसा में 33 केवी के 18 नए ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जबकि करौली में 6 नए ग्रिड सब-स्टेशन बनाए गए हैं।
इसके अलावा दौसा जिले में 47 सब-स्टेशनों पर ट्रांसफार्मरों की क्षमता में 128.95 एमवीए की वृद्धि की गई है, वहीं करौली में 15 सब-स्टेशनों पर 49.45 एमवीए क्षमता बढ़ाई गई है। इससे बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और स्थिरता में सुधार होगा।
ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों जिलों में प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 32 मेगावाट क्षमता के 17 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इससे न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में सुधार होगा। दिन में बिजली मिलने से सिंचाई का कार्य अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में इस योजना का विस्तार प्रदेश के शेष जिलों में भी किया जाएगा।
कुल मिलाकर, यह योजना किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी और राजस्थान को कृषि क्षेत्र में और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Golden Hind Desk