
स्वास्थ्य विभाग की तकनीकी टीम द्वारा जब इलाज और भुगतान से जुड़े आंकड़ों का मिलान किया गया, तो कई कार्डों में असामान्य खर्च पैटर्न सामने आया। कुछ मामलों में एक ही कार्ड से कम समय में बार-बार इलाज और महंगी दवाओं के क्लेम दर्ज पाए गए, जबकि लाभार्थी की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
जांच अधिकारियों को आशंका है कि कुछ अस्पतालों और बाहरी एजेंटों की मिलीभगत से फर्जी उपचार और दवाओं के बिल पोर्टल पर अपलोड किए गए। ऐसे क्लेम भी सामने आए हैं जिनमें मरीज के अस्पताल पहुंचने या भर्ती होने का कोई ठोस रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने:
संदिग्ध कार्डों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय किया
भुगतान प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई
संबंधित रिकॉर्ड का डिजिटल ऑडिट शुरू किया
अधिकारियों का कहना है कि दोष साबित होने पर संबंधित अस्पतालों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग एक नई प्रणाली लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत लाभार्थियों को उनके कार्ड से जुड़े इलाज और खर्च की जानकारी सीधे मोबाइल पर सूचना के रूप में दी जाएगी, जिससे किसी भी गड़बड़ी की तुरंत पहचान हो सके।
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि यह केवल शुरुआती कार्रवाई है। जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और आने वाले दिनों में और कार्ड ब्लॉक होने व रिकवरी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
RGHS में सामने आई यह कार्रवाई सरकार की मंशा को दर्शाती है कि सार्वजनिक धन और स्वास्थ्य योजनाओं में किसी भी तरह की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा।