
अमेरिका ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। यह फैसला भारत की कूटनीति की सफलता है। भारत अब अन्य देशों से भी टीआरएफ को आतंकवादी संगठन घोषित कराने की कोशिश कर रहा है जिससे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा प्रतिबंध लगाना आसान हो जाएगा। भारत ने इस फैसले का स्वागत किया है। पाकिस्तान की सरकार को यह करारा झटका है जबकि टीआरएफ की गतिविधियों को लेकर वैश्विक समुदाय को सतर्क करने में जटी भारतीय कूटनीति की सफलता है।
इसके बाद इस संगठन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की तरफ से प्रतिबंध लगाने का काम आसान हो जाएगा। भारत ने अमेरिकी फैसला का स्वागत किया है और खास तौर पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो को धन्यवाद कहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को एक बयान जारी कर टीआरएफ को लेकर अपने विभाग के फैसले की जानकारी दी। रुबियो ने अपने बयान में कहा, "टीआरएफ को आतंकवादी संगठन घोषित करना ट्रंप प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और पहलगाम हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" उन्होंने इस कदम कोक भारत के साथ अमेरिका के रणनीतिक सहयोग का प्रतीक बताया है।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फैसले का स्वागत किया
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारत-अमेरिका के आतंकवाद विरोधी सहयोग की मजबूत पुष्टि बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति के तहत यह एक महत्वपूर्ण कदम है।" भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत अमेरिका को टीआरएफ और पाकिस्तान के संबंधों के सबूत सौंपे थे, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।