बच्चों ने किया स्कूल का एनर्जी ऑडिट, सीखे बिजली बचाने के उपाय विद्यार्थियों ने सीखा बिजली बिल कम करने का तरीका, अब घर और स्कूल में करेंगे ऊर्जा की बचत
Thursday, 13 Aug 2026 00:00 am

Golden Hind News

विद्यार्थियों ने सीखा बिजली बिल कम करने का तरीका, अब घर और स्कूल में करेंगे ऊर्जा की बचत

 ऊर्जा संरक्षण और विद्युत दक्षता को विद्यार्थियों की दैनिक आदतों का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (अजमेर डिस्कॉम) की ओर से अजमेर शहर के मदार स्थित आदर्श विद्या निकेतन में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बिजली बचाने, विद्युत उपकरणों का सही तरीके से उपयोग करने, बिजली की खपत को समझने और विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को बिजली बचत के बारे में जानकारी देना नहीं था, बल्कि उन्हें ऐसा व्यवहारिक प्रशिक्षण देना था, जिससे वे स्वयं ऊर्जा बचत के दूत बन सकें और अपने परिवार तथा विद्यालय के दूसरे विद्यार्थियों को भी बिजली की खपत कम करने के लिए प्रेरित कर सकें। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्वयं विद्यालय के अलग-अलग कमरों का एनर्जी ऑडिट किया और यह समझने का प्रयास किया कि किन स्थानों पर अनावश्यक बिजली की खपत हो रही है।

विद्यार्थियों ने संभाली ‘मास्टर ट्रेनर’ और ‘एनर्जी ऑडिटर’ की भूमिका

अजमेर डिस्कॉम की ओर से आयोजित इस गतिविधि में विद्यार्थियों को केवल दर्शक बनाकर नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें पूरी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल किया गया। कार्यक्रम के दौरान 15 विद्यार्थियों की तीन अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। प्रत्येक टीम को एनर्जी ऑडिट शीट दी गई, जिसके आधार पर विद्यार्थियों ने विद्यालय के विभिन्न कक्षों और स्थानों का निरीक्षण किया।

विद्यार्थियों ने कक्षों में लगे पंखों, लाइटों और अन्य विद्युत उपकरणों की स्थिति की जांच की। इसके साथ ही उन्होंने यह भी देखा कि किसी कमरे में प्राकृतिक रोशनी का पर्याप्त उपयोग हो रहा है या नहीं और कहीं आवश्यकता नहीं होने के बावजूद बिजली के उपकरण तो नहीं चल रहे हैं।

विद्यार्थियों ने ग्रीन पेन से एनर्जी ऑडिट शीट पर उन बिंदुओं को दर्ज किया, जहां बिजली की खपत को थोड़े से प्रयास से कम किया जा सकता था। इस दौरान बच्चों ने अपनी समझ के आधार पर बिजली बचाने के सुझाव भी दिए।

अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि ऊर्जा ऑडिट का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की कमियां निकालना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि बिजली कहां, कितनी और किस तरीके से खर्च हो रही है तथा अनावश्यक खपत को किस तरह कम किया जा सकता है।

एनर्जी ऑडिट में शामिल विद्यार्थियों को आगे विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को भी ऊर्जा बचत के उपायों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह ये विद्यार्थी विद्यालय में ‘मास्टर ट्रेनर’ की भूमिका निभाएंगे और ऊर्जा संरक्षण का संदेश अन्य बच्चों तक पहुंचाएंगे।

‘गैस द बिल’ गतिविधि ने समझाया बिजली बिल का गणित

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और रोचक हिस्सा ‘गैस द बिल’ गतिविधि रही। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को बिजली के बिल की गणना और विद्युत उपकरणों की खपत को बेहद सरल तरीके से समझाया गया।

ऊर्जा प्रबंधक पी.सी. तिवारी ने विद्यार्थियों से विद्यालय के बिजली बिल के संबंध में सवाल किए और उनसे अनुमान लगाने को कहा कि स्कूल में हर महीने बिजली का बिल कितना आता है। विद्यार्थियों को बताया गया कि विद्यालय का बिजली बिल लगभग 7 हजार से 10 हजार रुपये तक हो सकता है।

इसके बाद विद्यार्थियों को समझाया गया कि बिजली का बिल केवल उपकरणों की संख्या पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उपकरण कितने समय तक चलते हैं और उनकी विद्युत खपत कितनी है, इसका भी बिल पर सीधा असर पड़ता है।

पंखे, लाइट, कूलर, एसी और दूसरे विद्युत उपकरणों के उपयोग के घंटे और उनकी क्षमता के आधार पर बिजली की खपत बढ़ती या घटती है। यदि जरूरत नहीं होने पर पंखे और लाइट बंद रखे जाएं, एसी का उपयोग निर्धारित तापमान पर किया जाए और प्राकृतिक रोशनी का अधिक इस्तेमाल किया जाए, तो बिजली की अनावश्यक खपत को कम किया जा सकता है।

इस गतिविधि से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिली कि बिजली बचाना केवल बिजली के उपकरण बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपकरणों का स्मार्ट और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना भी ऊर्जा संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

घर में भी बिजली बचत का संदेश पहुंचाएंगे बच्चे

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को इस बात के लिए भी प्रेरित किया गया कि वे विद्यालय में सीखी जानकारी को अपने घर तक पहुंचाएं। बच्चे अपने परिवार के सदस्यों को बता सकते हैं कि खाली कमरे में लाइट और पंखे बंद रखने, अनावश्यक रूप से बिजली के उपकरण नहीं चलाने और विद्युत उपकरणों का सही तरीके से इस्तेमाल करने से बिजली की खपत कम की जा सकती है।

बच्चों को यह भी बताया गया कि ऊर्जा बचत का सीधा संबंध परिवार के बिजली बिल से है। यदि घर में रोजाना थोड़ी-थोड़ी बिजली बचाई जाए तो महीने के अंत में इसका असर बिजली के बिल में दिखाई दे सकता है।

इस तरह विद्यार्थी अपने घरों में भी ऊर्जा संरक्षण के छोटे-छोटे बदलाव लागू कर सकते हैं। बच्चों के माध्यम से ऊर्जा बचत का संदेश परिवार से समाज तक पहुंचाने की कोशिश की गई।

विद्युत सुरक्षा को लेकर भी किया जागरूक

कार्यक्रम में बिजली बचत के साथ-साथ विद्युत सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई। अधिशासी अभियंता मोहन सिंह ने विद्यार्थियों को बिजली से जुड़े संभावित खतरों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि गीले हाथों से किसी भी विद्युत उपकरण को नहीं छूना चाहिए। क्षतिग्रस्त तारों, खुले विद्युत कनेक्शन और खराब विद्युत उपकरणों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। बच्चों को बिजली की लाइनों, ट्रांसफार्मर और अन्य विद्युत प्रतिष्ठानों के आसपास सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए भी जागरूक किया गया।

विद्यार्थियों को समझाया गया कि बिजली से जुड़ी किसी भी समस्या को स्वयं ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। खराब वायरिंग, टूटे तार या खुले कनेक्शन दिखाई देने पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति या विशेषज्ञ को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

कनिष्ठ अभियंता पारुल शाक्य ने भी विद्यार्थियों को ऊर्जा बचत और सुरक्षित विद्युत उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

शॉर्ट सर्किट और ओवरलोडिंग से बचाव जरूरी

जनसंपर्क अधिकारी सतीश सोनी ने कहा कि विद्युत सुरक्षा के मामले में दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि दुर्घटना की संभावना को पहले ही समाप्त किया जाए।

उन्होंने कहा कि शॉर्ट सर्किट, ओवरलोडिंग, खराब वायरिंग और असुरक्षित विद्युत उपकरण विद्युत दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए समय-समय पर विद्युत व्यवस्था की जांच करना और खराब उपकरणों को समय रहते ठीक कराना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आपदा प्रबंधन में रोकथाम, पूर्व तैयारी और जन-जागरूकता पर दिए जा रहे संदेश को विद्युत सुरक्षा के क्षेत्र में भी प्रभावी रूप से अपनाने की आवश्यकता है। किसी दुर्घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से सावधानी बरतना अधिक प्रभावी उपाय है।

उन्होंने कहा कि बिजली से जुड़ी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। घर, स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित विद्युत व्यवहार अपनाकर दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विद्यार्थियों के लिए बना व्यवहारिक प्रशिक्षण

अजमेर डिस्कॉम का यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसमें विद्यार्थियों को केवल किताबों या भाषण के माध्यम से जानकारी नहीं दी गई, बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में ऊर्जा की खपत को समझने का अवसर मिला।

एनर्जी ऑडिट के माध्यम से बच्चों ने स्वयं देखा कि किसी कमरे में कितने विद्युत उपकरण हैं, उनका उपयोग किस तरह हो रहा है और किन जगहों पर अनावश्यक बिजली खर्च हो सकती है। वहीं ‘गैस द बिल’ गतिविधि ने उन्हें बिजली के बिल और विद्युत खपत के बीच संबंध समझाया।

इस तरह कार्यक्रम में विद्यार्थियों को ऊर्जा बचत, ऊर्जा दक्षता और विद्युत सुरक्षा तीनों पहलुओं की जानकारी एक साथ मिली।

विद्यालय प्रबंधन ने की पहल की सराहना

आदर्श विद्या निकेतन, मदार के विद्यालय प्रबंधन ने अजमेर डिस्कॉम की इस अभिनव जागरूकता गतिविधि की सराहना की। प्रबंधन ने कहा कि विद्यार्थियों को ऊर्जा संरक्षण की जानकारी व्यवहारिक रूप से देना बेहद उपयोगी है।

विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और एनर्जी ऑडिट के दौरान सामने आए बिंदुओं को समझने में रुचि दिखाई। कार्यक्रम के बाद विद्यार्थियों में यह समझ विकसित हुई कि बिजली बचाना केवल बिजली का बिल कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ विषय है।

ऊर्जा बचत को आदत बनाने पर जोर

अजमेर डिस्कॉम की इस पहल का मुख्य संदेश यही रहा कि बिजली बचाने के लिए बड़े बदलावों का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके भी बिजली की खपत कम की जा सकती है।

जरूरत नहीं होने पर लाइट और पंखे बंद करना, प्राकृतिक रोशनी का उपयोग करना, विद्युत उपकरणों को अनावश्यक रूप से चालू नहीं रखना, खराब वायरिंग और उपकरणों की समय पर जांच कराना तथा बिजली का सुरक्षित उपयोग करना ऊर्जा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थियों को अब विद्यालय के अन्य बच्चों और अपने परिवार के सदस्यों तक यह संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया है। इस तरह एक स्कूल से शुरू हुई जागरूकता गतिविधि घरों और समाज तक ऊर्जा बचत का संदेश पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

अजमेर डिस्कॉम की इस पहल से विद्यार्थियों ने न केवल बिजली के बिल का गणित समझा, बल्कि यह भी जाना कि ऊर्जा की हर यूनिट की बचत महत्वपूर्ण है। बच्चों के इस प्रयास से आने वाले समय में विद्यालय और घर दोनों जगह बिजली की अनावश्यक खपत कम करने की दिशा में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।