RGHS में गड़बड़ी पर भजनलाल सरकार का एक्शन, 51 अस्पताल निलंबित RGHS में गड़बड़ी पर भजनलाल सरकार सख्त, 51 अस्पताल निलंबित; 24 पर 3 करोड़ जुर्माना
Friday, 17 Jul 2026 02:30 am

Golden Hind News

RGHS में गड़बड़ी पर भजनलाल सरकार का बड़ा एक्शन, तीन माह में 51 अस्पताल निलंबित; 24 अस्पतालों पर 3 करोड़ का जुर्माना

 राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने योजना में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, फर्जी क्लेम और प्रक्रियागत गड़बड़ी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले तीन महीनों में RGHS से जुड़े 51 अस्पतालों को योजना से निलंबित किया गया है। इसके साथ ही ऑडिट के आधार पर पिछले एक माह में 24 संबद्ध अस्पतालों पर करीब 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सरकार का कहना है कि योजना में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या सरकारी धन के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

RGHS में पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य योजनाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का उद्देश्य है कि RGHS के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे और सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीवसर ने कहा कि वित्तीय अनियमितता, फर्जी बिलिंग और गलत क्लेम जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग की ओर से लगातार निगरानी और जांच की जा रही है ताकि योजना को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अस्पतालों पर कार्रवाई

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि RGHS योजना के संचालन में लगातार ऑडिट और जांच प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत कई अस्पतालों में वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।

गत एक माह में 24 अस्पतालों के खिलाफ ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई। संबंधित अस्पतालों को सुनवाई का अवसर दिया गया और उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद जुर्माने का निर्णय लिया गया।

जांच में मिलीं कई गंभीर अनियमितताएं

विभाग के अनुसार जांच और ऑडिट के दौरान कई अस्पतालों में विभिन्न प्रकार की गड़बड़ियां सामने आईं। इनमें दस्तावेजों की डुप्लीकेसी, आवश्यकता से अधिक जांचें करवाना, पैकेज में शामिल सेवाओं को अलग-अलग दिखाकर अतिरिक्त भुगतान प्राप्त करने का प्रयास करना जैसी अनियमितताएं शामिल हैं।

इसके अलावा कुछ मामलों में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए। वहीं कुछ अस्पतालों द्वारा ओपीडी मरीजों को अनुचित तरीके से आईपीडी मरीज दिखाकर क्लेम प्रस्तुत करने के मामले भी सामने आए।

विभाग का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से योजना पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ता है और पात्र मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए जांच के बाद रिकवरी और दंडात्मक कार्रवाई की गई है।

इन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई

सरकार की कार्रवाई के दायरे में कई बड़े अस्पताल भी शामिल हैं। इनमें उदयपुर का पारस जेके हॉस्पिटल, डूंगरपुर का जील हॉस्पिटल, अजमेर का मार्बल सिटी हॉस्पिटल, जयपुर के मणिपाल हॉस्पिटल, सोनी हॉस्पिटल और इंडस हॉस्पिटल सहित कुल 24 अस्पताल शामिल हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और भविष्य में भी यदि किसी अस्पताल या संस्था द्वारा गलत तरीके से क्लेम प्रस्तुत करने, फर्जी बिलिंग करने या नियमों का उल्लंघन करने की जानकारी सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

ऑडिट सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा

राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि RGHS योजना में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि राजकोष की प्रत्येक राशि का उपयोग सही लाभार्थियों के हित में हो। इसके लिए ऑडिट प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। आने वाले समय में फर्जी बिलिंग, अनियमित क्लेम, प्रक्रियागत उल्लंघन और वित्तीय गड़बड़ी पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।

सरकार का सख्त संदेश

RGHS प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में योजना की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि योजना से जुड़े किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभाग की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।