
राजस्थान के करौली में वर्ष 2022 में रामनवमी जुलूस के दौरान हुए दंगा मामले में अब एक बार फिर बड़ा खुलासा होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस जांच और सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन से मिली 7 ऑडियो रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर दंगे की पूर्व साजिश, आगजनी, हथियारों की तैयारी और सबूत मिटाने जैसी बातें सामने आई हैं।
इन ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह बातचीत 2 अप्रैल 2022 से 5 अप्रैल 2022 के बीच हुई थी। यदि जांच एजेंसियों के दावे सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल अचानक हुई हिंसा नहीं बल्कि पूर्व नियोजित षड्यंत्र की ओर इशारा करता है।
2 अप्रैल 2022 को करौली में रामनवमी के अवसर पर वाहन रैली निकाली गई थी। आयोजकों ने रैली के लिए प्रशासन से अनुमति ली थी। तय मार्ग के अनुसार रैली गुलाब बाग से रवाना होकर शहर के विभिन्न इलाकों से होते हुए रामद्वार पहुंचने वाली थी।
प्रत्यक्षदर्शियों और रिपोर्ट्स के अनुसार, रैली जैसे ही फूटा गेट से हटवाड़ा क्षेत्र की ओर बढ़ी, तभी अचानक छतों से पथराव शुरू हो गया। इसके बाद माहौल तेजी से बिगड़ गया। बड़ी संख्या में लोग लाठी-डंडों और अन्य हथियारों के साथ सड़क पर उतर आए और रैली में शामिल लोगों पर हमला किया गया।
कुछ ही देर में बाजार क्षेत्र में हिंसा फैल गई। कई दुकानों में आग लगा दी गई, तोड़फोड़ हुई और अफरा-तफरी मच गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
दंगे के बाद करौली में कर्फ्यू लगा दिया गया था। कई दिनों तक बाजार बंद रहे और इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगाई गई। शहर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना था कि इस हिंसा से शहर की सामाजिक सद्भावना और व्यापार दोनों को बड़ा नुकसान हुआ।
पुलिस जांच में तीन प्रमुख बिंदु सामने आने का दावा किया गया है:
रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना से करीब तीन दिन पहले कुछ लोगों की बैठक हुई थी, जिसमें रैली रोकने और विरोध की रणनीति बनाई गई थी। दावा है कि बाहर से भी कुछ युवकों को बुलाया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि जिस दिन रैली निकली, कुछ क्षेत्रों में चुनिंदा दुकानें और ऑटो पहले से बंद रखवाए गए थे। इससे पुलिस को संदेह हुआ कि घटना की पूर्व जानकारी कुछ लोगों को थी।
घटना के बाद कथित रूप से सड़क पर पड़े पत्थर, खून के निशान और अन्य सामग्री को हटवाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस पहुंचने से पहले सफाई करवाई गई थी, ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन से 7 ऑडियो रिकॉर्डिंग बरामद हुईं। इन रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर कई चौंकाने वाली बातें सुनाई देती हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बातचीत में “तैयार रहने”, “दुकानों में आग लगाने”, “हथियार जुटाने” और “कर्फ्यू हटने के बाद फिर कार्रवाई करने” जैसी बातें कही गईं।
कुछ ऑडियो में यह भी कथित तौर पर कहा गया कि पत्थर पहले से जमा किए गए थे और रैली आते ही हमला शुरू कर दिया गया।
हालांकि, इन ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच और अदालत में स्वीकार्यता अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए इन्हें अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
मामले में पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कुल 126 लोगों के नाम दर्ज किए गए थे। इनमें दोनों समुदायों के लोग शामिल बताए गए। कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ आरोपियों ने अग्रिम जमानत ले ली।
जांच के दौरान मोबाइल फोन, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल सबूत भी एकत्र किए गए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने कुछ लोगों को मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए जांच आगे बढ़ाई। कुछ आरोपियों की संपत्तियों पर कार्रवाई भी की गई थी। पुलिस का दावा है कि मुख्य आरोपियों के मोबाइल फोन से ऐसे डिजिटल सबूत मिले, जो घटना में उनकी भूमिका की ओर संकेत करते हैं।
करौली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। जांच एजेंसियां तकनीकी सबूतों, कॉल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर केस तैयार कर रही हैं।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह साफ होगा कि किन आरोपियों पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई जाएंगी और अदालत में क्या साक्ष्य पेश किए जाएंगे।
घटना को चार साल बीत चुके हैं, लेकिन करौली के लोगों के मन में उस दिन की भयावह यादें अब भी जिंदा हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि दंगे से आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सामाजिक रिश्तों पर भी असर पड़ा।
कई दुकानदारों को भारी नुकसान हुआ था, जबकि आम लोगों में लंबे समय तक डर का माहौल बना रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं समाज को गहरी चोट पहुंचाती हैं। प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ समुदायों के बीच संवाद और विश्वास बहाली भी जरूरी है।
करौली जैसी घटनाओं से सबक लेकर भविष्य में शांति व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया और आधिकारिक जांच के अधीन है। सामने आए दावे रिपोर्ट्स और जांच दस्तावेजों पर आधारित हैं। अंतिम निष्कर्ष अदालत और अधिकृत एजेंसियों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होंगे।