
जयपुर: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और नई शिक्षा नीतियों को लेकर राजस्थान में सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। राज्यभर में छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, वहीं इन आंदोलनों को अब कई बड़े राजनीतिक नेताओं का खुला समर्थन भी मिलने लगा है। इस मुद्दे ने शिक्षा से लेकर राजनीति तक व्यापक बहस छेड़ दी है।
छात्र संगठनों का आरोप है कि UGC और केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियां छात्रों के हितों के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि नई नीतियों से फीस बढ़ने, परीक्षा प्रणाली में अस्थिरता और गरीब व मध्यम वर्ग के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। इसी को लेकर विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों में धरना-प्रदर्शन और रैलियां की जा रही हैं।
छात्र आंदोलनों को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कई वरिष्ठ नेता खुलकर मैदान में उतर आए हैं। नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह शिक्षा को व्यावसायिक बना रही है और छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। कई नेताओं ने विश्वविद्यालय परिसरों का दौरा कर छात्रों से संवाद किया और उनके आंदोलन को जायज़ ठहराया।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि शिक्षा नीतियों का उद्देश्य गुणवत्ता सुधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। सरकार का दावा है कि किसी भी छात्र के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा और सभी निर्णय छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं।
UGC और शिक्षा नीतियों का मुद्दा अब सड़क से सदन तक पहुंच गया है। विधानसभा में विपक्ष ने इसे लेकर सरकार को घेरा और जवाबदेही की मांग की। विपक्षी विधायकों ने कहा कि जब तक छात्रों की शंकाओं का समाधान नहीं होगा, तब तक विरोध जारी रहेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि सुधार आवश्यक हैं, लेकिन इन्हें लागू करने से पहले सभी पक्षों से संवाद जरूरी है। उनका कहना है कि बिना व्यापक सहमति के किए गए बदलाव विवाद और असंतोष को जन्म देते हैं।
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं राजनीतिक दल इस मुद्दे को आने वाले चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं, जिससे राजस्थान की राजनीति में शिक्षा एक बड़ा मुद्दा बनती नजर आ रही है।
निष्कर्ष: UGC और शिक्षा नीतियों को लेकर राजस्थान में छिड़ा यह राजनीतिक घमासान फिलहाल थमता नहीं दिख रहा। छात्र, शिक्षक और राजनीतिक दल—सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है।