पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर भड़क उठा

इजराइल का ईरान की मिसाइल फैक्ट्री पर हमला, ईरानी सीमा के 2000 KM अंदर गिरे बम

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तेहरान/यरुशलम – इजराइल ने ईरान की मिसाइल निर्माण फैक्ट्री पर एक बड़ी एयरस्ट्राइक की है। यह हमला ईरानी सीमा के 2000 किलोमीटर अंदर किया गया, जिसे अब तक की सबसे गहरी घुसपैठ बताया जा रहा है। इस हमले में कई सैन्य ठिकानों के ध्वस्त होने की खबर है, जबकि कुछ अनौपचारिक सूत्रों ने दावा किया है कि इसमें ईरान के मिसाइल तकनीक विशेषज्ञों की भी मौत हुई है। इजराइल-ईरान संघर्ष को 10 दिन हो चुके हैं। इजराइली एयरफोर्स ने रविवार देर रात ईरान के शाहरुद में बैलिस्टिक मिसाइल का इंजन बनाने वाली फैक्ट्री पर बमबारी की। यह जगह इजराइल से करीब 2000 किलोमीटर दूर है।

हमले का पैटर्न और समय
इजराइली वायुसेना के मुताबिक, यह हमला रविवार देर रात को अंजाम दिया गया। F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स ने गुप्त ऑपरेशन के तहत मिसाइल फैक्ट्री को निशाना बनाया। यह इलाका ईरान के इस्फहान प्रांत के पास स्थित बताया जा रहा है, जहां ईरान अपनी लॉन्ग-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार करता रहा है। रडार और ड्रोन सिस्टम को चकमा देने के लिए हमले में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ईरानी मीडिया ने हमले की पुष्टि की है लेकिन नुकसान की सही जानकारी साझा नहीं की गई है। सरकारी बयान में कहा गया है कि "हमने दुश्मन के हमले को रोक लिया है", हालांकि सेटेलाइट तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने इस हमले को 'सीधा युद्ध भड़काने की साजिश' बताया है। ईरानी रक्षा मंत्रालय ने कहा, "अगर इजराइल ने दोबारा ऐसा दुस्साहस किया, तो इसका जवाब क्षेत्रीय स्तर पर दिया जाएगा।" साथ ही ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है।

ट्रम्प का बयान और ‘तख्तापलट’ का संकेत
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बयान इस पूरे घटनाक्रम को और पेचीदा बना रहा है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट किया –“Make Iran Great Again – यह तभी होगा जब इस आतंकी शासन को हटाया जाएगा।” राजनीतिक विशेषज्ञ इसे ईरान में 'तख्तापलट' का संकेत मान रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन पहले भी ईरान के खिलाफ कड़े रुख के लिए जाना जाता रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा- अगर मौजूदा ईरानी सरकार 'ईरान को फिर से महान' नहीं बना सकती, तो सत्ता परिवर्तन क्यों नहीं होना चाहिए? मेक ईरान ग्रेट अगेन। अमेरिका ने कल ईरान में 3 परमाणु ठिकानों पर हमला करके जंग में एंट्री की। ये ठिकाने फोर्डो, नतांज और इस्फहान थे। इस ऑपरेशन में 7 B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने ईरान के फोर्डो और नतांज न्यूक्लियर ठिकानों पर 13,608 किलो वजनी बंकर बस्टर बम गिराए।

इस हमले के पीछे की रणनीति
विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला सिर्फ ईरान के हथियार कार्यक्रम को रोकने के लिए नहीं, बल्कि उसके वैश्विक प्रभाव को सीमित करने की रणनीति का हिस्सा है। ईरान हाल ही में रूस, चीन और उत्तरी कोरिया के साथ अपने रक्षा संबंधों को बढ़ा रहा था। इजराइल को डर है कि ईरान जल्द ही परमाणु हथियार क्षमता हासिल कर सकता है।

क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की आशंका
इस हमले के बाद मध्य-पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है। हिजबुल्लाह, हमास जैसे संगठन पहले से ही इजराइल के खिलाफ सक्रिय हैं। अब अगर ईरान ने प्रत्यक्ष जवाबी कार्रवाई की, तो पूरा क्षेत्र युद्ध की ओर बढ़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक प्रतिक्रिया
UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका की वर्तमान बाइडेन सरकार ने इजराइल के “आत्मरक्षा के अधिकार” को मान्यता दी है लेकिन सीधी कार्रवाई का समर्थन नहीं किया है। 
इजराइल का यह हमला केवल एक सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है – ईरान की बढ़ती ताकत और उसके मिसाइल कार्यक्रम को किसी भी कीमत पर रोका जाएगा। दूसरी ओर, ट्रम्प का बयान इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे रहा है, जिससे वैश्विक कूटनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।