
जयपुर
राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला में खनन को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसके दावों को तथ्यों से परे और भ्रामक बताया है। गहलोत ने कहा कि अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर जो तर्क दिए जा रहे हैं, वे पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अरावली केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि उत्तर भारत की जीवनरेखा है। यह पर्वत श्रृंखला जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और जलवायु संतुलन में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में इसके प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से समझौता होगा।
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा खनन को लेकर दिए जा रहे स्पष्टीकरण वैज्ञानिक तथ्यों और पर्यावरणीय रिपोर्टों से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि अरावली में खनन की अनुमति देना सीधे तौर पर हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने जैसा है।
“अरावली को कमजोर करना मतलब राजस्थान को मरुस्थल बनने की ओर धकेलना है,”
— अशोक गहलोत
गहलोत ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभावों को प्राथमिकता दे।
अरावली खनन को लेकर बयानबाजी से साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य और केंद्र के बीच सियासी टकराव का बड़ा कारण बन सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को जनहित और पर्यावरण सुरक्षा से जोड़कर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि अरावली से जुड़े किसी भी फैसले से पहले सार्वजनिक विमर्श, विशेषज्ञों की राय और पर्यावरणीय आकलन रिपोर्ट को सामने रखा जाए, ताकि जनता सच्चाई जान सके।