मंगला पशु बीमा योजना पर मंत्री सख्त मंगला पशु बीमा योजना की समीक्षा: लक्ष्य पूरे नहीं करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, मंत्री जोराराम कुमावत के सख्त निर्देश
Thursday, 23 Jul 2026 02:30 am

Golden Hind News

मंगला पशु बीमा योजना की समीक्षा: लक्ष्य से पिछड़े अधिकारियों पर सख्ती, 17 सीसी के तहत चार्जशीट के निर्देश

राजस्थान सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पशुपालन, गोपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने बुधवार को शासन सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में योजना की प्रगति का विस्तृत आकलन किया और लक्ष्य से पिछड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को तय समय सीमा में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

लक्ष्य से पिछड़े अधिकारियों को मिलेगा नोटिस

पशुपालन मंत्री ने बीमा के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा नहीं करने वाले जिलों के संयुक्त निदेशकों के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के 17 सीसी के तहत चार्जशीट जारी करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में बीमा कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और अधिकारी व्यक्तिगत रूप से लक्ष्य पूर्ति सुनिश्चित करें। विभागीय समीक्षा में पिछड़ने वाले अधिकारियों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

विशेष बीमा कैंप लगाने के निर्देश

योजना के दायरे में अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने के लिए मंत्री ने राज्यभर में विशेष बीमा शिविर (स्पेशल कैंप) आयोजित करने के निर्देश दिए।

इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को बीमा योजना की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर ही बीमा पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरे किए जा सकें।

पोस्टमार्टम के समय दो अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य

बीमा दावों में पारदर्शिता और विवादों को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

अब किसी बीमित पशु की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम के दौरान संबंधित पशु चिकित्सक और बीमा सर्वेयर दोनों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इससे बीमा दावों की जांच अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय होगी तथा फर्जी दावों पर भी रोक लगेगी।

पशु चिकित्सकों की भूमिका होगी अहम

बैठक में निर्णय लिया गया कि पशु बीमा योजना के संचालन में पशु चिकित्सकों की सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकार का मानना है कि पशु चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी से बीमा प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी और पशुपालकों को समय पर लाभ मिल सकेगा।

गौशालाओं के लिए अलग-अलग रंग के टैग

पशुपालन मंत्री ने गौशालाओं में बीमित पशुओं की पहचान को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक गौशाला के पशुओं के लिए अलग-अलग रंग (कलर कोड) के टैग निर्धारित किए जाएं। इससे बीमित पशुओं की पहचान में आसानी होगी और रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।

इन जिलों में बीमा कार्य तेज करने के निर्देश

मंत्री ने विशेष रूप से जोधपुर संभाग के जिलों में बीमा कार्यों की धीमी प्रगति पर चिंता जताई।

उन्होंने निर्देश दिए कि—

में भेड़, बकरी और ऊंट के बीमा कार्य में तेजी लाई जाए।

इसी प्रकार—

में गाय और भैंस के बीमा कार्यों को गति देकर 42 लाख पशुओं के बीमा लक्ष्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

लंबित क्लेम जल्द निपटाने के निर्देश

बैठक में मंत्री ने विभाग के लंबित बीमा दावों (Pending Claims) और लंबित बीमा पॉलिसियों की भी समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित क्लेम और रुके हुए बीमा कार्यों का शीघ्र निस्तारण किया जाए ताकि पशुपालकों को समय पर बीमा राशि प्राप्त हो सके।

पशुपालकों को समय पर मिले योजनाओं का लाभ

जोराराम कुमावत ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक पात्र पशुपालक तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।

उन्होंने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और पशु बीमा योजना पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अधिकारियों को जवाबदेही तय करने के निर्देश

बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक जिले में लक्ष्य आधारित कार्ययोजना तैयार की जाए और उसकी नियमित समीक्षा की जाए।

मंत्री ने कहा कि योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब विभागीय अधिकारी पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करें।

वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

समीक्षा बैठक में शासन सचिव (पशुपालन) विकास सीताराम भाले, पशुपालन विभाग के निदेशक सुरेश कुमार मीणा, एसआईपीएफ की निदेशक हेमपुष्पा सहित पशुपालन विभाग और संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, लक्ष्य पूर्ति, बीमा प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा पशुपालकों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।