नई दिल्ली / जयपुर : राजस्थान में लंबे समय से अटके हुए पंचायत चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के डेलीमिटेशन (सीमांकन) और पुनर्गठन की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए चुनाव कराने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि राजस्थान में पंचायत चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पूरे कराए जाएंगे।
दरअसल, राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषदों के पुनर्गठन और नए सीमांकन को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बिना जनसंख्या के अद्यतन आंकड़ों और प्रक्रिया की पारदर्शिता के चुनाव कराना संविधान के खिलाफ होगा। वहीं राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि सीमांकन और पुनर्गठन की प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई है।
अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लोकतंत्र की जड़ें स्थानीय निकायों से मजबूत होती हैं, ऐसे में पंचायत चुनावों को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीमांकन और पुनर्गठन चुनाव रोकने का आधार नहीं बन सकते, जब तक प्रक्रिया संविधान और कानून के दायरे में हो।
चुनाव आयोग को मिली हरी झंडी
अदालत के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करने का अधिकार मिल गया है। आयोग अब चरणबद्ध तरीके से चुनाव कार्यक्रम घोषित करेगा। संभावना जताई जा रही है कि पहले ग्राम पंचायतों के चुनाव कराए जाएंगे, इसके बाद पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव होंगे।
राजनीतिक हलचल तेज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों ही दलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। पंचायत चुनावों को आगामी विधानसभा और लोकसभा राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव समय पर होने से ग्रामीण विकास योजनाओं, वित्तीय स्वीकृतियों और प्रशासनिक निर्णयों को गति मिलेगी। लंबे समय से प्रशासकों के भरोसे चल रही पंचायतों को अब निर्वाचित प्रतिनिधि मिल सकेंगे।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि राजस्थान में अब पंचायत चुनावों में कोई संवैधानिक बाधा नहीं है। 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराना अनिवार्य होगा, जिससे राज्य में स्थानीय स्वशासन की लोकतांत्रिक व्यवस्था फिर से मजबूत होगी।