
सावन के पहले सोमवार पर अजमेर को आयुर्वेद के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिली। लंबे समय से प्रदेश की प्रमुख आयुर्वेद रसायनशालाओं में शामिल अजमेर आयुर्वेद रसायनशाला अब पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस होकर राजस्थान की केंद्रीय औषधि उत्पादन इकाइयों में शामिल हो गई है। यहां तैयार होने वाली आयुर्वेदिक दवाएं अब पूरे प्रदेश के आयुर्वेद चिकित्सालयों और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाई जाएंगी।
राज्य सरकार की 'राइजिंग राजस्थान' नीति के तहत आयुष विभाग और दीनदयाल आयुर्वेद के सहयोग से इस रसायनशाला का पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधुनिकीकरण किया गया है। अत्याधुनिक मशीनों और स्वचालित उत्पादन प्रणाली से सुसज्जित यह इकाई अब राजस्थान की उन पांच आयुर्वेद रसायनशालाओं में शामिल हो गई है, जिन्हें आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
सोमवार को आयोजित समारोह में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव एवं पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा, आयुष विभाग के शासन सचिव सुबीर कुमार, आयुर्वेद निदेशक आनंद शर्मा, एमडीएस विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश अग्रवाल, संयुक्त निदेशक ज्योति ककवानी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, चिकित्सक और आयुष विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी प्राचीन ज्ञान परंपरा है। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को आयुर्वेद, योग, विज्ञान, गणित, दर्शन और खगोल विज्ञान जैसी अमूल्य धरोहर दी है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों में कभी दुनिया भर से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे और आज भारत फिर उसी गौरवशाली परंपरा को पुनर्स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय ज्ञान परंपरा और आयुष पद्धति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। राज्य सरकार भी आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य कर रही है।
देवनानी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना से केवल एक रसायनशाला का आधुनिकीकरण नहीं हुआ है, बल्कि यह परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आयुर्वेद ने लोगों का विश्वास और मजबूत किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद, योग और आयुष को वैश्विक पहचान मिली है और "लोकल टू ग्लोबल" की अवधारणा को नई गति मिली है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत अजमेर सहित प्रदेश की पांच आयुर्वेद रसायनशालाओं का ऑटोमेशन किया जा रहा है। इससे दवाओं के उत्पादन की गुणवत्ता, क्षमता और वितरण व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में राजस्थान आयुर्वेद के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव एवं पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में राजस्थान को आयुष क्षेत्र के विकास के लिए 440 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देशभर में लगभग तीन करोड़ मरीज आयुर्वेद चिकित्सा से लाभान्वित हो रहे हैं, जो इस चिकित्सा पद्धति के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से 70 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। उनके अनुसार पिछले वर्षों में देश में आयुर्वेद क्षेत्र में लगभग 800 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैश्विक स्तर पर इसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
आयुष विभाग के शासन सचिव सुबीर कुमार ने कहा कि राजस्थान सरकार आयुर्वेद को आधुनिक स्वरूप देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। पीपीपी मॉडल के माध्यम से दवा निर्माण प्रक्रिया को तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाएगा, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादन क्षमता और वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी होगी।
उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक मशीनों के उपयोग से दवा निर्माण में समय की बचत होगी, गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और प्रदेश के आयुर्वेद अस्पतालों तक समय पर दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
अजमेर रसायनशाला के आधुनिकीकरण के बाद यहां निर्मित आयुर्वेदिक औषधियां राजस्थान के विभिन्न जिलों में संचालित आयुर्वेद चिकित्सालयों, औषधालयों और स्वास्थ्य केंद्रों तक भेजी जाएंगी। इससे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक दवाएं समय पर उपलब्ध होंगी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वचालित उत्पादन प्रणाली लागू होने से दवाओं की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाए रखने में मदद मिलेगी तथा भविष्य में उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
समारोह में आयुर्वेद निदेशक आनंद शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना प्रदेश में आयुर्वेद के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम में आयुष विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय से न केवल आयुर्वेद को नई पहचान मिलेगी, बल्कि राजस्थान आयुष क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत भूमिका भी स्थापित करेगा। अजमेर की यह आधुनिक रसायनशाला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।