सत्र शुरू होने के बाद छप रही किताबें

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कक्षा छह तक के विद्यार्थियों को अभी तक पाठ्य पुस्तकें नहीं मिली

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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में प्रवेशिका से कक्षा छह तक के विद्यार्थियों को अभी तक पाठ्य पुस्तकें नहीं मिली है। ऐसे में शिक्षक शाला दर्पण पोर्टल पर अपलोड पुस्तकों का प्रिंट निकाल कर बच्चों को पढ़ा रहे है। अभी तक पाठ्य पुस्तकें स्कूलों में बच्चों के हाथों तक नहीं पहुंचने का कारण इस बार पहली से कक्षा 6 तक सभी पुस्तकें बदल कर नई लागू करना बताया जा रहा है। नियमानुसार अप्रैल में नया शैक्षिक सत्र शुरू होते ही सभी बच्चों को किताबें मिल जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के महानगर अध्यक्ष राकेश कौशिक ने बताया कि कक्षा छह की हिंदी की किताब अभी तक नहीं आई। हिंदी के लिए पुरानी किताबों का सहारा लेना पड़ा रहा है। वहीं, कंपोजिट विद्यालय कांशीराम नगर में कक्षा आठ की किताबें बच्चों को नहीं मिली हैं। 

डेढ़ करोड़ पुस्तकों की दरकार

राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल को प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क वितरण के लिए डेढ़ करोड़ पुस्तकों की आवश्यकता है। वहीं निजी स्कूलों में विद्यार्थी पाठ्य पुस्तकों के लिए परेशान है। राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल सरकारी स्कूलों में पुस्तकों की आपूर्ति के साथ बाजार में भी पुस्तकें उपलब्ध करवाता है। ऐसे में बाजार में पुस्तक विक्रेताओं के पास भी पर्याप्त संख्या में पुस्तकें बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हो रही है।

जिले में 1400 से अधिक परिषदीय विद्यालय हैं

जिले में 1400 से अधिक परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें करीब 1.30 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। एक जुलाई से स्कूल में छात्र पहुंचने लगे हैं लेकिन उच्च प्राथमिक विद्यालय कटार शहीद, कंपोजिट विद्यालय कांशीराम नगर समेत कई विद्यालयों में कक्षा छह और कक्षा आठ की कुछ किताबें नहीं पहुंची हैं। इसके कारण बच्चों को पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है। शिक्षकों ने बताया कि जो किताबें स्कूल में नहीं आई हैं, उसके लिए बीईओ को सूचित कर दिया है।