RFC को रीको की NOC, उद्योग को मिलेगा बढ़ावा रीको की बड़ी पहल: RFC को संपत्ति विक्रय के लिए सशर्त NOC मंजूर
Saturday, 11 Apr 2026 02:30 am

Golden Hind News

रीको की बड़ी पहल: RFC को संपत्ति विक्रय के लिए सशर्त NOC मंजूर

राजस्थान में औद्योगिक विकास को गति देने और निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) ने राजस्थान वित्त निगम (RFC) को आवंटित संपत्तियों के विक्रय के लिए सशर्त अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने की मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय से प्रदेश में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

यह निर्णय राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूत करने और निवेश को आकर्षित करने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। रीको द्वारा लिया गया यह कदम लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी संपत्तियों को पुनः उपयोग में लाने और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

किन क्षेत्रों में आवंटित थीं संपत्तियां

उल्लेखनीय है कि रीको द्वारा राजस्थान वित्त निगम को समय-समय पर प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंड आवंटित किए गए थे। इनमें बांसवाड़ा, कोटा, अलवर, झुंझुनूं, आबूरोड, बालोतरा, जालौर और भिवाड़ी जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। इन भूखंडों का उपयोग कार्यालय भवनों या आवासीय क्वार्टर के निर्माण के लिए किया जाना था।

हालांकि, समय के साथ इनमें से कई संपत्तियां अनुपयोगी या कम उपयोग में रह गईं। ऐसे में राजस्थान वित्त निगम ने इन संपत्तियों के विक्रय के लिए रीको से एनओसी की मांग की थी, जिसे अब सशर्त मंजूरी दे दी गई है।

सशर्त मंजूरी का क्या है मतलब

रीको ने स्पष्ट किया है कि जिन भूखंडों का आवंटन तत्कालीन प्रचलित दरों (Prevailing Rate) पर किया गया था, उनके लिए बिना किसी अतिरिक्त शर्त के एनओसी जारी कर दी गई है।

वहीं, जिन भूखंडों का आवंटन रियायती दरों (Concessional Rate) पर हुआ था, उनके लिए एनओसी इस शर्त पर दी गई है कि राजस्थान वित्त निगम को आवंटन के समय दी गई रियायत की राशि ब्याज सहित जमा करानी होगी। यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि सरकारी राजस्व की भरपाई सुनिश्चित की जा सके।

उपयोग की शर्तें भी तय

रीको ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन संपत्तियों का विक्रय किया जाएगा, उनका उपयोग उसी उद्देश्य के लिए किया जाएगा, जिसके लिए उन्हें मूल रूप से आवंटित किया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक भूमि का उपयोग गैर-औद्योगिक गतिविधियों में न हो और औद्योगिक विकास की गति बनी रहे।

उद्योग और रियल एस्टेट को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। लंबे समय से खाली पड़े प्रीमियम भूखंड अब नए निवेशकों के लिए उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे कमर्शियल ऑफिस, इंडस्ट्रियल यूनिट्स और अन्य परियोजनाओं का विकास संभव होगा।

जयपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों में इस निर्णय का सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

निवेशकों के लिए बढ़ेगा भरोसा

रीको का यह कदम निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ाने में भी सहायक साबित होगा। जब सरकार और उसकी एजेंसियां प्रक्रियाओं को सरल बनाती हैं और लंबित मामलों का समाधान करती हैं, तो इससे निवेशकों को सकारात्मक संकेत मिलता है।

राजस्थान पहले ही निवेश के लिहाज से एक उभरता हुआ राज्य बन चुका है और इस तरह के फैसले उसे और अधिक आकर्षक बना सकते हैं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस

राज्य सरकार लगातार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है। उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनुमति प्रक्रियाओं में तेजी लाना और अनावश्यक बाधाओं को हटाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

रीको द्वारा एनओसी की यह मंजूरी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे न केवल पुराने मामलों का समाधान होगा बल्कि भविष्य में निवेश प्रक्रिया भी आसान होगी।

आर्थिक गतिविधियों को मिलेगा बल

इस निर्णय से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। निष्क्रिय संपत्तियों को सक्रिय बनाकर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना सरकार की रणनीति का हिस्सा है।

जब इन भूखंडों पर नए प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे, तो इससे निर्माण गतिविधियों में वृद्धि होगी, रोजगार बढ़ेगा और राज्य की आय में भी वृद्धि होगी।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, रीको द्वारा राजस्थान वित्त निगम को संपत्ति विक्रय के लिए सशर्त एनओसी देना एक दूरदर्शी निर्णय है। इससे न केवल अनुपयोगी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा, बल्कि राज्य में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

यह पहल राजस्थान को औद्योगिक दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।