नासागर झील में नहीं गिरेगा सीवरेज का गंदा पानी, 22.27 करोड़ की योजना तैयार, जल्द शुरू होगा काम
अजमेर शहर की पहचान और प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल आनासागर झील को जल्द ही सीवरेज और नालों के गंदे पानी से राहत मिलने वाली है। वर्षों से झील में गिर रहे प्रदूषित पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए राज्य सरकार ने 22.27 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत झील में गिरने वाले गंदे नालों को डायवर्ट कर पम्पिंग स्टेशन के माध्यम से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाया जाएगा, जहां पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार योजना पर जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
यह जानकारी सोमवार को अजमेर के सर्किट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में सामने आई। बैठक की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने की। बैठक में राज्य बजट की घोषणाओं, जनहित से जुड़े विकास कार्यों और शहर की प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान आनासागर झील के संरक्षण, स्वच्छता और जल गुणवत्ता को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
22.27 करोड़ रुपये की परियोजना से होगा स्थायी समाधान
बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों ने बताया कि आनासागर झील में गिरने वाले सीवरेज और नालों के गंदे पानी को रोकने के लिए 22.27 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना तैयार कर ली गई है। इस योजना के तहत झील में सीधे गिरने वाले नालों को डायवर्ट किया जाएगा। इसके बाद पम्पिंग स्टेशन के जरिए इस पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसका उपचार कर पर्यावरण मानकों के अनुरूप उपयोग किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना के लागू होने के बाद झील में प्रदूषित पानी का प्रवाह काफी हद तक रुक जाएगा। इससे झील की जल गुणवत्ता में सुधार आएगा और इसके प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
नियमित सफाई अभियान भी जारी
नगर निगम की ओर से आनासागर झील की नियमित सफाई का कार्य लगातार किया जा रहा है। निगम की टीमें झील की सतह पर तैरने वाले कचरे, प्लास्टिक, जलकुंभी और अन्य अपशिष्टों को हटाने का काम कर रही हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि केवल सफाई अभियान से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जब तक गंदे पानी की आवक पूरी तरह बंद नहीं होगी, तब तक झील को प्रदूषणमुक्त बनाए रखना कठिन रहेगा। इसी कारण सीवरेज डायवर्जन परियोजना को प्राथमिकता दी गई है।
13 एमएलडी एसटीपी पहले से संचालित
समीक्षा बैठक के दौरान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने वर्तमान में संचालित 13 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि यह प्लांट नियमित रूप से कार्य कर रहा है और शहर के सीवरेज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इसके साथ ही झील के निकट तैयार किए गए 7 एमएलडी क्षमता वाले नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस प्लांट की सभी आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और आगामी कुछ दिनों में इसे संचालन के लिए शुरू कर दिया जाएगा।
जल्द शुरू होगा 7 एमएलडी का नया प्लांट
बैठक में विधानसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए 7 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को जल्द से जल्द चालू किया जाए ताकि शहर की सीवरेज व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि प्लांट को जल्द ही पूरी क्षमता के साथ चालू कर दिया जाएगा।
इस नए प्लांट के शुरू होने के बाद अधिक मात्रा में सीवरेज का उपचार संभव होगा। इससे झील में साफ पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और प्रदूषित पानी की मात्रा कम होगी। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीवरेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ती है तो इससे झील के जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
आनासागर झील का पर्यावरणीय और पर्यटन महत्व
आनासागर झील केवल एक जलाशय नहीं बल्कि अजमेर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 12वीं शताब्दी में निर्मित यह झील स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। झील के किनारे स्थित दौलत बाग, बारादरी और शाम के समय दिखाई देने वाला प्राकृतिक दृश्य हर वर्ष हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है।
पिछले कई वर्षों से झील में सीवरेज और नालों का पानी मिलने के कारण इसकी जल गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इससे जलीय जीवन, पर्यावरण और पर्यटन गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। ऐसे में 22.27 करोड़ रुपये की यह परियोजना झील संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विवेकानंद पार्क के आध्यात्मिक केंद्र की भी समीक्षा
बैठक में विवेकानंद पार्क में प्रस्तावित आध्यात्मिक केंद्र की प्रगति की भी समीक्षा की गई। विधानसभा अध्यक्ष ने अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना शहर के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होगी और इसे निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाना चाहिए।
हाइट गेज की तकनीकी समीक्षा के निर्देश
सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान शहर में लगाए गए हाइट गेज की ऊंचाई और उसकी उपयोगिता की भी समीक्षा की गई। विधानसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसकी तकनीकी जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएं ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने न आए।
वरुण सागर पर बनेगा भगवान वरुण देव का स्टैंड
बैठक में वरुण सागर की पाल पर स्थापित होने वाली भगवान वरुण देव की प्रतिमा को लेकर भी चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों से प्रतिमा के लिए बनाए जाने वाले स्टैंड की मजबूती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के अनुरूप होना चाहिए ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित बना रहे।
बजट घोषणाओं की प्रगति की भी हुई समीक्षा
समीक्षा बैठक में राज्य बजट के तहत घोषित विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा की गई। संबंधित विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी परियोजनाओं की स्थिति से अवगत कराया। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों में गुणवत्ता के साथ समयबद्धता सुनिश्चित की जाए ताकि आम जनता को योजनाओं का लाभ जल्द मिल सके।
शहर को मिलेगा दीर्घकालिक लाभ
आनासागर झील के लिए तैयार की गई 22.27 करोड़ रुपये की परियोजना को अजमेर के पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि परियोजना समय पर पूरी होती है तो झील में गंदे पानी की आवक लगभग समाप्त हो जाएगी। साथ ही नए और पुराने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के बेहतर संचालन से शहर की सीवरेज व्यवस्था भी मजबूत होगी।
प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद आनासागर झील पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ और सुरक्षित होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण, जलीय पारिस्थितिकी, पर्यटन और स्थानीय नागरिकों को बेहतर वातावरण का लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यह योजना अजमेर की सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय परियोजनाओं में शामिल हो सकती है।
GOLDEN HIND DESK