FIR में नाम तक नहीं

जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी न्यायिक अभिरक्षा में

Dr.Mahesh Joshi

राजस्थान: पूर्व मंत्री की जमानत याचिका पर सुनवाई अधूरी रही।आर्थिक अपराध मामलों की विशेष अदालत में  जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई अधूरी रही। सुनवाई के दौरान जोशी की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदेश में सरकार बदलते ही उन्हें इस मामले में फंसाया गया।  आज यानी बुधवार को ईडी अपना पक्ष रखेगी।महेश जोशी का कहना हैं की उन्हें 
 जबरन फंसाया गया है। महेश जोशी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक राज बाजवा ने अदालत को बताया कि एसीबी की एफआईआर और मामले में पेश आरोप पत्र में उसका नाम नहीं है। 

टेंडर घोटाले में भी हुई थी गिरफ्तारी


जोशी से पहले जेजेएम घोटाले में पीयूष जैन, पदम चंद जैन, महेश मित्तल और संजय बड़ाया की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोप है कि श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी और मेसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी से जुड़े पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र पेशकर जलदाय विभाग से करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए। इस बारे में एसीबी ने जांच शुरू की, जिसके आधार पर ईडी ने केस दर्ज कर महेश जोशी और अन्य के ठिकानों पर दबिश दी थी।

जोशी की ओर से कहा गया

 

जलदाय मंत्री रहने के दौरान ही विभाग ने ठेकेदार फर्म पर कार्रवाई की थी। ऐसे में यदि उसकी मामले में मिलीभगत होती तो वह फर्म पर कार्रवाई क्यों करते। ऐसे में जोशी को जमानत पर रिहा किया जाएं। बता दें कि जल जीवन मिशन में एसीबी की ओर से मामला दर्ज होने के बाद ईडी ने महेश जोशी पर कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया था। इस दौरान जोशी की पत्नी का निधन होने के कारण उन्हें दो बार अंतरिम जमानत दी गई थी। अधिवक्ता ने बताया, 50 लाख रुपये का यह लोन कुछ माह बाद ही लौटा दिया गया। ईडी ने इस मामले में जोशी को मार्च 2024 में समन जारी की, जिसका जवाब ईडी को भेज दिया गया। इसके बाद ईडी ने एक साल तक कोई कार्रवाई नहीं की। अब राजनीतिक द्वेष के कारण उनको फंसाया जा रहा है और 24 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया।