
राजस्थान : राजस्थान में पंचायत चुनाव समय पर होना मुश्किल नजर आ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह OBC आरक्षण को लेकर आयोग की रिपोर्ट में देरी बताई जा रही है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि तय समय सीमा में चुनाव कराना चुनौती बन सकता है।
दरअसल, राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को पत्र लिखकर बताया है कि पिछड़े वर्ग की जनसंख्या से जुड़े जो आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं, वे अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण हैं। ऐसे में इन आंकड़ों के आधार पर पंचायतों में OBC सीटों का आरक्षण तय करना संभव नहीं है।
आयोग ने पत्र में कहा है कि सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए जाएं कि वे सही और पूर्ण आंकड़े आयोग को भेजें, ताकि आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जा सके।
आयोग के अनुसार पंचायतों से जुड़े कई आंकड़ों में गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं।
403 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या और OBC जनसंख्या शून्य दिखाई गई
118 पंचायतों में कुल जनसंख्या 1 से 500 बताई गई
266 पंचायतों में जनसंख्या 501 से 1000 के बीच दर्शाई गई
जबकि पंचायतीराज विभाग के नियमों के अनुसार पंचायत का गठन कम से कम 1200 की जनसंख्या पर किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि जनसंख्या संबंधी आंकड़े सही नहीं हैं।
आयोग ने यह भी बताया कि पंचायतवार SC और ST आरक्षण से संबंधित जानकारी भी पूरी नहीं भेजी गई है।
पंचायतीराज विभाग को कई बार जानकारी देने के बाद भी 24 फरवरी 2026 तक आयोग को पंचायतवार जनसंख्या और आरक्षण से जुड़ी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को करीब 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि:
31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाए
15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराए जाएं
कोर्ट ने यह भी कहा था कि परिसीमन का अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उसे कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
पंचायतीराज राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर के साथ बैठक कर कोर्ट के आदेश के अनुसार चुनाव कराने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, उन्होंने OBC आयोग की रिपोर्ट को लेकर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
राजस्थान सरकार ने 9 मई 2025 को OBC आयोग का गठन किया था।
अध्यक्ष: मदन लाल भाटी (सेवानिवृत्त न्यायाधीश)
सदस्य: मोहन मोरवाल, डॉ. राजीव सक्सेना, गोपाल कृष्णा और पवन मंडाविया
आयोग समय पर रिपोर्ट नहीं दे पाया, जिसके कारण सरकार को तीन बार आयोग का कार्यकाल बढ़ाना पड़ा।
पहले कार्यकाल 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया और बाद में 31 मार्च 2026 तक।
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार के पास अब चार विकल्प हो सकते हैं:
कोर्ट से OBC आरक्षण तय करने के लिए अतिरिक्त समय मांगना
बिना OBC आरक्षण के चुनाव कराने का विकल्प
आरक्षित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए समय बढ़ाने की मांग
समय मिलने पर वन स्टेट-वन इलेक्शन की योजना लागू करना
इससे पहले राज्य सरकार 113 नगर निकायों के चुनाव स्थगित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में SLP भी दायर कर चुकी है।
हाईकोर्ट ने 113 शहरी निकायों में वार्ड परिसीमन प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताते हुए रद्द कर दिया था, जिसके बाद सरकार ने नई परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय मांगा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तक OBC आयोग को सही आंकड़े नहीं मिलते, तब तक क्या पंचायत चुनाव समय पर हो पाएंगे या सरकार को एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।