राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने रविवार को झुंझुनूं के डूंडलोद गर्ल्स स्कूल के वार्षिक समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं को सम्मानित भी किया। उन्होंने बालिकाओं को खूब पढ़ने और आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर बच्चों ने मनमोहक कला प्रस्तुतियां दी।
हरिभाऊ बागडे ने रविवार को झुंझुनूं के डूंडलोद गर्ल्स स्कूल के वार्षिक समारोह में भाग लिया
राज्यपाल ने डूंडलोद गर्ल्स विद्यालय वार्षिक समारोह में भाग लिया- उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं को सम्मानित किया
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आईजीएनपी क्षेत्र में जल उत्पादकता बढ़ाने के लिए बनेगी समेकित कार्ययोजना
आईजीएनपी क्षेत्र में जल उत्पादकता बढ़ाने के लिए बनेगी समेकित कार्ययोजना, किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
राजस्थान सरकार ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) क्षेत्र में जल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से एक व्यापक एवं समेकित कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रेशर इरिगेशन, फार्म डिग्गी, पीएम-कुसुम, नहरों के आधुनिकीकरण तथा अन्य कृषि एवं सिंचाई योजनाओं को एकीकृत कर ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिससे उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो और किसानों को अधिक उत्पादन के साथ बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।
मुख्य सचिव ने यह निर्देश शासन सचिवालय में आयोजित इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र के क्रॉपिंग पैटर्न एवं जल उपयोग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में कमांड एरिया डेवलपमेंट (सीएडी) विभाग, कृषि विभाग, जल संसाधन विभाग, ऊर्जा विभाग, कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
आईजीएनपी की भूमिका प्रदेश के लिए महत्वपूर्णमुख्य सचिव ने कहा कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 30 लाख हेक्टेयर कमांड क्षेत्र आता है, जिसमें से करीब 21 लाख हेक्टेयर भूमि सीधे नहर के माध्यम से सिंचित होती है। यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान के उन क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा साबित हुई है, जहां कभी सिंचाई के सीमित साधन थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उपलब्ध जल का वैज्ञानिक और दक्षतापूर्ण उपयोग किया जाए, ताकि प्रति बूंद पानी से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार नई कार्ययोजना तैयार कर रही है।
विकसित राजस्थान-2047 के विजन से जुड़ी पहलमुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार विकसित राजस्थान-2047 के विजन के अनुरूप कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और जलवायु-अनुकूल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बदलती जलवायु परिस्थितियों और सीमित जल संसाधनों को देखते हुए जल संरक्षण तथा जल उत्पादकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ सिंचाई जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध योजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन करना होगा।
तैयार होगा व्यापक रिवर बेसिन प्लानबैठक में आईजीएनपी क्षेत्र के लिए व्यापक रिवर बेसिन प्लान तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे कमांड क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कर यह पता लगाया जाए कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल सबसे उपयुक्त रहेगी और किस प्रकार जल उपयोग की दक्षता बढ़ाई जा सकती है।
इसके साथ ही क्षेत्रवार क्रॉपिंग पैटर्न का विश्लेषण कर ऐसी फसल प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।
'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' मिशन को मिलेगा बढ़ावामुख्य सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार के 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' मिशन के उद्देश्यों को आईजीएनपी क्षेत्र की कार्ययोजना में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इसके तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जल की बचत के साथ उत्पादन भी बढ़ सके।
उन्होंने कहा कि जल एवं आर्थिक उत्पादकता से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप योजनाएं तैयार कर किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाएगा।
प्रेशर इरिगेशन और फार्म डिग्गियों पर विशेष जोरबैठक में प्रेशर इरिगेशन प्रणाली के विस्तार पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आईजीएनपी के विशेषकर द्वितीय चरण में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी प्रणालियों का तेजी से विस्तार किया जाए।
इसके साथ ही किसानों को फार्म डिग्गियों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने तथा उन्हें सोलर आधारित सिंचाई प्रणालियों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही गई। इससे जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी, सिंचाई अधिक प्रभावी होगी और भूजल पर निर्भरता भी कम होगी।
पीएम-कुसुम योजना का होगा बेहतर उपयोगमुख्य सचिव ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से अधिकाधिक किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली से जोड़ा जाए। इससे किसानों की बिजली पर निर्भरता कम होगी, सिंचाई लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग और कृषि विभाग मिलकर ऐसे मॉडल विकसित करें जिनसे किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके।
विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकतामुख्य सचिव ने कमांड एरिया डेवलपमेंट (सीएडी) विभाग को नोडल एजेंसी की भूमिका निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्यानिकी तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग संचालित योजनाओं को एकीकृत करने से बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे और संसाधनों का भी अधिक प्रभावी उपयोग हो सकेगा।
अनुसंधान संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों की होगी अहम भूमिकाबैठक में कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर-सीएजेडआरआई तथा अन्य अनुसंधान संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान परियोजनाएं तैयार की जाएं।
उन्होंने इसबगोल, क्लस्टर बीन (ग्वार) तथा कम पानी में अधिक लाभ देने वाली अन्य फसलों की उन्नत किस्मों के विकास एवं प्रसार पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षणसरकार किसानों तक नई तकनीकों को पहुंचाने के लिए एक्सपोजर विजिट, फील्ड ट्रायल और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित करेगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों, जल संरक्षण उपायों, उन्नत बीजों तथा वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि यदि किसान नई तकनीकों को तेजी से अपनाते हैं तो उत्पादन लागत कम होगी और प्रति हेक्टेयर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकेगी।
जल संरक्षण के साथ बढ़ेगी उत्पादकताबैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भविष्य में जल संकट की चुनौती को देखते हुए जल उपयोग दक्षता बढ़ाना आवश्यक है। प्रेशर इरिगेशन, फार्म डिग्गी, नहर आधुनिकीकरण तथा सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई जैसी पहलें न केवल जल संरक्षण में सहायक होंगी, बल्कि कृषि उत्पादन को भी नई दिशा देंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो पश्चिमी राजस्थान के किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त होगा और कृषि क्षेत्र अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बन सकेगा।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदमराज्य सरकार की यह पहल केवल सिंचाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कृषि प्रणाली को अधिक आधुनिक, वैज्ञानिक और बाजार उन्मुख बनाना भी है। फसल विविधीकरण, जल उपयोग दक्षता, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और अनुसंधान आधारित खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ यह कार्ययोजना लागू होती है तो आईजीएनपी क्षेत्र देश में जल प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई का एक सफल मॉडल बन सकता है। इससे जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तीनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल, आयुक्त उद्यानिकी श्वेता चौहान, कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल सहित कमांड एरिया डेवलपमेंट विभाग, जल संसाधन विभाग, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर-सीएजेडआरआई, कृषि विज्ञान केंद्रों तथा संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की।
ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट, 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' पर भजनलाल शर्मा का बड़ा बयान
ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट, 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' पर भजनलाल शर्मा का जोर
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण से संबंधित वर्ष 2026 का प्रतिवेदन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दिया। आयोग के अध्यक्ष मदनलाल भाटी एवं सदस्यों ने बुधवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव समय पर कराने का जो वादा किया था, उसे पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
ओबीसी आरक्षण पर आयोग ने सौंपी रिपोर्टराजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है। आयोग की रिपोर्ट स्थानीय निकायों में आरक्षण व्यवस्था के संबंध में आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए तथ्यात्मक और संतुलित रिपोर्ट अहम भूमिका निभाती है।
स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रतिबद्धतामुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक ताकत गांवों और शहरों के स्थानीय निकायों में निहित है। राज्य सरकार का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और मजबूत बनाना है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनाव समय पर कराने से विकास कार्यों में गति बनी रहती है और जनता को अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से बेहतर प्रशासनिक सेवाएं मिलती हैं।
'वन स्टेट-वन इलेक्शन' से होगी बचतमुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो इससे समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी।
उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। एक साथ चुनाव होने से विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को बिना बाधा निरंतर गति मिलेगी।
विकास कार्यों को मिलेगी निरंतर गतिमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है ताकि विकास परियोजनाओं पर लगातार काम जारी रहे। उन्होंने कहा कि संसाधनों का बेहतर उपयोग और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए चुनावी प्रक्रिया में सुधार आवश्यक है।
उन्होंने विश्वास जताया कि बेहतर चुनावी प्रबंधन से प्रदेश में विकास कार्यों की गति और तेज होगी तथा जनता को योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा।
बैठक में कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी रहे मौजूदमुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर, विधि एवं न्याय मंत्री जोगाराम पटेल, नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री झाबर सिंह खर्रा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, ओबीसी आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन तथा आयोग के सदस्य प्रो. राजीव सक्सैना, गोपाल कृष्ण, मोहन मोरवाल और पवन मावंडिया सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में आयोग द्वारा तैयार प्रतिवेदन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से संकेत दिया गया कि स्थानीय निकायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
राजस्थान सरकार का कहना है कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को सशक्त बनाना, लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाना और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से विकास कार्यों को गति देना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनी राजस्थान के किसानों की मजबूत ढाल, 62.58 लाख किसानों को मिला सुरक्षा कवच
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनी राजस्थान के किसानों की मजबूत ढाल, 62.58 लाख किसानों को मिला सुरक्षा कवच
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्राकृतिक आपदाओं, प्रतिकूल मौसम, ओलावृष्टि, सूखा, कीट एवं बीमारियों से होने वाले फसल नुकसान के बीच यह योजना प्रदेश के लाखों किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। राज्य सरकार के अनुसार वर्ष 2025-26 में राजस्थान देश का ऐसा राज्य बना है, जहां सबसे अधिक 62 लाख 58 हजार किसानों को इस योजना के तहत जोड़ा गया है। साथ ही एक करोड़ हेक्टेयर से अधिक फसली क्षेत्र का बीमा कर राष्ट्रीय स्तर पर भी पहला स्थान हासिल किया गया है।
सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक जोखिमों से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और खेती को अधिक सुरक्षित बनाना है। इसी लक्ष्य के तहत राज्य में व्यापक स्तर पर योजना का क्रियान्वयन किया गया है।
एक करोड़ हेक्टेयर से अधिक फसली क्षेत्र हुआ बीमितवर्ष 2025-26 में राजस्थान के लगभग 2 करोड़ 82 लाख हेक्टेयर सकल फसली क्षेत्र में से एक करोड़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किया गया। यह देश में सबसे अधिक बीमित क्षेत्र है।
राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश के कुल फसली क्षेत्र का 36 प्रतिशत हिस्सा बीमा सुरक्षा के दायरे में है, जबकि राष्ट्रीय औसत 32 प्रतिशत है। इस प्रकार राजस्थान राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल है। बीमित क्षेत्र के प्रतिशत के आधार पर राजस्थान झारखंड और छत्तीसगढ़ के बाद देश में अग्रणी राज्यों में गिना जा रहा है।
चूरू, बाड़मेर और बीकानेर में सबसे अधिक कवरेजप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2025-26 में सबसे अधिक बीमित क्षेत्र चूरू जिले में दर्ज किया गया, जहां 13.35 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र का बीमा हुआ।
इसके बाद बाड़मेर में 11.48 लाख हेक्टेयर तथा बीकानेर में 9.27 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र बीमा योजना के दायरे में आया।
यदि बीमा कवरेज प्रतिशत की बात करें तो चूरू में कुल फसली क्षेत्र का 77 प्रतिशत, बाड़मेर में 69 प्रतिशत और नागौर में 47 प्रतिशत क्षेत्र योजना के अंतर्गत बीमित किया गया। सरकार का मानना है कि इन जिलों में किसानों की बढ़ती भागीदारी योजना के प्रति विश्वास को दर्शाती है।
पांच वर्षों में 18,189 करोड़ रुपये से अधिक के दावों का भुगतानराज्य सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्षों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत 5 करोड़ 21 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र का बीमा किया गया।
इस अवधि में किसानों ने 4,650 करोड़ रुपये से अधिक का प्रीमियम जमा कराया, जो देश में सबसे अधिक बताया गया है।
इसी दौरान राज्य में 18 करोड़ 81 लाख से अधिक आवेदन दर्ज किए गए और पात्र किसानों को 18,189 करोड़ रुपये से अधिक की बीमा दावा राशि का भुगतान किया गया। सरकार का कहना है कि यह राशि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता साबित हुई है।
दो वर्षों में जारी हुईं 7.53 करोड़ से अधिक पॉलिसियांवर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान खरीफ और रबी दोनों सीजन को मिलाकर लगभग 7 करोड़ 53 लाख से अधिक फसल बीमा पॉलिसियां जारी की गईं। इन पॉलिसियों का कुल बीमित मूल्य लगभग एक लाख करोड़ रुपये बताया गया है।
इसी अवधि में बीमा दावों के तहत किसानों को 4,498 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई। राज्य सरकार का कहना है कि इससे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों की आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद मिली।
प्राकृतिक आपदाओं से मिल रही आर्थिक सुरक्षाराजस्थान में मौसम की अनिश्चितता, सूखा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक जोखिम किसानों के लिए हमेशा बड़ी चुनौती रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर रही है।
सरकार का कहना है कि बीमा कवरेज मिलने से फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक राहत मिलती है, जिससे वे अगली फसल की तैयारी बिना अधिक वित्तीय दबाव के कर सकते हैं। इससे खेती में जोखिम कम होता है और किसानों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना?प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की प्रमुख कृषि योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों, बीमारियों और प्रतिकूल मौसम के कारण होने वाले फसल नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
इस योजना के तहत किसानों से कम प्रीमियम लिया जाता है, जबकि शेष प्रीमियम का वहन केंद्र और राज्य सरकारें करती हैं। यदि बीमित फसल को निर्धारित कारणों से नुकसान होता है तो पात्र किसानों को बीमा कंपनी के माध्यम से दावा राशि का भुगतान किया जाता है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसान अधिसूचित फसलों का बीमा निर्धारित समय सीमा के भीतर करा सकते हैं। बीमा के बाद यदि प्राकृतिक कारणों से फसल प्रभावित होती है, तो नियमानुसार सर्वे और आकलन के आधार पर दावा राशि जारी की जाती है।
किसानों की सुरक्षा पर सरकार का जोरराज्य सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केवल बीमा योजना नहीं, बल्कि किसानों की आय को सुरक्षित रखने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सरकार लगातार अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ने, बीमा कवरेज बढ़ाने और दावा भुगतान प्रक्रिया को प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
प्रदेश में बढ़ते बीमा कवरेज, बड़ी संख्या में लाभान्वित किसानों और हजारों करोड़ रुपये के दावा भुगतान के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना राजस्थान के लाखों अन्नदाताओं के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरी है।
राजस्थान में अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 25 हजार लीटर वॉश नष्ट, कई जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी
राजस्थान में अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 25 हजार लीटर वॉश नष्ट, कई जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी
जयपुर, 5 अगस्त। राजस्थान में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग ने राज्यव्यापी अभियान के तहत व्यापक कार्रवाई की है। आबकारी आयुक्त नमित मेहता के निर्देशन में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के दौरान प्रदेश के कई जिलों में नाकाबंदी, गश्त और छापेमारी कर बड़ी मात्रा में अवैध शराब, वॉश (शराब बनाने का कच्चा घोल) और अवैध भट्टियों को नष्ट किया गया। अभियान के दौरान कई मामलों में अभियोग दर्ज किए गए तथा आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया।
आबकारी विभाग ने बताया कि प्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। इसी के तहत अन्य राज्यों से शराब की तस्करी, अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। विभागीय टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने और नियमित रूप से दबिश देने के निर्देश दिए गए हैं।
जयपुर ग्रामीण में सबसे बड़ी कार्रवाईअभियान के दौरान जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में आबकारी विभाग ने सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए चाकसू क्षेत्र के ग्राम माधोगढ़, तुंगा, बगरियां, नारायण बाबा की ढाणी और ढूंढ नदी क्षेत्र में छापेमारी की। यहां से 25 हजार लीटर वॉश नष्ट किया गया। इसके अलावा शराब बनाने में इस्तेमाल हो रही 15 अवैध भट्टियों और उपकरणों को भी ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान 70 लीटर अवैध हथकड़ शराब भी जब्त की गई।
विभाग का कहना है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब निर्माण की सूचनाएं मिल रही थीं, जिसके बाद विशेष योजना बनाकर यह कार्रवाई की गई।
चित्तौड़गढ़ में शराब और वॉश जब्तचित्तौड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा और बेगूं क्षेत्र में आबकारी निरोधक दल ने छापेमारी कर 1,000 लीटर वॉश नष्ट किया तथा 15 लीटर अवैध हथकड़ शराब बरामद की। इसके साथ ही बिना नंबर की एक मोटरसाइकिल से 62 पव्वे अवैध हथकड़ शराब जब्त की गई और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
बीकानेर जोन में कई स्थानों पर दबिशबीकानेर जोन में होटलों, ढाबों और संदिग्ध स्थानों पर चलाए गए विशेष अभियान के दौरान बीकानेर शहर, श्रीगंगानगर, संगरिया, नोहर, चूरू, रायसिंहनगर और सूरतगढ़ में कार्रवाई की गई। आबकारी प्रवर्तन दल (EPF) ने यहां 1,800 लीटर वॉश, 5 अवैध भट्टियां, 27 बीयर की बोतलें, 54 पव्वे देशी शराब और 34 लीटर हथकड़ शराब जब्त की। कार्रवाई के दौरान 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
ब्यावर, केकड़ी और कोटा में भी कार्रवाईकेकड़ी में छापेमारी के दौरान 200 लीटर वॉश नष्ट कर 2 लीटर हथकड़ शराब जब्त की गई।
वहीं ब्यावर आबकारी थाना क्षेत्र में ईपीएफ टीम ने 400 लीटर वॉश, 3 पुरानी भट्टियां और 6 बोतल अवैध हथकड़ शराब बरामद कर नष्ट की।
कोटा जिले के रामगंज मंडी क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान 700 लीटर वॉश और 2 अवैध भट्टियां नष्ट की गईं। मामले में आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया गया।
जोधपुर, झुंझुनूं और पाली में जब्तीजोधपुर शहर, ग्रामीण, पश्चिम और सरदारपुरा क्षेत्रों में संयुक्त कार्रवाई के दौरान 58 बीयर कैन, 87 पव्वे देशी शराब, 19 पव्वे आईएमएफएल (इंडियन मेड फॉरेन लिकर) और 4 लीटर हथकड़ शराब जब्त की गई।
झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र से 576 पव्वे अवैध शराब बरामद की गई।
पाली शहर में भी संयुक्त टीम ने छापेमारी कर बड़ी मात्रा में देशी और अंग्रेजी शराब जब्त की तथा एक आरोपी को गिरफ्तार किया।
किशनगढ़ रेलवे स्टेशन पर हरियाणा निर्मित बीयर बरामदअजमेर जिले के किशनगढ़ रेलवे स्टेशन पर की गई कार्रवाई के दौरान हरियाणा निर्मित बडवाइजर (Budweiser) बीयर के 24 कैन बरामद किए गए। इस मामले में भी आबकारी विभाग ने संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूरे प्रदेश में जारी रहेगा अभियानआबकारी विभाग के अनुसार यह अभियान केवल कुछ जिलों तक सीमित नहीं है। प्रदेश के सभी जिलों में अतिरिक्त आबकारी आयुक्त, आबकारी उपायुक्त, जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक और आबकारी निरोधक दल लगातार नाकाबंदी, गश्त और छापेमारी कर रहे हैं।
आबकारी आयुक्त नमित मेहता ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से अमल किया जाए। विभाग का लक्ष्य न केवल अवैध शराब की जब्ती करना है, बल्कि इसके निर्माण और तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना भी है।
विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन या बिक्री की सूचना मिले तो उसकी जानकारी तुरंत आबकारी विभाग या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दें। विभाग का कहना है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और अवैध शराब के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
राजस्थान की पांचों बिजली कंपनियों में 2005 पदों पर भर्ती, जूनियर इंजीनियर समेत इन पदों के लिए करें आवेदन
राजस्थान विद्युत निगम भर्ती 2026: पांचों बिजली कंपनियों में 2005 पदों पर सीधी भर्ती, 25 अगस्त तक करें आवेदन
राजस्थान के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर सामने आया है। राज्य की पांचों विद्युत निगमों में विभिन्न संवर्गों के कुल 2005 पदों पर सीधी भर्ती के लिए विस्तृत विज्ञापन जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL), राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (RVPNL) तथा जयपुर, अजमेर और जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL, AVVNL, JDVVNL) में अभियंता संवर्ग और मंत्रालयिक संवर्ग के पदों पर भर्ती की जाएगी।
योग्य अभ्यर्थी इन पदों के लिए 5 अगस्त 2026 से 25 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
2005 पदों पर होगी भर्तीविद्युत निगमों की ओर से जारी भर्ती विज्ञापन के अनुसार कुल 2005 पदों में—
कनिष्ठ अभियन्ता (Junior Engineer) के 869 पद
कनिष्ठ लेखाकार (Junior Accountant) के 371 पद
कनिष्ठ सहायक/वाणिज्यिक सहायक-द्वितीय के 765 पद
शामिल हैं।
इन पदों पर नियुक्ति के लिए योग्य अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
पांचों बिजली कंपनियों की वेबसाइट पर आवेदन सुविधाअभ्यर्थी विद्युत निगमों की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भर्ती से संबंधित लिंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 5 अगस्त से शुरू हो गई है और अंतिम तिथि 25 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
भर्ती से जुड़ी जानकारी और आवेदन के लिए अभ्यर्थी निम्न वेबसाइटों पर विजिट कर सकते हैं—
energy.rajasthan.gov.in
RVUNL वेबसाइट
RVPNL वेबसाइट
JVVNL वेबसाइट
JDVVNL वेबसाइट
AVVNL वेबसाइट
ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा से होगा चयनविद्युत निगमों में इन पदों पर चयन के लिए ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों का चयन निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
कनिष्ठ सहायक और वाणिज्यिक सहायक-द्वितीय पदों के लिए ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की टंकण परीक्षा (Typing Test) भी आयोजित की जाएगी।
भर्ती विज्ञापन में दी गई पूरी जानकारीराजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओर से जारी विस्तृत भर्ती विज्ञापन में पदों का श्रेणीवार आरक्षण, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, आवेदन शुल्क, आवेदन प्रक्रिया और चयन प्रक्रिया सहित सभी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं।
अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले भर्ती विज्ञापन को ध्यानपूर्वक पढ़ लें और अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के बाद ही आवेदन करें।
युवाओं के लिए रोजगार का अवसरराजस्थान सरकार की पांचों विद्युत निगमों में होने वाली यह भर्ती प्रदेश के तकनीकी और गैर-तकनीकी युवाओं के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण अवसर है। कनिष्ठ अभियंता पदों के माध्यम से इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र के अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा, वहीं कनिष्ठ लेखाकार और कनिष्ठ सहायक पदों से मंत्रालयिक क्षेत्र के अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा।
हेल्पलाइन नंबर भी जारीभर्ती प्रक्रिया से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए अभ्यर्थी विद्युत निगमों द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 9414056655 पर संपर्क कर सकते हैं। हेल्पलाइन सुविधा सभी कार्यदिवसों में उपलब्ध रहेगी।
विद्युत निगमों ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। 25 अगस्त 2026 के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।