लोकतंत्र सेनानियों के बलिदान को किया नमन लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान: आपातकाल के संघर्षों को स्वर्ण जयंती सम्मेलन में किया याद
Monday, 30 Mar 2026 02:30 am

Golden Hind News

जालोर शहर स्थित नंदीश्वरदीप जैन तीर्थ परिसर में लोकतंत्र सेनानी स्वर्ण जयंती सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें आपातकाल के दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को याद किया गया।

इस अवसर पर पशुपालन एवं गोपालन मंत्री Joraram Kumawat ने कहा कि वर्ष 1975 में लागू The Emergency in India के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए और प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई थी। इसके बावजूद लोकतंत्र सेनानियों ने अपने संघर्ष को जारी रखते हुए लोकतंत्र की ज्योति को जलाए रखा।

 “त्याग और समर्पण प्रेरणा का स्रोत”

मंत्री कुमावत ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का साहस और बलिदान देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनका त्याग और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि अधिनियम के तहत सेनानियों को 20 हजार रुपये मासिक पेंशन और 4 हजार रुपये की चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।


 आपातकाल के संघर्षों को किया याद

मुख्य सचेतक एवं लोकतंत्र सेनानी Jogeshwar Garg ने आपातकाल के दौरान के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह समय लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक बड़े संघर्ष का काल था, जिसे एक यज्ञ के रूप में याद किया जाना चाहिए।


 जनप्रतिनिधियों ने भी रखे विचार

कार्क्रम में Rajendra Gehlot, Lumbaram Choudhary, Chhagan Singh Rajpurohit और Gopal Sharma सहित कई जनप्रतिनिधियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों, परंपराओं और नागरिक स्वतंत्रता पर अपने विचार व्यक्त किए।


 लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान

कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों और उनके आश्रितों को शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता मधुसूदन व्यास ने भी आपातकाल के दौर के संघर्षों और लोकतंत्र की रक्षा के प्रयासों को विस्तार से साझा किया।