
राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने रोकथाम और नियंत्रण के प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले की अध्यक्षता में पशुधन भवन में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में लंपी रोग की वर्तमान स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे, टीकाकरण और बीमार पशुओं के उपचार की व्यवस्था की समीक्षा की गई।
प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों को लंपी रोग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सभी जरूरी कदम प्रभावी और समयबद्ध तरीके से उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।
बैठक में पशुपालन निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 10 जिले लंपी रोग से प्रभावित हैं। इनमें अधिकतर जिले पूर्वी राजस्थान के हैं। उन्होंने बताया कि सक्रिय संक्रमित गौवंश की संख्या में लगातार कमी आ रही है। हालांकि, अब तक लंपी रोग के कारण 16 पशुओं की मौत हुई है।
अधिकारियों को प्रभावित जिलों के साथ-साथ उन जिलों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, जहां अभी तक लंपी रोग के मामले सामने नहीं आए हैं। इसका उद्देश्य बीमारी को नए क्षेत्रों में फैलने से रोकना है।
प्रमुख शासन सचिव विकास भाले ने पशु चिकित्सा अधिकारियों को घर-घर जाकर बीमार पशुओं का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीमारी की पहचान शुरुआती स्तर पर होने से उपचार और नियंत्रण के प्रयास ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं।
उन्होंने जिला स्तर पर लगातार निगरानी रखने और विभागीय अधिकारियों को अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में पशुपालकों के बीच जागरूकता बढ़ाने को महत्वपूर्ण कदम बताया गया। अधिकारियों को विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार सामग्री का उपयोग कर पशुपालकों को लंपी रोग के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए गए।
सरकार का जोर इस बात पर है कि पशुपालक बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सा सेवाओं से संपर्क करें और बीमार पशुओं की जानकारी विभाग तक पहुंचाएं।
लंपी रोग को फैलने से रोकने के लिए पशुओं के आवागमन को नियंत्रित किया गया है। पशुपालन विभाग के अनुसार पशु मेले और पशु हाट पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही जिला और राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं।
बीमारी से संबंधित किसी भी स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का गठन भी किया गया है। ये टीमें प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कार्रवाई और नियंत्रण गतिविधियों में सहयोग करेंगी।
बैठक में प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे सर्वेक्षण, टीकाकरण और उपचार व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पशु चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से पशुपालकों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
साथ ही बीमारी से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और संक्रमण की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया।
प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों से कहा कि जिन जिलों में अभी तक लंपी रोग का कोई मामला सामने नहीं आया है, वहां भी पर्याप्त सावधानी बरती जाए। उन्होंने ऐसे जिलों में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और बीमारी के संभावित प्रसार को रोकने के लिए पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए।
सरकार का फोकस फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण को नियंत्रित करने के साथ-साथ इसे दूसरे जिलों में फैलने से रोकने पर है।
विभाग की ओर से राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का गठन किया गया है, ताकि लंपी रोग से संबंधित सूचना मिलने पर समय पर कार्रवाई की जा सके।
बैठक में अधिकारियों ने विभाग की ओर से अब तक किए गए नियंत्रणात्मक उपायों की जानकारी भी दी। पशुओं के आवागमन पर नियंत्रण, पशु मेलों और हाट पर रोक, सर्वेक्षण, उपचार, निगरानी और जागरूकता अभियान जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि लंपी रोग की रोकथाम के लिए सतर्कता, लगातार निगरानी और समय पर उपचार सबसे महत्वपूर्ण है। पशुपालकों से भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सा विभाग को सूचना देने और आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।