रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद पर भारत की नीति जीरो टॉलरेंस की रहेगी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सम्मेलन में आतंकवाद की कड़ी निंदा की
Wednesday, 25 Jun 2025 13:00 pm

Golden Hind News

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने SCO (शंघाई सहयोग संगठन) की बैठक में एक बार फिर आतंकवाद पर दो टूक अपनी बात रखी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा आज आतकंवाद और शांति साथ-साथ नहीं चल सकते हैं. उन्होंने कहा कि हम आतंकवाद को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं करेंगे. पहलगाम में आतंकियों ने कायरता पूर्ण घटना को अंजाम दिया था. हमने उसका करारा जवाब दिया. ऑपरेशन सिंदूर ने ये बता दिया कि भारत अब आतंकवाद को उसकी ही जुबान में जवाब देने को तैयार है. पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी टीआरएफ और लश्कर ने ली थी. इसलिए हमारी सेना ने उनके ठिकानों को तबाह किया. हम आगे भी ऐसे हमलों को करारा जवाब देने को तैयार हैं. 

आतंकवाद को खत्म करने के लिए सबको आगे आना चाहिए 

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत का मानना ​​है कि रिफॉर्मेड मल्टिलेटरिजम देशों के बीच संघर्ष को रोकने के लिए संवाद और सहयोग के लिए तंत्र बनाने में मदद कर सकता है. कोई भी देश, चाहे वह कितना भी बड़ा और शक्तिशाली क्यों न हो, अकेले काम नहीं कर सकता. वास्तव में, वैश्विक व्यवस्था या बहुपक्षवाद का मूल विचार यह धारणा है कि राष्ट्रों को अपने पारस्परिक और सामूहिक लाभ के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना होगा. यह हमारी सदियों पुरानी संस्कृत कहावत 'सर्वे जना सुखिनो भवन्तु' को भी दर्शाता है, जिसका अर्थ है सभी के लिए शांति और समृद्धि. एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए क़िंगदाओ में आना मेरे लिए खुशी की बात है.  

SCO में राजनाथ का संबोधन, 4 पॉइंट 

 

1. उग्रवाद और आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती राजनाथ ने आगे कहा, मेरा मानना ​​है कि सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित हैं। इन समस्याओं की असल वजह कट्टरपंथ, उग्रवाद और आतंकवाद में बढ़ोत्तरी है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है और हमें अपनी सामूहिक सुरक्षा और संरक्षा के लिए इन बुराइयों के खिलाफ अपनी लड़ाई में एकजुट होना चाहिए।

2. आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस राजनाथ ने कहा भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति आज हमारे एक्शन में भी नजर आती है। इसमें आतंकवाद के खिलाफ स्वयं की रक्षा करने का हमारा अधिकार भी शामिल है। हमने दिखाया है कि आतंकवाद के केंद्र अब सुरक्षित नहीं हैं और हम उन्हें निशाना बनाने में संकोच नहीं करेंगे।

3. देशों के बीच संघर्ष रोकने के लिए संवाद की जरूरत भारत का मानना ​​है कि संवाद के बिना देशों के बीच संघर्ष को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए सभी को साथ आना होगा। कोई भी देश, चाहे वह कितना भी बड़ा और शक्तिशाली क्यों न हो, अकेले काम नहीं कर सकता। साथ मिलकर काम करने की हमारी पुरानी पंरपरा रही है। यह हमारी सदियों पुरानी संस्कृत कहावत 'सर्वे जन सुखिनो भवन्तु' को भी दर्शाता है, जिसका अर्थ है सभी के लिए शांति और समृद्धि।"

4. ग्लोबल चैलेंज में सभी एक साथ आएं कोरोना वायरस से यह साबित हो गया कि महामारियों की कोई सीमा नहीं होती। जब तक सभी सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक कोई भी सेफ नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि कैसे महामारी, जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां हमारे जन-जीवन का प्रभावित कर सकती हैं। इनसे निपटने के लिए सभी देशों को एकजुट होना पड़ता है।