सहकारी आंदोलन में अरबन बैंकों की अहम भूमिका सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाने में अरबन बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका: गौतम दक
Tuesday, 31 Mar 2026 02:30 am

Golden Hind News

राजस्थान में सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में अरबन को-ऑपरेटिव बैंकों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।  

इसी कड़ी में सीकर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम दक ने सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाने में शहरी सहकारी बैंकों की अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सहकार की भावना से कार्य करने वाली संस्थाएं न केवल आर्थिक विकास को गति देती हैं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान निभाती हैं।

कार्यक्रम का आयोजन सीकर अरबन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड द्वारा किया गया, जिसमें बैंक प्रबंधन और सहकारी क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंत्री ने बैंक के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यदि सहकारी संस्थाएं पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवा भावना के साथ काम करें, तो वे निजी और वाणिज्यिक बैंकों के समान ही मजबूत विकल्प बन सकती हैं।

उन्होंने कहा कि सहकारी आंदोलन की मूल भावना ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर आधारित है, जहां प्रत्येक सदस्य की भागीदारी से संस्था का संचालन होता है। इस मॉडल में लाभ का उद्देश्य केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान भी होता है। ऐसे में अरबन को-ऑपरेटिव बैंक शहरों में छोटे व्यापारियों, मध्यम वर्ग, कर्मचारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने में सेतु का कार्य करते हैं।

गौतम दक ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जब बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है, तब सहकारी बैंकों को तकनीकी रूप से सशक्त होना बेहद आवश्यक है। डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन लेनदेन, मोबाइल बैंकिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में निरंतर सुधार कर ही ये बैंक अपने ग्राहकों का विश्वास बनाए रख सकते हैं। उन्होंने बैंक प्रबंधन से आग्रह किया कि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए अपनी सेवाओं का विस्तार करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें।

कार्यक्रम के दौरान बैंक अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जोशी और संचालक मंडल के सदस्यों ने अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। साफा पहनाकर और माल्यार्पण कर सम्मानित किए गए अतिथियों ने भी बैंक के कार्यों की सराहना की और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर राज्य स्तरीय सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर, धोद विधायक गोवर्धन वर्मा तथा खण्डेला विधायक सुभाष मील सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने सहकारी क्षेत्र की महत्ता पर अपने विचार साझा किए और कहा कि यह क्षेत्र ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सहकारी बैंकों का महत्व केवल बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ये सामाजिक और आर्थिक विकास के वाहक भी हैं। विशेष रूप से छोटे शहरों और कस्बों में, जहां बड़े बैंक अपनी पहुंच नहीं बना पाते, वहां सहकारी बैंक स्थानीय लोगों की जरूरतों को समझते हुए उन्हें ऋण, बचत और निवेश की सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। इससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं।

सीकर जैसे शहरों में अरबन को-ऑपरेटिव बैंकों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी, किसान और मध्यम वर्गीय परिवार रहते हैं, जिन्हें सरल और सुलभ बैंकिंग सेवाओं की आवश्यकता होती है। सहकारी बैंक इस आवश्यकता को पूरा करते हुए आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं और नीतियां लागू कर रही है। सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी समर्थन प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे बेहतर तरीके से कार्य कर सकें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे सहकारी बैंकों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करें।

कार्यक्रम में सहकारी विभाग के अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और बताया कि किस प्रकार राज्य सरकार सहकारी क्षेत्र को आधुनिक और सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सहकारी बैंकों को और अधिक तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाएगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता और पारदर्शिता में वृद्धि होगी।

सहकारी आंदोलन का इतिहास भारत में काफी पुराना रहा है और यह हमेशा से समाज के कमजोर और मध्यम वर्ग के लिए एक मजबूत आधार रहा है। आज भी यह आंदोलन लाखों लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे में अरबन को-ऑपरेटिव बैंकों की भूमिका और जिम्मेदारी दोनों बढ़ जाती है।

अंत में, गौतम दक ने कहा कि सहकारी संस्थाओं को अपने मूल सिद्धांतों—सहयोग, पारदर्शिता और जनहित—को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। यदि ये संस्थाएं ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करेंगी, तो निश्चित रूप से सहकारी आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

कुल मिलाकर, सीकर में आयोजित यह कार्यक्रम सहकारी क्षेत्र की मजबूती और भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हुआ। यह न केवल सहकारी बैंकों के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि राज्य में आर्थिक समावेशन और विकास को गति देने की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।