
Golden Hind News
महिला आरक्षण कानून को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। 33% आरक्षण देने वाले “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के लागू होने के बावजूद इसके क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। हाल ही में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि महिला आरक्षण को जानबूझकर जनगणना और परिसीमन से जोड़कर टाला जा रहा है।
2023 में पारित महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% सीटें देने का प्रावधान किया गया। हालांकि, इसके लागू होने को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जिससे इसके प्रभावी होने में समय लग सकता है।
सरकार का तर्क है कि नए परिसीमन के बिना आरक्षण लागू करना संभव नहीं, क्योंकि सीटों का पुनर्निर्धारण जरूरी है।
विपक्ष लगातार केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहा है। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
कांग्रेस ने मांग की है कि मौजूदा लोकसभा सीटों पर तुरंत 33% आरक्षण लागू किया जाए और इसे जनगणना से न जोड़ा जाए।
सरकार का कहना है कि
सरकार का यह भी दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल सकता है।
देश की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है:
???? क्या महिला आरक्षण तुरंत लागू हो सकता है या इसे जनगणना-परिसीमन से जोड़ना जरूरी है?
महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक सहमति तो दिखी, लेकिन इसके लागू होने के समय और प्रक्रिया पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर विपक्ष इसे देरी और सियासी रणनीति बता रहा है, वहीं सरकार इसे संवैधानिक मजबूरी बता रही है।
???? आने वाले समय में यह मुद्दा देश की राजनीति और चुनावी एजेंडा दोनों में अहम भूमिका निभाने वाला है।