महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय, समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) द्वारा महिला पर्यवेक्षक के 416 पदों पर नियुक्ति के आदेश जारी किये गए हैं। उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। विभाग में कार्मिकों की कमी नहीं होने से कार्य सुगमता से होंगे जिससे महिला एवं बाल विकास की योजनाओं से आमजन सरलता और सुगमता से लाभान्वित हो सकेंगे। निदेशक आईसीडीएस ओ. पी. बुनकर ने बताया कि विभाग में 416 कार्मिकों को पोस्टिंग मिली है। इसमें से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोटे से 216 कार्यकर्ताओं की और सीधी भर्ती से 200 महिला पर्यवेक्षकों की भर्ती की गई है। निदेशक ने बताया कि इससे विभाग के कार्य संपादन और मॉनिटरिंग में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि विभाग को नवीन कार्मिक मिलने से उसकी कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। उक्त कैडर के 20 प्रतिशत से अधिक कार्मिकों का मिलना विभागीय कार्यों के संपादन में उपयोगी होगा। निदेशक आईसीडीएस ने बताया कि राज्य की बाल विकास परियोजनाओं में कार्यरत सभी सीडीपीओ को निर्देशित किया है कि उक्त आदेश में दिए गए निर्देशानुसार कार्मिकों की पर्सनल फाइल का संधारण सुव्यवस्थित ढ़ंग से किया जाए और कार्मिकों की सर्विस बुक भी को समय पर बनाकर उसमें तथ्यात्मक सूचनाएं सावधानी से सुस्पष्टता से भरी जाए। अधूरी सर्विस बुक बाद में समस्या का कारण बनती है। उन्होंने कार्मिकों की फोटो, हस्ताक्षर , अँगुली और अंगूठे के निशान, शैक्षणिक योग्यता इत्यादि सभी एंट्री पूर्ण सावधानी से करने के निर्देश दिए।निदेशक ओ.पी. बुनकर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोटे से भर्ती हुई कार्यकर्ता से विभाग द्वारा आवंटित फोन तथा समस्त रिकार्ड अन्य कार्यकर्ता/ सहायिका जिसको भी चार्ज दिया जा रहा है, को सुपुर्द करने के उपरांत ही कार्यमुक्त आदेश जारी करने के सीडीपीओ को निर्देश दिए। उन्होंने सीडीपीओ को उक्त कार्मिकों को कार्यमुक्ति आदेश के साथ नियुक्ति आदेश भी जारी करने और निर्देशानुसार फोटो युक्त अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी किया करने और इनका संधारण कार्मिक की पर्सनल फाइल में करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग का हो रहा सुदृढ़ीकरण
महिला पर्यवेक्षक के 416 पदों पर नियुक्ति के आदेश हुए जारी
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15 अगस्त से ग्रामीण राजस्थान में सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू होगा
राजस्थान में 15 अगस्त से सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान, ग्रामीण क्षेत्रों में होगी सख्त कार्रवाई
राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 15 अगस्त से राज्यव्यापी विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक के निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करने के लिए जनजागरूकता और प्रवर्तन गतिविधियां चलाई जाएंगी। इसके साथ ही 30 सितंबर तक ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सिंगल यूज़ प्लास्टिक नियंत्रण संबंधी नई नीति का मसौदा तैयार किया जाएगा।
यह निर्णय मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने की, जबकि पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी भी उपस्थित रहे।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतराबैठक में मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर्यावरण, पशुधन और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्लास्टिक मुक्त राजस्थान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से परिणामोन्मुख कार्य करें।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों में जागरूकता और वैकल्पिक उत्पादों के उपयोग को भी बढ़ावा देना आवश्यक है।
30 सितंबर तक तैयार होगी नई नीतिमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रभावी नियंत्रण के लिए 30 सितंबर तक विस्तृत नीति का मसौदा तैयार किया जाए। यह नीति भविष्य में प्लास्टिक के उपयोग को नियंत्रित करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना का आधार बनेगी।
सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा सके और टिकाऊ विकल्प अपनाए जा सकें।
15 अगस्त से चलेगा विशेष अभियानराज्य सरकार के निर्देशानुसार स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से सभी ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान के दौरान ग्राम पंचायतों, पंचायती राज संस्थाओं और संबंधित विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि जनसहभागिता के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप देना भी है। सरकार चाहती है कि गांव स्तर पर नागरिक स्वयं प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
नियमों के तहत होगी सख्त कार्रवाईनई नीति लागू होने तक वर्तमान नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत सिंगल यूज़ प्लास्टिक के निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री और उपयोग के खिलाफ नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रतिबंध का पालन पूरी तरह हो सके।
सरकारी कार्यालय होंगे प्लास्टिक मुक्तबैठक में सभी सरकारी विभागों और कार्यालयों में सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने के निर्देश भी दिए गए।
मंत्री ने कहा कि सरकारी कार्यालय स्वयं प्लास्टिक मुक्त कार्यसंस्कृति अपनाकर समाज के लिए उदाहरण बनें। इससे आमजन को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश मिलेगा।
जनजागरूकता पर रहेगा विशेष जोरराज्य सरकार ने माना है कि प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान भी आवश्यक है।
इस उद्देश्य से ग्राम पंचायतों, स्थानीय निकायों, विद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न सरकारी विभागों के सहयोग से लोगों को सिंगल यूज़ प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
साथ ही नागरिकों को कपड़े के थैले, जूट बैग और अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्पों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कई विभागों की होगी भागीदारीबैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), स्वायत्त शासन विभाग, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उद्योग विभाग, परिवहन विभाग तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर अभियान को प्रभावी बनाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
राजस्थान सरकार का मानना है कि सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ यह राज्यव्यापी अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यदि सरकारी एजेंसियों के साथ आमजन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो ग्रामीण राजस्थान को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है।
राजस्थान पुलिस की चेतावनी: मोबाइल में सेव निजी डेटा बढ़ा सकता है साइबर ठगी का खतरा
राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी: मोबाइल में सेव पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी और निजी दस्तावेज बन सकते हैं साइबर ठगी का कारण
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए चेतावनी दी है कि मोबाइल फोन में पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी, निजी दस्तावेज और अन्य संवेदनशील डेटा सुरक्षित रखना साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बन सकता है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और मोबाइल में संवेदनशील जानकारी रखने से पहले आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाएं।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी इस एडवाइजरी में कहा गया है कि आज स्मार्टफोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी दस्तावेज, निजी फोटो-वीडियो, ईमेल और डिजिटल लॉकर जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मोबाइल में मौजूद रहती हैं। ऐसे में यदि फोन हैक हो जाए, चोरी हो जाए या किसी साइबर अपराधी के हाथ लग जाए तो आर्थिक नुकसान के साथ पहचान चोरी और ब्लैकमेलिंग जैसी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।
रोजाना हो रहे हैं 1.3 लाख से अधिक साइबर हमलेराजस्थान पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि भारत में प्रतिदिन 1.3 लाख से अधिक साइबर हमले दर्ज किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-सी लापरवाही भी लोगों के बैंक खातों, व्यक्तिगत पहचान और निजी जानकारी को खतरे में डाल सकती है।
उन्होंने हाल ही में सामने आए बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। एक मामले में कर्मचारी के ईमेल के जरिए लगभग 1 टेराबाइट डेटा डार्क वेब पर लीक होने की घटना सामने आई थी।
लोग मोबाइल में क्या-क्या सेव रखते हैंएडीजी वीके सिंह के अनुसार विभिन्न रिपोर्टों में सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोग अपनी महत्वपूर्ण जानकारी मोबाइल फोन में ही सेव रखते हैं। इनमें—
61 प्रतिशत लोग निजी दस्तावेज
60 प्रतिशत लोग फोटो और वीडियो
48 प्रतिशत लोग ऑफिस ई-मेल
38 प्रतिशत लोग बैंकिंग जानकारी
37 प्रतिशत लोग एआई चैट हिस्ट्री
34 प्रतिशत लोग अपने पासवर्ड मोबाइल में सुरक्षित रखते हैं।
पुलिस का कहना है कि यही जानकारी साइबर अपराधियों के लिए सबसे अधिक मूल्यवान होती है।
साइबर अपराधियों के मुख्य निशानेराजस्थान पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी मुख्य रूप से चार प्रकार की जानकारियों को निशाना बनाते हैं।
पहचान चोरी (Identity Theft): आधार, पैन कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारी का उपयोग कर फर्जी सिम कार्ड, बैंक खाते या लोन लिए जा सकते हैं।
वित्तीय धोखाधड़ी: बैंकिंग ऐप, यूपीआई, नेट बैंकिंग और ओटीपी तक पहुंच बनाकर बैंक खातों से रकम निकाली जा सकती है।
ब्लैकमेलिंग: निजी फोटो, वीडियो और एआई चैट हिस्ट्री का दुरुपयोग कर लोगों को ब्लैकमेल किया जा सकता है या डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में फंसाया जा सकता है।
कॉरपोरेट जासूसी: कंपनियों के गोपनीय दस्तावेज और ऑफिस ई-मेल चुराकर फिरौती मांगने या व्यावसायिक नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस की सलाहराजस्थान पुलिस ने नागरिकों को मोबाइल सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग या अन्य संवेदनशील कार्य करने से बचें। यदि आवश्यक हो तो विश्वसनीय वीपीएन का उपयोग करें।
मोबाइल में स्क्रीन लॉक और स्टोरेज एन्क्रिप्शन हमेशा सक्रिय रखें।
किसी भी ऐप को केवल आवश्यक परमिशन ही दें।
बैंकिंग ऐप और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सिक्योर या हिडेन फोल्डर में रखें।
क्लाउड बैकअप को मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित करें।
ऐप्स केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें।
फोन में लोकेशन ट्रैकिंग, ऑटो बैकअप और स्क्रीन लॉक हमेशा चालू रखें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायतराजस्थान पुलिस ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी या कोई संदिग्ध डिजिटल गतिविधि होती है तो वह बिना देरी किए निकटतम पुलिस थाना या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराए।
इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। राजस्थान पुलिस ने नागरिकों की सहायता के लिए साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 भी जारी किए हैं।
राजस्थान पुलिस का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। मोबाइल फोन में संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रखने से पहले उचित सुरक्षा उपाय अपनाकर नागरिक साइबर ठगी, पहचान चोरी और आर्थिक नुकसान जैसी घटनाओं से काफी हद तक बच सकते हैं।
वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2026: जयपुर से रामेश्वरम के लिए दूसरी विशेष ट्रेन रवाना
वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2026: जयपुर से रामेश्वरम के लिए दूसरी विशेष ट्रेन रवाना, 970 बुजुर्ग करेंगे पावन दर्शन
राजस्थान सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2026 के तहत मंगलवार को जयपुर के ढेहर का बालाजी रेलवे स्टेशन से रामेश्वरम के लिए दूसरी विशेष ट्रेन रवाना हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में संचालित इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। विशेष ट्रेन को उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ट्रेन के प्रस्थान के दौरान स्टेशन परिसर 'जय श्री राम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा।
इस विशेष ट्रेन के माध्यम से जयपुर संभाग के 970 वरिष्ठ नागरिक रामेश्वरम और मदुरई के दर्शन के लिए रवाना हुए हैं। यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं के लिए ट्रेन में प्रभारी, अनुदेशक, चिकित्सा दल और अन्य कर्मचारियों सहित 30 अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम भी साथ भेजी गई है। इस प्रकार कुल 1,000 लोग इस विशेष यात्रा का हिस्सा बने हैं।
बुजुर्गों की आस्था को मिला सम्मानराजस्थान सरकार का कहना है कि वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और इच्छुक बुजुर्गों को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के माध्यम से उन वरिष्ठ नागरिकों के वर्षों पुराने धार्मिक सपनों को साकार करने का प्रयास किया जा रहा है, जो स्वयं ऐसी यात्राएं करने में सक्षम नहीं हैं।
यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने यात्रियों का अभिवादन करते हुए उनकी सुखद, सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की कामना की। स्टेशन पर मौजूद तीर्थयात्रियों और उनके परिजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
सबसे अधिक यात्री दौसा जिले सेदेवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि इस विशेष ट्रेन में सबसे अधिक 528 तीर्थयात्री दौसा जिले से शामिल हुए हैं। इसके अलावा खैरथल-तिजारा जिले से 316 तथा जयपुर जिले से 126 वरिष्ठ नागरिक इस यात्रा का लाभ उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनकी धार्मिक आस्था के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। सरकार का प्रयास है कि बुजुर्गों को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। इसी उद्देश्य से भोजन, आवास, चिकित्सा, सुरक्षा और परिवहन की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
यात्रा के दौरान रहेंगी विशेष सुविधाएंयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन में चिकित्सा दल, यात्रा प्रभारी और सहयोगी स्टाफ की नियुक्ति की गई है। यात्रा के दौरान आवश्यक दवाइयों, प्राथमिक उपचार, भोजन, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
देवस्थान विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक यात्री की सुरक्षा और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाएगी ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक रहे।
ऐसा रहेगा आठ दिवसीय यात्रा कार्यक्रमयह विशेष ट्रेन दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराएगी। यात्रा कार्यक्रम के अनुसार ट्रेन 6 अगस्त को रामेश्वरम पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु भगवान रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। रामेश्वरम में यात्रियों के लिए एक दिन का ठहराव निर्धारित किया गया है।
इसके बाद सभी यात्रियों को मदुरई ले जाया जाएगा, जहां वे विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर के दर्शन करेंगे। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद विशेष ट्रेन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वापस जयपुर लौटेगी।
स्टेशन पर भावुक हुआ माहौलविशेष ट्रेन के रवाना होने से पहले ढेहर का बालाजी रेलवे स्टेशन पर भावनात्मक माहौल देखने को मिला। कई बुजुर्ग पहली बार इतने लंबे धार्मिक सफर पर निकले। उनके परिजनों ने उन्हें शुभकामनाओं के साथ विदा किया।
देवस्थान विभाग की ओर से सभी यात्रियों का तिलक लगाकर और माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। स्टेशन पर मौजूद लोगों ने यात्रियों का उत्साहवर्धन किया और धार्मिक जयघोषों के बीच ट्रेन अपने गंतव्य के लिए रवाना हुई।
सरकार की प्राथमिकता में वरिष्ठ नागरिक कल्याणराजस्थान सरकार का कहना है कि वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बुजुर्गों के सम्मान और उनके सामाजिक कल्याण से भी जुड़ी हुई है। सरकार लगातार ऐसी योजनाओं के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को अधिक सम्मानजनक और सुविधाजनक बनाने का प्रयास कर रही है।
सरकार के अनुसार इस योजना से प्रदेश के हजारों वरिष्ठ नागरिकों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर मिल रहा है। सुरक्षित यात्रा, बेहतर व्यवस्थाओं और समुचित देखभाल के साथ यह योजना बुजुर्गों की आस्था और विश्वास को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
राजस्थान में रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा बूस्ट, 2,101 करोड़ रुपये से बनेंगी 3,232 नॉन-पैचेबल एवं मिसिंग लिंक सड़कें
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली नई रफ्तार, 2,101.16 करोड़ रुपये से बनेंगी 3,232 नॉन-पैचेबल एवं मिसिंग लिंक सड़कें
राजस्थान में सड़क आधारभूत ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेशभर में नॉन-पैचेबल एवं मिसिंग लिंक सड़कों के निर्माण के लिए 2,101.16 करोड़ रुपये की लागत से 3,232 कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है। यह निर्णय बजट वर्ष 2026-27 में की गई घोषणा को अमलीजामा पहनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस परियोजना से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क मजबूत होगा, जिससे आमजन को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।
राज्य सरकार के अनुसार सड़क नेटवर्क किसी भी प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ होता है। बेहतर सड़कें न केवल लोगों की आवाजाही को आसान बनाती हैं, बल्कि व्यापार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों के विस्तार में भी अहम भूमिका निभाती हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर में उन सड़कों का निर्माण और उन्नयन किया जाएगा, जो लंबे समय से नॉन-पैचेबल या मिसिंग लिंक की श्रेणी में थीं।
सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन के अनुरूप प्रदेश के हर गांव, हर कस्बे और हर शहर को गुणवत्तापूर्ण सड़क संपर्क उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां सड़क संपर्क की कमी के कारण लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नई परियोजना के माध्यम से ऐसे हजारों मार्गों को विकसित किया जाएगा, जिससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों को भी मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा।
स्वीकृत 3,232 कार्यों के पूरा होने के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़क संपर्क पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। वहीं किसानों को अपनी कृषि उपज मंडियों तक पहुंचाने में कम समय और कम लागत लगेगी, जिससे उनकी आय बढ़ाने में भी सहायता मिल सकती है।
परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है। बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक क्षेत्रों, व्यापारिक केंद्रों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की संभावना है। सड़क निर्माण कार्यों के दौरान भी बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार का कहना है कि सड़क निर्माण के इन कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जाएं, ताकि सड़कों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहे और लोगों को सुरक्षित आवागमन का लाभ मिल सके। इसके साथ ही परियोजनाओं की नियमित निगरानी भी की जाएगी, जिससे कार्यों में अनावश्यक देरी न हो।
राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्य में सड़क संपर्क का महत्व और भी अधिक है। कई गांव और कस्बे अभी भी बेहतर सड़क सुविधाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। सरकार का मानना है कि इन नई परियोजनाओं से ऐसे क्षेत्रों में विकास की गति तेज होगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। सड़क संपर्क बेहतर होने से शिक्षा संस्थानों, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और बाजारों तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक आसान होगी।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि मजबूत सड़क नेटवर्क किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति का आधार होता है। सड़कें बेहतर होने से परिवहन लागत कम होती है, माल की आवाजाही तेज होती है और उद्योगों को भी लाभ मिलता है। इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र को भी नई गति मिलती है, क्योंकि पर्यटकों के लिए विभिन्न स्थलों तक पहुंच आसान हो जाती है। राजस्थान जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में सड़क ढांचे का विस्तार पर्यटन उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार के अनुसार इस पहल से प्रदेश के युवाओं को भी लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क के कारण उन्हें शिक्षा संस्थानों, कौशल विकास केंद्रों और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में सुविधा होगी। वहीं उद्यमियों और छोटे व्यापारियों के लिए भी परिवहन व्यवस्था सुगम होने से व्यवसाय का विस्तार करना आसान होगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार आधारभूत ढांचे के विकास पर जोर दे रही है। सड़क, जल, ऊर्जा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से प्रदेश को विकास की नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में सड़क निर्माण की यह बड़ी परियोजना राज्य के विकास एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
सरकार का दावा है कि 2,101.16 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत 3,232 नॉन-पैचेबल एवं मिसिंग लिंक सड़क निर्माण कार्य प्रदेश के विकास को नई गति देंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद न केवल लोगों को बेहतर और सुरक्षित सड़क सुविधा मिलेगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच मजबूत संपर्क स्थापित होने से विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भी आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए इसी तरह की विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि राजस्थान समग्र और संतुलित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।
चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती, पुनर्वास के बिना नहीं हटाए जाएंगे घुमंतू परिवार: मदन दिलावर
चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पुनर्वास से पहले नहीं हटाए जाएंगे घुमंतू परिवार: मदन दिलावर
पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित पंचायती राज विभाग के सभागार में विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। बैठक में पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान चारागाह भूमि पर अतिक्रमण, घुमंतू परिवारों के पुनर्वास, ग्राम पंचायत सुरक्षा गार्डों के भुगतान और लंबित प्रकरणों के निस्तारण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मंत्री मदन दिलावर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी और चारागाह भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
चारागाह भूमि से 15 दिन में हटाएं अतिक्रमणपंचायती राज मंत्री ने कहा कि चारागाह भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को पहले नियमानुसार नोटिस जारी किए जाएं और उन्हें 15 दिन के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया जाए। यदि निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं हटाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज कराते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी समय पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध भी नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
अतिक्रमण कार्रवाई को सार्वजनिक करने के निर्देशमंत्री दिलावर ने कहा कि सरकारी भूमि को सुरक्षित रखने के लिए आमजन में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई को प्रभावी तरीके से सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा कि अतिक्रमणकारियों के नाम, कार्रवाई का विवरण, फोटो और अन्य आवश्यक जानकारी स्थानीय समाचार पत्रों तथा अन्य मीडिया माध्यमों के जरिए सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ स्पष्ट संदेश जाए।
पुनर्वास के बिना नहीं हटाए जाएं घुमंतू परिवारबैठक में मंत्री मदन दिलावर ने घुमंतू समुदाय के परिवारों से जुड़े मामलों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए और उन्हें हटाने से पहले उचित पुनर्वास व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी विभिन्न मामलों में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को महत्वपूर्ण मान चुका है। इसलिए घुमंतू समुदाय के परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए हटाने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का समाधान संवेदनशीलता और नियमानुसार किया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां संबंधित विभागों के समन्वय से पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि प्रभावित परिवारों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
ग्राम पंचायत सुरक्षा गार्डों के भुगतान जल्द करेंसमीक्षा बैठक में ग्राम पंचायतों में कार्यरत सुरक्षा गार्डों के लंबित भुगतान का मुद्दा भी उठाया गया। मंत्री दिलावर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरक्षा गार्डों का लंबित पारिश्रमिक प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द जारी किया जाए।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिलना उनका अधिकार है और इसमें अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि भुगतान में लापरवाही बरतने वाले या संविदा शर्तों का पालन नहीं करने वाले ठेकेदारों और एजेंसियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मंत्री ने कहा कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाएगी।
लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करेंबैठक के दौरान मंत्री कार्यालय से प्राप्त विभिन्न लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। इसमें एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामले, छह से बारह माह पुराने प्रकरण, तीन से पांच माह, एक से तीन माह तथा एक माह तक लंबित मामलों की श्रेणीवार समीक्षा की गई।
मंत्री दिलावर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार समय सीमा में समाधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि भविष्य में अनावश्यक देरी की स्थिति उत्पन्न न हो। जनता से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने पर जोरमंत्री ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं और सरकारी निर्णयों का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंचे। इसके लिए फील्ड स्तर पर नियमित निगरानी, अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।
बैठक में पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं और लंबित कार्यों की प्रगति से मंत्री को अवगत कराया।
मंत्री मदन दिलावर ने बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की नीतियों और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को बेहतर सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।