जयपुर: राजस्थान में सरकारी भर्तियों, विशेषकर पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद सियासी बहस तेज हो गई है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने राजस्थान में पेपर लीक जैसी पुरानी और गंभीर समस्या को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अमित शाह ने इसे राज्य सरकार की “बड़ी उपलब्धि” करार दिया, वहीं कांग्रेस ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा पर तथ्य तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है।
अमित शाह का दावा: पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती
जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने राजस्थान पुलिस के नवनियुक्त कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि पहले राजस्थान में लगभग हर बड़ी भर्ती परीक्षा के साथ पेपर लीक, दलाली और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती थीं, जिससे युवाओं का भरोसा टूट रहा था।
अमित शाह के अनुसार, अब भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, निगरानी-आधारित और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगी है। उन्होंने कहा, “राज्य का युवा तभी आगे बढ़ेगा, जब उसे यह भरोसा होगा कि नौकरी उसे उसकी योग्यता के आधार पर मिलेगी, न कि सिफारिश या पैसे के दम पर।”
BJP सांसदों ने भी गिनाईं उपलब्धियां
अमित शाह के बयान के बाद राजस्थान के कई BJP सांसदों और नेताओं ने भी सरकार के भर्ती सुधारों का समर्थन किया। उनका कहना है कि भाजपा सरकार ने पुलिस बल को मजबूत करने, तकनीकी संसाधन बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने जैसे कदम उठाए हैं।
BJP नेताओं ने दावा किया कि इन सुधारों का असर कानून-व्यवस्था पर भी पड़ा है, जिससे अपराध दर में कमी आई है। पार्टी का कहना है कि मजबूत और ईमानदार पुलिस व्यवस्था ही राज्य में सुरक्षा और विकास की नींव रख सकती है।
कांग्रेस का पलटवार: “जमीनी हकीकत अलग”
अमित शाह और भाजपा नेताओं के इन दावों पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार केवल भाषणों और आंकड़ों के जरिए उपलब्धियां गिना रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है।
कांग्रेस का आरोप है कि आज भी कई भर्तियों को लेकर विवाद, अदालतों में लंबित मामले और युवाओं का असंतोष मौजूद है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर पेपर लीक पूरी तरह खत्म हो चुका है, तो सरकार को यह भी बताना चाहिए कि पिछले मामलों में दोषियों पर क्या ठोस कार्रवाई हुई और पीड़ित अभ्यर्थियों को क्या न्याय मिला।
भर्ती मुद्दा क्यों है इतना संवेदनशील?
राजस्थान में सरकारी नौकरी युवाओं के लिए सबसे बड़ा सपना मानी जाती है। बीते एक दशक में पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित किया है। कई परीक्षाएं रद्द हुईं, कुछ मामलों में अदालतों तक जाना पड़ा और वर्षों तक चयन प्रक्रिया लटकी रही।
इसी वजह से भर्ती सुधार का मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा भी बन चुका है। भाजपा इसे अपनी सुशासन नीति का उदाहरण बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार की राजनीतिक मार्केटिंग करार दे रही है।
आगे की राजनीति और असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भर्ती सुधारों का मुद्दा आने वाले समय में युवा वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है। भाजपा जहां इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर भुनाने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस युवाओं के बीच असंतोष को उठाकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है।
स्पष्ट है कि राजस्थान में भर्ती सुधारों को लेकर यह सियासी बहस अभी थमने वाली नहीं है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़कों तक गूंज सकता है।