जयपुर में डॉक्टर के नाम 4.37 करोड़ का फ्रॉड पहचान चुराकर 36 लोन लिए, जयपुर में डॉक्टर के साथ 4.37 करोड़ की ठगी
Tuesday, 31 Mar 2026 02:30 am

Golden Hind News

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक चौंकाने वाला फाइनेंसियल फ्रॉड सामने आया है, जहां एक डॉक्टर की पहचान चुराकर करीब 4.37 करोड़ रुपए का लोन अलग-अलग बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से लिया गया।

इस मामले ने बैंकिंग सुरक्षा और पहचान की गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस के अनुसार, SMS हॉस्पिटल में कार्यरत 56 वर्षीय डॉक्टर ने इस संबंध में गांधी नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। मामला तब सामने आया जब बजाज नगर स्थित इंडियन बैंक शाखा की ओर से उनके PAN नंबर पर CIBIL रिपोर्ट जनरेट की गई।

जब डॉक्टर ने अपनी CIBIL रिपोर्ट देखी तो वे हैरान रह गए। रिपोर्ट में उनके नाम पर 36 अलग-अलग लोन अकाउंट दर्ज थे, जिनमें पर्सनल लोन, बिजनेस लोन, हाउसिंग लोन, गोल्ड लोन और क्रेडिट कार्ड लोन शामिल थे। खास बात यह है कि इन सभी लोन में से कोई भी लोन डॉक्टर ने खुद नहीं लिया था।

रिपोर्ट में कई ऐसी कस्टमर डिटेल्स भी दर्ज थीं, जो डॉक्टर से संबंधित नहीं थीं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी पहचान, खासकर PAN कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग कर यह फाइनेंसियल फ्रॉड किया है। पुलिस इसे आइडेंटिटी थेफ्ट का गंभीर मामला मानकर जांच में जुटी है।

CIBIL रिपोर्ट के अनुसार, इन 36 लोन की कुल राशि करीब 4 करोड़ 37 लाख 34 हजार रुपए है। यह लोन देश के कई बड़े बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से लिए गए हैं, जिनमें HDFC Bank, Canara Bank, State Bank of India, Bank of Baroda और Bajaj Finance जैसी संस्थाएं शामिल हैं।

पीड़ित डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में CIBIL से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्हें आशंका है कि जालसाज ने उनकी पहचान का इस्तेमाल कर CIBIL पर भी एक अकाउंट बना लिया और उसी के जरिए ई-मेल के माध्यम से संवाद किया जा रहा है।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें एक ही व्यक्ति की पहचान का उपयोग कर इतने बड़े स्तर पर लोन हासिल किए गए, और बैंकिंग सिस्टम या क्रेडिट एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे यह सवाल उठता है कि क्या पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जालसाज ने किन माध्यमों से डॉक्टर की व्यक्तिगत जानकारी हासिल की। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि किन-किन बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने बिना उचित सत्यापन के लोन स्वीकृत किए।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर फर्जी दस्तावेज, नकली ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार डेटा लीक या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जानकारी हासिल कर इस प्रकार की ठगी को अंजाम दिया जाता है।

इस घटना ने आम लोगों के लिए भी एक बड़ा सबक दिया है कि वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी, खासकर PAN कार्ड, आधार नंबर और बैंकिंग डिटेल्स को बेहद सुरक्षित रखें। समय-समय पर अपनी CIBIL रिपोर्ट और बैंकिंग गतिविधियों की जांच करना भी जरूरी है, ताकि किसी भी अनियमितता का समय रहते पता चल सके।

फिलहाल जयपुर पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही इस फाइनेंसियल फ्रॉड के पीछे शामिल आरोपियों का पता लगाया जाएगा और उन्हें कानून के तहत सख्त सजा दी जाएगी।