
जयपुर, वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सचिवालय में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान-2.0 के तहत राज्य स्तरीय निर्देश समिति की पहली बैठक आयोजित हुई। बैठक में अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए विभिन्न विभागों के समन्वय से जल संरक्षण कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने कहा कि जल संरक्षण अभियान को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते हुए राजस्थान को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। साथ ही राज्य स्तरीय निर्देश समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि अभियान के तहत चार चरणों में प्रदेश के 20 हजार गांवों में 5 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर कुल 11,200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रथम चरण (MJSA-2.1) में 1.14 लाख कार्यों के लक्ष्य के विरुद्ध 1.17 लाख कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, जो 103 प्रतिशत उपलब्धि है। वहीं 7 हजार से अधिक कार्य प्रगति पर हैं।
द्वितीय चरण (MJSA-2.2) में अब तक 40 प्रतिशत से अधिक कार्यों को स्वीकृति जारी की जा चुकी है, जबकि तृतीय चरण (MJSA-2.3) में 1.10 लाख कार्य चिन्हित किए गए हैं।
जनभागीदारी बढ़ाने के लिए आयोजित ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत 11 हजार ग्राम पंचायतों में 3.70 लाख कार्यक्रम हुए, जिनमें 2.53 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया। अभियान से कई क्षेत्रों में फसल उत्पादन, सिंचित क्षेत्र और भूजल स्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों की औसत आय में भी सुधार हुआ है।
CSR और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से अब तक 20 करोड़ रुपये से अधिक राशि जल संरक्षण कार्यों एवं क्षमता निर्माण के लिए प्रतिबद्ध की गई है।
मुख्य सचिव ने 25 मई से शुरू होने वाले वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की गाइडलाइन शीघ्र जारी करने, लंबित कार्य समयबद्ध पूर्ण करने और स्वीकृतियां जल्द जारी करने के निर्देश दिए।