
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में किसानों को समय पर सिंचाई जल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गुरुवार को करौली स्थित पांचना बांध पर जल निकासी तंत्र का व्यापक तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस परीक्षण के दौरान कमांड क्षेत्र की नहरों, गैर-कमांड क्षेत्र की लिफ्ट सिंचाई प्रणाली तथा गंभीरी नदी की ओर जल निकासी के लिए स्थापित गेटों की कार्यक्षमता का परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने सभी व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए सिंचाई जल निकासी की तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार जल संसाधन विभाग ने मानसून के दौरान सिंचाई जल प्रबंधन को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह तकनीकी परीक्षण आयोजित किया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बांध से जल छोड़े जाने के समय किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो और किसानों को निर्बाध रूप से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके।
तकनीकी परीक्षण के दौरान कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ने वाले स्लूस गेटों का सफल ट्रायल किया गया। अधिकारियों ने गेटों के संचालन, जल प्रवाह की क्षमता और नियंत्रण प्रणाली की विस्तृत जांच की। परीक्षण के दौरान सभी गेट निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य करते पाए गए, जिससे सिंचाई जल वितरण व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने संतोष व्यक्त किया।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि परीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि जल निकासी के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने न आए और कमांड क्षेत्र के किसानों तक समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच सके।
गैर-कमांड क्षेत्र के किसानों के लिए तैयार की गई लिफ्ट सिंचाई प्रणाली का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इस प्रणाली के माध्यम से उन क्षेत्रों तक भी सिंचाई जल पहुंचाया जाएगा, जहां गुरुत्वाकर्षण आधारित नहर व्यवस्था संभव नहीं है।
परीक्षण के दौरान लिफ्ट सिस्टम की मशीनरी, पंपिंग व्यवस्था और जल प्रवाह क्षमता का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी तकनीकी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर प्रणाली तत्काल संचालन के लिए तैयार है।
परीक्षण के दौरान बांध के बहाव क्षेत्र में स्थित गंभीरी नदी की ओर जल निकासी के लिए स्थापित गेटों की भी तकनीकी जांच की गई। जल संसाधन विभाग की टीम ने सभी गेटों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और नियंत्रण प्रणाली का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने जल निकासी तंत्र की कार्यक्षमता का परीक्षण करते हुए आवश्यक तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की और भविष्य में सुरक्षित जल प्रबंधन के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए।
संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया ने परीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिंचाई जल निकासी शुरू करने से पहले सभी तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त और सुरक्षित होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसानों को बिना किसी बाधा के समय पर सिंचाई जल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए और यदि किसी प्रकार की तकनीकी कमी सामने आती है तो उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
इस अवसर पर कमांड क्षेत्र एवं पांचना गुडला संघर्ष समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त किया। समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि लगभग 20 वर्षों से चली आ रही सिंचाई जल से जुड़ी समस्या का शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हो सका है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार के सकारात्मक प्रयासों और प्रशासन की सक्रिय भूमिका से किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को गंभीरता से सुना गया और समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने परीक्षण के दौरान सभी गेटों, जल निकासी तंत्र और संबंधित उपकरणों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने तकनीकी मानकों के अनुरूप सभी व्यवस्थाओं का परीक्षण कर आवश्यक रिपोर्ट तैयार की।
इस अवसर पर करौली जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा, सवाई माधोपुर जिला कलेक्टर कानाराम, करौली पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कमांड क्षेत्र एवं पांचना गुडला संघर्ष समिति के प्रतिनिधि तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने विश्वास जताया कि तकनीकी परीक्षण सफल रहने के बाद आगामी सिंचाई सत्र में किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे कृषि गतिविधियों को गति मिलेगी और क्षेत्र के किसानों को इसका सीधा लाभ प्राप्त होगा।