
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण से संबंधित वर्ष 2026 का प्रतिवेदन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दिया। आयोग के अध्यक्ष मदनलाल भाटी एवं सदस्यों ने बुधवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव समय पर कराने का जो वादा किया था, उसे पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है। आयोग की रिपोर्ट स्थानीय निकायों में आरक्षण व्यवस्था के संबंध में आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए तथ्यात्मक और संतुलित रिपोर्ट अहम भूमिका निभाती है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत गांवों और शहरों के स्थानीय निकायों में निहित है। राज्य सरकार का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और मजबूत बनाना है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनाव समय पर कराने से विकास कार्यों में गति बनी रहती है और जनता को अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से बेहतर प्रशासनिक सेवाएं मिलती हैं।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो इससे समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी।
उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। एक साथ चुनाव होने से विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को बिना बाधा निरंतर गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है ताकि विकास परियोजनाओं पर लगातार काम जारी रहे। उन्होंने कहा कि संसाधनों का बेहतर उपयोग और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए चुनावी प्रक्रिया में सुधार आवश्यक है।
उन्होंने विश्वास जताया कि बेहतर चुनावी प्रबंधन से प्रदेश में विकास कार्यों की गति और तेज होगी तथा जनता को योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर, विधि एवं न्याय मंत्री जोगाराम पटेल, नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री झाबर सिंह खर्रा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, ओबीसी आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन तथा आयोग के सदस्य प्रो. राजीव सक्सैना, गोपाल कृष्ण, मोहन मोरवाल और पवन मावंडिया सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में आयोग द्वारा तैयार प्रतिवेदन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से संकेत दिया गया कि स्थानीय निकायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
राजस्थान सरकार का कहना है कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को सशक्त बनाना, लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाना और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से विकास कार्यों को गति देना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।