
बैठक में पैदल यात्रियों की सुरक्षा, फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाने, एरिया ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान (ATMP), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ट्रैफिक मॉनिटरिंग, ई-रिक्शा प्रबंधन और फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग विकसित करने सहित कई अहम प्रस्तावों पर सहमति बनी। अधिकारियों का मानना है कि इन निर्णयों के लागू होने से जयपुर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
बैठक में सबसे अधिक जोर पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर दिया गया। निर्णय लिया गया कि शहर के फुटपाथ केवल पैदल चलने वालों के लिए ही उपलब्ध रहेंगे।
इसके लिए जेडीए की प्रवर्तन शाखा विशेष अभियान चलाकर फुटपाथों और सड़कों से अतिक्रमण हटाएगी। फुटपाथों पर अवैध रूप से संचालित डेयरी बूथों को हटाया जाएगा। इसके अलावा आवासीय और व्यावसायिक भवनों द्वारा बनाए गए रैंप, सीढ़ियां और अन्य अवैध निर्माण भी हटाए जाएंगे ताकि पैदल यात्रियों को निर्बाध मार्ग मिल सके।
जयपुर में पहली बार एरिया ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान (ATMP) लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत ट्रैफिक प्रबंधन को केवल चौराहों तक सीमित रखने के बजाय पूरे क्षेत्र (एरिया) के आधार पर विकसित किया जाएगा।
योजना के तहत शहर में निरंतर (Continuous) और सुरक्षित फुटपाथ बनाए जाएंगे। सड़क और पैदल मार्ग के बीच ग्रीन मेश फेंसिंग, लो-लेवल लाइटिंग और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएंगे।
इसके अलावा सड़कों के किनारे हरित पट्टियां, साइकिल ट्रैक, ओपन जिम, बैठने की व्यवस्था, आधुनिक संकेतक और अन्य शहरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बैठक में नेटवर्क मोबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए कई आंतरिक मार्गों पर राउंडअबाउट (Rotary) विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया।
इससे कई आंतरिक सड़कों पर ट्रैफिक सिग्नल की आवश्यकता कम होगी और वाहन बिना अनावश्यक रुकावट के गुजर सकेंगे। इससे ट्रैफिक जाम, प्रतीक्षा समय और ईंधन की खपत में कमी आने की उम्मीद है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि शहर के प्रमुख मॉल्स, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और होटलों की बेसमेंट पार्किंग में किए गए अवैध कब्जे और व्यावसायिक गतिविधियों को हटाया जाएगा।
बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग के लिए सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही एसएल मार्ग सहित अन्य प्रमुख सड़कों पर रैंप, सीढ़ियां और लोहे की जालियां लगाकर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर में फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जगहों का बेहतर उपयोग करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
इन स्थानों को व्यवस्थित पार्किंग स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही हेरिटेज थीम पर सौंदर्यीकरण, आकर्षक लाइटिंग, प्लांटर्स, कियोस्क और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
शहर में संचालित लगभग 50 हजार ई-रिक्शा के बेहतर संचालन के लिए जयपुर को 7 अलग-अलग जोनों में विभाजित किया जाएगा।
इस व्यवस्था से ई-रिक्शा संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और ट्रैफिक जाम कम करने में मदद मिलेगी।
यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रत्येक ई-रिक्शा में QR कोड आधारित पहचान और SOS अलर्ट सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
यातायात प्रबंधन को तकनीक आधारित बनाने के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
इस प्रणाली के माध्यम से ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों की स्वतः पहचान होगी। इसके अलावा प्रमुख चौराहों पर एलईडी स्क्रीन लगाकर वाहनों के पेंडिंग चालान भी प्रदर्शित किए जाएंगे, जिससे वाहन मालिकों को तत्काल जानकारी मिल सकेगी।
बैठक में यातायात पुलिस के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए पुलिस बूथ बनाने को भी मंजूरी दी गई।
इन बूथों का डिजाइन जयपुर की हेरिटेज थीम के अनुरूप होगा और इनमें पुलिसकर्मियों के लिए अलग वॉशरूम सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
बैठक में राजस्थान आवासन मंडल के आयुक्त अरविंद पोसवाल, जेडीए सचिव गौरव सैनी, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (यातायात) प्रदीप मोहन शर्मा, पुलिस उपमहानिरीक्षक आनंद शर्मा सहित पुलिस, नगर निगम, सार्वजनिक निर्माण विभाग, स्मार्ट सिटी, परिवहन विभाग, एनएचएआई, जेसीटीएसएल, जयपुर डेयरी, रीको और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
अधिकारियों ने सभी स्वीकृत प्रस्तावों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और शहर की यातायात व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया।