जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में राज्य प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से प्रशासनिक सुधारों को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, विभागीय सचिवों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं और नीतियों का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब उनका प्रभाव सीधे आम जनता तक पहुंचेगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और अनावश्यक प्रक्रियाओं, देरी तथा जटिलताओं को समाप्त करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मूल उद्देश्य जनता की सेवा है, न कि केवल फाइलों का निपटारा। लंबित मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने पर बल दिया।
बैठक में ई-गवर्नेंस और डिजिटल सुशासन को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल औपचारिकता न बने, बल्कि उसका सीधा लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे। जन-सुनवाई पोर्टल, ऑनलाइन आवेदन प्रणाली और डीबीटी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। डिजिटल माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने फील्ड स्तर पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि अधिकारी नियमित रूप से जिलों और उपखंडों का दौरा करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कागजी रिपोर्टों के आधार पर संतोष न किया जाए, बल्कि योजनाओं की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जाए।
बैठक में विकास कार्यों की प्रगति और बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा की गई घोषणाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से संवेदनशीलता, जवाबदेही और जनसंवाद बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधार केवल नियमों से नहीं, बल्कि सोच और कार्यसंस्कृति में बदलाव से संभव हैं। सरकार सुशासन के संकल्प के साथ कार्य कर रही है और प्रशासन को अधिक पारदर्शी तथा जनहितैषी बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।