राजस्थान बजट से पहले स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बढ़ी मांग, सामाजिक संगठनों ने सरकार से अधिक फंडिंग की आगामी बजट से पहले स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर तेज हुई मांग, सामाजिक संगठनों ने राजस्थान सरकार से अधिक फंडिंग की अपील
Friday, 16 Jan 2026 02:30 am

Golden Hind News

जयपुर: राजस्थान में आगामी राज्य बजट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसी कड़ी में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अधिक बजट आवंटन की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जनसेवा से जुड़े समूहों ने राजस्थान सरकार से अपील की है कि आने वाले बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए और इस क्षेत्र के लिए पर्याप्त फंडिंग सुनिश्चित की जाए।

सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रदेश की आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि सरकारी स्वास्थ्य ढांचा अभी भी डॉक्टरों की कमी, संसाधनों के अभाव और सीमित बजट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां आज भी कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही जरूरी जांच सुविधाएं।

संगठनों ने मांग की है कि जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाए। इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की संख्या बढ़ाने और वहां 24 घंटे सेवाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है। उनका कहना है कि अगर प्राथमिक स्तर पर ही बेहतर इलाज उपलब्ध हो जाए, तो बड़े अस्पतालों पर दबाव अपने आप कम हो जाएगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बजट में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की भर्ती के लिए अलग से प्रावधान होना चाहिए। वर्तमान में कई अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। इससे न केवल मरीजों की परेशानी बढ़ती है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी कमजोर होता है।

सामाजिक संगठनों ने मुफ्त दवा योजना, जांच सुविधाओं और जनस्वास्थ्य बीमा योजनाओं को और मजबूत करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में गरीब और मध्यम वर्ग के लिए इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना बेहद जरूरी है।

इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान करने की मांग की गई है। संगठनों का मानना है कि सिर्फ इलाज पर ही नहीं, बल्कि रोकथाम और जागरूकता कार्यक्रमों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।

संगठनों ने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली कितनी जरूरी है। ऐसे में सरकार को स्वास्थ्य को केवल खर्च नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखना चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं न केवल लोगों की जीवन गुणवत्ता सुधारती हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कुल मिलाकर, सामाजिक संगठनों की मांग है कि आगामी राजस्थान बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि प्रदेश के हर नागरिक को सुलभ, सस्ता और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।