जयपुर: मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को आस्था, परंपरा और लोककल्याण का संदेश देते हुए डीग स्थित श्रीनाथ जी मंदिर में विधिवत दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीनाथ जी से प्रदेश की निरंतर प्रगति, सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए कामना की।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सपरिवार श्रीनाथ जी महाराज का पंचामृत अभिषेक किया। इस दौरान उन्होंने दूध, दही, घी, शहद एवं शर्करा से भगवान श्रीनाथ जी का अभिषेक कर विशेष पूजा संपन्न की। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने श्रीनाथ जी के मुकुट एवं मुखारबिंद का विशेष श्रृंगार और पूजन किया। पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
पूजा-अर्चना से पूर्व मुख्यमंत्री ने जतिपुरा में संत-साधुओं को भोजन प्रसादी ग्रहण करवाई, जिससे सामाजिक समरसता और सेवा भाव का संदेश दिया गया। संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद प्रदान करते हुए प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री ने पक्षी-घर का किया उद्घाटन
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने श्रीनाथ जी मंदिर परिसर में नवनिर्मित पक्षी-घर का विधिवत उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति, पर्यावरण और मूक प्राणियों का संरक्षण मानव का परम धर्म है। यह पक्षी-घर क्षेत्र में रहने वाले पक्षियों के लिए दाना-पानी, संरक्षण और सुरक्षित आश्रय का केंद्र बनेगा तथा पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसे कार्य समाज में संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करते हैं।
पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। “श्रीनाथ जी महाराज की जय” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया।
इस अवसर पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म, अन्य जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री की इस धार्मिक एवं जनकल्याणकारी सहभागिता ने न केवल श्रद्धालुओं में उत्साह और विश्वास का संचार किया, बल्कि प्रदेश की समृद्ध धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरण-संरक्षण की परंपरा को भी सशक्त रूप से सामने रखा।