राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी: मोबाइल में सेव पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी और निजी दस्तावेज बन सकते हैं साइबर ठगी का कारण
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए चेतावनी दी है कि मोबाइल फोन में पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी, निजी दस्तावेज और अन्य संवेदनशील डेटा सुरक्षित रखना साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बन सकता है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और मोबाइल में संवेदनशील जानकारी रखने से पहले आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाएं।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी इस एडवाइजरी में कहा गया है कि आज स्मार्टफोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी दस्तावेज, निजी फोटो-वीडियो, ईमेल और डिजिटल लॉकर जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मोबाइल में मौजूद रहती हैं। ऐसे में यदि फोन हैक हो जाए, चोरी हो जाए या किसी साइबर अपराधी के हाथ लग जाए तो आर्थिक नुकसान के साथ पहचान चोरी और ब्लैकमेलिंग जैसी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।
रोजाना हो रहे हैं 1.3 लाख से अधिक साइबर हमले
राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि भारत में प्रतिदिन 1.3 लाख से अधिक साइबर हमले दर्ज किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-सी लापरवाही भी लोगों के बैंक खातों, व्यक्तिगत पहचान और निजी जानकारी को खतरे में डाल सकती है।
उन्होंने हाल ही में सामने आए बैंक ऑफ बड़ौदा डेटा लीक और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। एक मामले में कर्मचारी के ईमेल के जरिए लगभग 1 टेराबाइट डेटा डार्क वेब पर लीक होने की घटना सामने आई थी।
लोग मोबाइल में क्या-क्या सेव रखते हैं
एडीजी वीके सिंह के अनुसार विभिन्न रिपोर्टों में सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोग अपनी महत्वपूर्ण जानकारी मोबाइल फोन में ही सेव रखते हैं। इनमें—
61 प्रतिशत लोग निजी दस्तावेज
60 प्रतिशत लोग फोटो और वीडियो
48 प्रतिशत लोग ऑफिस ई-मेल
38 प्रतिशत लोग बैंकिंग जानकारी
37 प्रतिशत लोग एआई चैट हिस्ट्री
34 प्रतिशत लोग अपने पासवर्ड मोबाइल में सुरक्षित रखते हैं।
पुलिस का कहना है कि यही जानकारी साइबर अपराधियों के लिए सबसे अधिक मूल्यवान होती है।
साइबर अपराधियों के मुख्य निशाने
राजस्थान पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी मुख्य रूप से चार प्रकार की जानकारियों को निशाना बनाते हैं।
पहचान चोरी (Identity Theft): आधार, पैन कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारी का उपयोग कर फर्जी सिम कार्ड, बैंक खाते या लोन लिए जा सकते हैं।
वित्तीय धोखाधड़ी: बैंकिंग ऐप, यूपीआई, नेट बैंकिंग और ओटीपी तक पहुंच बनाकर बैंक खातों से रकम निकाली जा सकती है।
ब्लैकमेलिंग: निजी फोटो, वीडियो और एआई चैट हिस्ट्री का दुरुपयोग कर लोगों को ब्लैकमेल किया जा सकता है या डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में फंसाया जा सकता है।
कॉरपोरेट जासूसी: कंपनियों के गोपनीय दस्तावेज और ऑफिस ई-मेल चुराकर फिरौती मांगने या व्यावसायिक नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस की सलाह
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों को मोबाइल सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग या अन्य संवेदनशील कार्य करने से बचें। यदि आवश्यक हो तो विश्वसनीय वीपीएन का उपयोग करें।
मोबाइल में स्क्रीन लॉक और स्टोरेज एन्क्रिप्शन हमेशा सक्रिय रखें।
किसी भी ऐप को केवल आवश्यक परमिशन ही दें।
बैंकिंग ऐप और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सिक्योर या हिडेन फोल्डर में रखें।
क्लाउड बैकअप को मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित करें।
ऐप्स केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें।
फोन में लोकेशन ट्रैकिंग, ऑटो बैकअप और स्क्रीन लॉक हमेशा चालू रखें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
राजस्थान पुलिस ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी या कोई संदिग्ध डिजिटल गतिविधि होती है तो वह बिना देरी किए निकटतम पुलिस थाना या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराए।
इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। राजस्थान पुलिस ने नागरिकों की सहायता के लिए साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 भी जारी किए हैं।
राजस्थान पुलिस का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। मोबाइल फोन में संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रखने से पहले उचित सुरक्षा उपाय अपनाकर नागरिक साइबर ठगी, पहचान चोरी और आर्थिक नुकसान जैसी घटनाओं से काफी हद तक बच सकते हैं।