
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत सप्लाई किए गए दुग्ध पाउडर को कथित रूप से अवैध तरीके से विद्यालय परिसर से बाहर ले जाने के मामले में राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की जानकारी मिलते ही आरसीडीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जयपुर जिले के सामोद थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप दर्ज कराई गई इस एफआईआर के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
आरसीडीएफ ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के पोषण से जुड़ी किसी भी सरकारी योजना में अनियमितता, गड़बड़ी या संसाधनों के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग ने यह भी कहा है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह मामला पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में मिड-डे मील व्यवस्था के लिए उपलब्ध कराए गए दुग्ध पाउडर से जुड़ा है। योजना का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है ताकि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हो और उन्हें संतुलित आहार मिल सके।
आरसीडीएफ के संज्ञान में यह बात आई कि योजना के तहत निर्धारित उपयोग के लिए भेजा गया दुग्ध पाउडर कथित रूप से विद्यालय परिसर से बाहर ले जाया गया। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए विभाग ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया।
आरसीडीएफ अधिकारियों के अनुसार मामले की जानकारी मिलते ही उपलब्ध तथ्यों का प्रारंभिक परीक्षण किया गया। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत होने पर बिना किसी विलंब के सामोद थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
विभाग का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी भी स्तर पर सरकारी सामग्री का दुरुपयोग या अनधिकृत निकासी होती है तो उसके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है और संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
राजस्थान सरकार ने सार्वजनिक योजनाओं में भ्रष्टाचार, अनियमितता और संसाधनों के दुरुपयोग के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई हुई है। आरसीडीएफ ने इसी नीति के अनुरूप इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभाग का मानना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों तक सुविधाएं और संसाधन पहुंचाना है। यदि इन योजनाओं में किसी प्रकार का दुरुपयोग होता है तो उसका सीधा असर लाभार्थियों पर पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई करना आवश्यक है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि दुग्ध पाउडर को विद्यालय परिसर से किस परिस्थिति में बाहर ले जाया गया, इसमें किन व्यक्तियों की भूमिका रही और क्या यह किसी संगठित अनियमितता का हिस्सा था।
पुलिस संबंधित दस्तावेजों, वितरण प्रक्रिया, रिकॉर्ड तथा उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित कर्मचारियों, अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन और अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जाएगी।
जांच के आधार पर यह भी तय किया जाएगा कि किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही हुई या जानबूझकर सरकारी सामग्री का दुरुपयोग किया गया।
आरसीडीएफ ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा कि कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि तथ्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
आरसीडीएफ ने कहा कि विद्यालयों में संचालित पोषण योजनाएं लाखों विद्यार्थियों के स्वास्थ्य से जुड़ी हैं। इसलिए इन योजनाओं की निगरानी लगातार की जाती है ताकि सामग्री की गुणवत्ता, वितरण और उपयोग में पारदर्शिता बनी रहे।
विभाग का कहना है कि दूध और दुग्ध उत्पाद बच्चों के पोषण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में उनके वितरण और उपयोग की पूरी प्रक्रिया पर विशेष निगरानी रखी जाती है। यदि कहीं भी अनियमितता की सूचना मिलती है तो उसका तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाती है।
इस कार्रवाई को सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आरसीडीएफ का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में उपयोग होने वाली सामग्री का दुरुपयोग न केवल प्रशासनिक अनियमितता है बल्कि इससे उन बच्चों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं जिनके लिए यह योजनाएं संचालित की जाती हैं।
इसी कारण विभाग ने इस मामले में त्वरित कानूनी कार्रवाई करते हुए पुलिस जांच का रास्ता अपनाया है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी यदि इस प्रकार की कोई शिकायत सामने आती है तो उसी गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी।
आरसीडीएफ ने दोहराया कि विभाग का उद्देश्य केवल अनियमितताओं पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है। इसके लिए वितरण प्रणाली की निगरानी, रिकॉर्ड का सत्यापन और आवश्यक प्रशासनिक सुधारों पर भी लगातार काम किया जा रहा है।
विभाग ने कहा कि सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ बिना किसी बाधा के पहुंच सके।
फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरसीडीएफ ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाएगी तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के पोषण से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी और पारदर्शी बनाए रखने के लिए राज्य सरकार और आरसीडीएफ दोनों ही स्तरों पर निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हैं और उनसे जुड़ी किसी भी योजना में अनियमितता के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति आगे भी पूरी सख्ती से लागू रहेगी।