स्थानीय चुनावों की तैयारी, दलों की सक्रियता बढ़ी

पंचायत-निकाय चुनाव की आहट, राजस्थान में सियासी सरगर्मी तेज

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 राजस्थान , राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ गई हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि प्रदेश अगले वर्ष एक अहम चुनावी प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है।

निर्वाचन आयोग ने चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने पर जोर दिया है। इसके लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी की जाएं, ताकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

चुनाव प्रचार और खर्च पर कड़ी निगरानी

आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान धनबल और दबाव की राजनीति को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रचार के साधनों, वाहनों और खर्च की सीमा को लेकर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

परिसीमन और मतदाता सूची पर काम तेज

पंचायतों और नगरीय निकायों में वार्ड परिसीमन और मतदाता सूचियों के अद्यतन का कार्य भी तेज कर दिया गया है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि परिसीमन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय न हो।

राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी

चुनाव की आहट के साथ ही भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय हो गए हैं। संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है और जमीनी स्तर पर समीकरण साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक महत्व

पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि राज्य सरकार की नीतियों और फैसलों को जनता किस हद तक स्वीकार कर रही है। यही कारण है कि सभी दल इन चुनावों को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।