
पर्यावरण संरक्षण केवल कानून और नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विज्ञान, तकनीक, प्रशासन, उद्योग और जनभागीदारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी व्यापक दृष्टिकोण को समझने के उद्देश्य से भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल के प्रबंधन स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने बुधवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का शैक्षणिक भ्रमण किया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की कार्यप्रणाली, पर्यावरणीय नियमों, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनी, वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के सदस्य सचिव कपिल चन्द्रवाल ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी परिणामों के लिए कानून, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीक आधारित निगरानी और सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बदलती तकनीक और नियामकीय व्यवस्थाओं के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान मुख्य पर्यावरण अभियंता विष्णु दत्त पुरोहित ने विद्यार्थियों को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की कार्यप्रणाली और विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने मण्डल की नियामकीय भूमिका, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय निगरानी तथा उद्योगों में पर्यावरणीय अनुपालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा की।
विद्यार्थियों को बताया गया कि पर्यावरणीय नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगरानी तथा अनुपालन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने विद्यार्थियों को जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के गठन की पृष्ठभूमि, प्रमुख उद्देश्यों और पर्यावरण संरक्षण में इनके महत्व को समझाया।
विद्यार्थियों को पर्यावरणीय कानूनों के विकास और समय के साथ पर्यावरण संरक्षण की बदलती जरूरतों के बारे में भी जानकारी दी गई।
वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता विजय शर्मा ने विद्यार्थियों को पर्यावरणीय कानूनों से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन, उद्योगों की कानूनी जिम्मेदारियों और प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की नियामकीय भूमिका के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने पर्यावरणीय प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने अधिकारियों के साथ विभिन्न विषयों पर संवाद किया। इसमें पर्यावरणीय कानून, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, निगरानी व्यवस्था, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय अनुपालन और वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे विषय शामिल रहे।
विद्यार्थियों ने मण्डल की कार्यप्रणाली और पर्यावरणीय विनियमन से जुड़े कई सवाल अधिकारियों के सामने रखे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का विस्तार से जवाब दिया और व्यावहारिक स्तर पर पर्यावरणीय नियमों के क्रियान्वयन की जानकारी साझा की।
यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण प्रबंधन से जुड़े पुस्तकीय ज्ञान को व्यावहारिक व्यवस्था से जोड़ने का अवसर बना। विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासन, विज्ञान, तकनीक, उद्योग और समाज की संयुक्त भूमिका आवश्यक है।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरणीय नियमन की वास्तविक कार्यप्रणाली, प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्थाओं और उद्योगों में पर्यावरणीय अनुपालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को करीब से समझा।
कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में कानून, विज्ञान, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया गया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीक आधारित निगरानी और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता से भी अवगत कराया।