जयपुर :- राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सिटी पैलेस जयपुर में गुरुवार शाम जयपुर के हिज हाइनेस ब्रिगेडियर महाराजा सवाई भवानी सिंह, एमवीसी की 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर एक विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए गणमान्य व्यक्तियों, सैन्य अधिकारियों और आमंत्रित अतिथियों ने भाग लिया तथा उनके जीवन, योगदान और विरासत को याद किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल महाराजा भवानी सिंह के बहुआयामी व्यक्तित्व को स्मरण करना था, बल्कि उनके द्वारा स्थापित मूल्यों और विरासत संरक्षण के प्रति उनके दृष्टिकोण को भी सामने लाना था। वे एक कुशल सैनिक, प्रभावशाली राजनेता और जयपुर की सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख संरक्षक के रूप में जाने जाते हैं।
महाराजा सवाई भवानी सिंह को 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनके अदम्य साहस और नेतृत्व के लिए ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था। भारतीय सेना में उन्होंने ‘पैरा कमांडो यूनिट’ का हिस्सा रहते हुए और बाद में ‘10वीं पैराशूट रेजिमेंट’ का नेतृत्व करते हुए उल्लेखनीय सेवाएं दीं।
कार्यक्रम की शुरुआत लेफ्टिनेंट जनरल ठाकुर दौलत सिंह शेखावत और प्रोफेसर आर.एस. खंगारोत के परिचयात्मक विचारों से हुई, जिन्होंने महाराजा के जीवन और उनके योगदान का संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली विवरण प्रस्तुत किया। इसके बाद आयोजित पैनल चर्चा में उनके सैन्य जीवन, व्यक्तिगत संस्मरणों और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।
पैनल में मेजर जनरल दलवीर सिंह, कर्नल वी.एस. चंद्रावत, कर्नल हेम सिंह शेखावत और ठाकुर दुर्गा सिंह, मंडावा जैसे प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने परिवर्तनकाल के दौरान महाराजा भवानी सिंह के नेतृत्व, उनकी दूरदर्शिता और विरासत संरक्षण के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित किया।
चर्चा का संचालन सिटी पैलेस संग्रहालय के मानद सलाहकार डॉ. जाइल्स टिलोटसन ने किया, जिन्होंने विभिन्न दृष्टिकोणों से संवाद को आगे बढ़ाया। इस दौरान यह भी बताया गया कि महाराजा भवानी सिंह ने 1983 में जयगढ़ किले को आम जनता के लिए खोलने और सिटी पैलेस संग्रहालय के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इस अवसर पर जयपुर के हिज हाइनेस महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नाना जी का जीवन देश और जयपुर के प्रति समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि यह पैनल चर्चा उनकी विरासत को समझने और उसे आगे बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास है।
उन्होंने यह भी कहा कि विरासत स्थलों को केवल दर्शनीय स्थल के रूप में नहीं, बल्कि संवाद और सीखने के मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इस दिशा में सिटी पैलेस संग्रहालय लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि इसे एक ‘जीवित विरासत स्थल’ के रूप में स्थापित किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि महाराजा भवानी सिंह की विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उनके जीवनकाल में थी। उनके द्वारा स्थापित आदर्श—देश सेवा, नेतृत्व और सांस्कृतिक संरक्षण—आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।
यह आयोजन सिटी पैलेस संग्रहालय द्वारा चलाए जा रहे उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य इतिहास को जीवंत बनाए रखना और समाज को उससे जोड़ना है। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से न केवल अतीत को याद किया जाता है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक स्पष्ट दिशा निर्धारित की जाती है।