अजमेर के स्कूलों में 1.30 करोड़ के विकास कार्यों का शुभारम्भ

प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाएं सरकारी स्कूल : विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी

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 राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सरकारी विद्यालयों को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, संस्कार और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय जरूरी है।

उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों को निर्देश दिए कि अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष शुक्रवार को अजमेर जिले के हाथीखेड़ा और काजीपुरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 1.30 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से होने वाले विकास कार्यों का शुभारम्भ किया और नवनिर्मित कक्षा-कक्षों का लोकार्पण किया।

देवनानी ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर ऐसा होना चाहिए कि अभिभावक निजी स्कूलों की बजाय सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दें। इसके लिए शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं बल्कि संस्कार, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला होते हैं।

नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को दिए निर्देश

कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने शिक्षकों से अपील करते हुए कहा कि वे नामांकन वृद्धि के लिए गंभीर प्रयास करें। प्रत्येक शिक्षक समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का अभियान चलाए। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव या जागरूकता की कमी के कारण बच्चे शिक्षा से दूर रह जाते हैं। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि बच्चों का विद्यालय से आत्मीय संबंध बनना चाहिए। यदि स्कूल का वातावरण सकारात्मक, प्रेरणादायी और सुविधायुक्त होगा तो विद्यार्थी खुशी-खुशी विद्यालय आएंगे। शिक्षा को बोझ नहीं बल्कि आनंद और जीवन निर्माण का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

गर्मी की छुट्टियों में संस्कारयुक्त गतिविधियों पर जोर

देवनानी ने कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान विद्यार्थियों को केवल होमवर्क देने के बजाय रचनात्मक और संस्कारयुक्त गतिविधियों से जोड़ा जाए। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को महापुरुषों की जीवनियां पढ़ने, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण और भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रेरणादायी साहित्य का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकों के अध्ययन से बच्चों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, कर्तव्यबोध और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित होती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक लाना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा नहीं

विधानसभा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली में नैतिक शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को भी बराबर महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, सामाजिक दायित्वबोध और नैतिक मूल्यों का विकास शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।

उन्होंने शिक्षकों को समाज निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि राष्ट्र का भविष्य कक्षा-कक्षों में तैयार होता है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाएं।

शिक्षा क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकता

देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है। विद्यालयों में आधुनिक संसाधनों, बेहतर भवनों, स्मार्ट सुविधाओं और सुरक्षित वातावरण की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों के बीच की दूरी को कम करने के लिए विशेष योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

हाथीखेड़ा विद्यालय में नए कक्षा-कक्षों का शुभारम्भ

विधानसभा अध्यक्ष ने अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हाथीखेड़ा में डीएमएफटी फंड से स्वीकृत तीन नए कक्षा-कक्षों के निर्माण कार्य का शुभारम्भ किया। लगभग 44.82 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इन कक्षों से विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पर्याप्त कक्षा-कक्षों की उपलब्धता से बच्चों को बैठने, पढ़ने और गतिविधियों में भाग लेने के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही स्कूलों में भीड़भाड़ कम होगी और पढ़ाई का स्तर सुधरेगा।

काजीपुरा विद्यालय में भी विकास कार्य

इसी क्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय काजीपुरा में भी लगभग 44.82 लाख रुपये की लागत से तीन नए कक्षा-कक्षों के निर्माण कार्य का शुभारम्भ किया। इसके अलावा पूर्व में करीब 40.92 लाख रुपये की लागत से निर्मित तीन नवीन कक्षा-कक्षों का लोकार्पण भी किया गया।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत और अनुशासन के साथ पढ़ाई करने की प्रेरणा दी।

सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण पर जोर

देवनानी ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां वे शिक्षा के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और नैतिक मूल्यों का भी विकास कर सकें। राज्य सरकार इसी दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है।

शिक्षा से बदलेगा समाज

अपने संबोधन के अंत में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है। यदि सरकारी विद्यालय मजबूत होंगे तो समाज का हर वर्ग बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की नियमित पढ़ाई और विद्यालय गतिविधियों में रुचि लें।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों से ही सरकारी विद्यालयों को उत्कृष्ट बनाया जा सकता है। आने वाले समय में राजस्थान के सरकारी स्कूल गुणवत्ता और संस्कार दोनों के लिए पहचान बनाएंगे।

Golden Hind Desk