नई दिल्ली/जयपुर: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार को राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित शराब की दुकानों को हटाने या स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे। शीर्ष अदालत के इस फैसले से फिलहाल प्रदेश में राजमार्गों के पास संचालित शराब की दुकानों को राहत मिली है।
क्या था हाईकोर्ट का आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आदेश दिया था कि हाईवे से 500 मीटर के दायरे में आने वाली शराब की दुकानों को हटाया जाए। कोर्ट का तर्क था कि राजमार्गों के नजदीक शराब की बिक्री से सड़क हादसों की आशंका बढ़ती है और यह आमजन की सुरक्षा के लिए खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार और शराब लाइसेंसधारकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की चिंता जनहित से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इतने व्यापक स्तर पर आदेश देने से पहले पूर्व के न्यायिक निर्णयों और नियमों पर विस्तार से विचार जरूरी है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
राज्य सरकार की दलील
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट के आदेश से सैकड़ों शराब दुकानें प्रभावित होंगी, जिससे राजस्व पर असर पड़ेगा और पहले से जारी लाइसेंस प्रक्रिया में अव्यवस्था उत्पन्न होगी। साथ ही यह भी कहा गया कि शहरी क्षेत्रों से गुजरने वाले हाईवे पर पहले से ही अलग-अलग नियम लागू हैं।
अब आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद फिलहाल राजमार्गों के किनारे शराब की दुकानें पूर्ववत संचालित होती रहेंगी। मामले में अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सभी पक्षों की दलीलें सुनकर अंतिम फैसला करेगा।
क्यों अहम है मामला
यह मामला सिर्फ शराब दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा, राज्य के राजस्व और न्यायिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद ही यह तय होगा कि राजस्थान में हाईवे किनारे शराब बिक्री को लेकर भविष्य की नीति क्या होगी।