इस्तीफे के पीछे स्वास्थ कारणों का हवाला कांग्रेस का कहना है कि सरकार की नाराजगी बढ़ने पर जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन ये केवल चर्चा भर है, जबकि उन्होंने अपने इस्तीफे में स्पष्ट तौर पर स्वास्थ कारणों का हवाला दिया है. अब उनके इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. इससे पहले भी कई दफा अपने बयानों को लेकर जगदीप धनखड़ चर्चा में रहे हैं. एक सार्वजनिक मंच पर उन्होंने किसानों के आंदोलन का मुद्दा उठा दिया था, तब उस वक्त मंच पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे. उपराष्ट्रपति के तौर पर उनके उस बयान को विपक्ष ने जमकर मुद्दा बनाया था
जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में क्या कहा
सबसे पहले बात करते हैं कि जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में क्या-क्या कहा? उन्होंने त्यागपत्र देते हुए कहा, ‘स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और मेडिकल सलाह का पालन करने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं. मैं भारत की राष्ट्रपति के प्रति उनके अटूट सपोर्ट और मेरे कार्यकाल के दौरान हमारे बीच बने सुखद और अद्भुत कार्य संबंधों के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं. प्रधानमंत्री का सहयोग और सपोर्ट अमूल्य रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है उन्होंने आगे लिखा, ‘सभी संसद सदस्यों से मुझे जो गर्मजोशी, विश्वास और स्नेह मिला है, वह सदैव मेरी स्मृति में बना रहेगा. हमारे महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में मिले अमूल्य अनुभवों और अंतर्दृष्टि के लिए मैं हृदय से आभारी हूं. इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान भारत की उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति और अभूतपूर्व विकास को देखना और उसमें भाग लेना मेरे लिए सौभाग्य व संतुष्टि की बात रही है. हमारे राष्ट्र के इतिहास के इस परिवर्तनकारी युग में सेवा करना मेरे लिए एक सच्चा सम्मान रहा है. इस प्रतिष्ठित पद से विदा लेते हुए मैं भारत के वैश्विक उत्थान और अभूतपूर्व उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहा हूं
इस्तीफे के बाद क्या बोले जयराम रमेश?
अब जब राष्ट्रपति ने लगभग सात महीने बाद अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया तो जयराम रमेश ने कहा कि उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति का अचानक इस्तीफा जितना चौंकाने वाला है, उतना ही अकल्पनीय भी. वे सोमवार शाम लगभग 5 बजे तक कई अन्य सांसदों के साथ उनके साथ थे और शाम साढ़े सात बजे उनसे फोन पर बात भी की थी. इसमें कोई संदेह नहीं कि धनखड़ को अपने स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, लेकिन उनके अप्रत्याशित इस्तीफे के पीछे जो दिख रहा है उससे कहीं ज़्यादा कुछ है. हालांकि, यह अटकलों का समय नहीं है उन्होंने कहा कि धनखड़ ने सरकार और विपक्ष, दोनों को समान रूप से आड़े हाथों लिया. उन्होंने मंगलवार दोपहर 1 बजे कार्य मंत्रणा समिति की बैठक तय की थी. उन्हें न्यायपालिका से जुड़ी कुछ बड़ी घोषणाएं भी करनी थीं. हम उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं, लेकिन उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का भी अनुरोध करते हैं. हम यह भी उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री धनखड़ को अपना मन बदलने के लिए राजी करेंगे. यह देशहित में होगा. खासकर किसान समुदाय को इससे बहुत राहत मिलेगी