
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पशु रोग नियंत्रण एवं पशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में कोई भी पशु लक्षित टीकाकरण से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पशुओं का स्वास्थ्य किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार है और पशुओं के बीमार होने का सीधा असर किसानों की आजीविका व आय पर पड़ता है। इसलिए टीकाकरण अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ संचालित किया जाए।
मंगलवार को आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को फील्ड स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने, पशु चिकित्सा संस्थानों में औचक निरीक्षण करने तथा समय पर ड्यूटी पर नहीं आने वाले डॉक्टरों एवं कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पतालों की दवाओं के निजी उपयोग और अन्य अनियमितताओं पर भी सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बेजुबान पशुओं के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और विभागीय आंकड़ों व रिपोर्टों का फील्ड वेरिफिकेशन कराया जाएगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने 1962 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के संचालन की नियमित निगरानी करने तथा इन इकाइयों, दवा वितरण और मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की जिलेवार एवं उपखंडवार प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत अब तक 23.25 लाख पशुओं का बीमा किया जा चुका है, जिससे 11.16 लाख से अधिक पशुपालकों को लाभ मिला है। वहीं, प्रदेश में संचालित 536 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से अब तक 64 लाख से अधिक पशुओं का उपचार किया जा चुका है तथा लगभग 17.5 लाख पशुपालक लाभान्वित हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है और इसके अध्ययन के लिए एशियाई विकास बैंक को भी अधिकृत किया गया है।
बैठक में पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, मुख्यमंत्री कार्यालय तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।