नगरीय विकास राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि भरतपुर विकास प्राधिकरण से शहर का सुनियोजित, व्यवस्थित और योजनाबद्ध विकास को तीव्र गति मिलेगी। हर क्षेत्र में सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि जनसंख्या की दृष्टि से भरतपुर बड़ा शहर है। गत वर्षों में शहर और नजदीकी क्षेत्र तेजी से आवासित होता जा रहा है। इसलिए अब प्राधिकरण बनाया गया है। इससे क्षेत्र में आवासन, सामुदायिक सुविधाएं और आधारभूत संरचनाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित होगी। आमजन को उच्च गुणवत्तापूर्ण लोक सेवाएं मिलेंगी। झाबर सिंह खर्रा ने बुधवार को विधानसभा में भरतपुर विकास प्राधिकरण विधेयक, 2025 पर चर्चा के बाद जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में तीव्र गति से विकास होने से रियल एस्टेट में तेजी से विनियोजन हुआ है। इसे देखते हुए बड़े शहरों में शीघ्र विकास की आवश्यकताएं महसूस हुई हैं। नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि पूर्व में नगर विकास न्यास का क्षेत्रफल 53 राजस्व गांवों (18 हजार 960.95 हैक्टेयर भूमि) तक था। अब प्राधिकरण में भरतपुर शहर, तहसील भरतपुर, कुम्हेर और रारह के 210 गांवों को सम्मिलित किया गया है। इनका क्षेत्रफल 53 हजार 205.58 हैक्टेयर है। उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण में अध्यक्ष सहित 16 सदस्य होंगे। झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट 2024-25 में भरतपुर विकास प्राधिकरण बनाने के लिए घोषणा की थीं। इसकी अनुपालना में अध्यादेश लाते हुए अधिसूचना जारी कर प्राधिकरण गठित किया गया है। इससे पहले झाबर सिंह खर्रा ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। सदन में विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
नगरीय विकास राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि भरतपुर विकास प्राधिकरण से शहर का सुनियोजित, व्यव
भरतपुर विकास प्राधिकरण विधेयक, 2025 ध्वनिमत से पारित, भरतपुर विकास प्राधिकरण से सुनियोजित और योजनाबद्ध विकास को मिलेगी गति - नगरीय विकास राज्य मंत्री
Related News
राजस्थान में अप्रैल से शुरू होंगे केवल लड़कियों के राज्य-संचालित सैनिक स्कूल, देश में पहली बार होगी यह पहल
जयपुर: राजस्थान एक ऐतिहासिक निर्णय के साथ देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहाँ केवल लड़कियों के लिए राज्य-संचालित सैनिक स्कूल अप्रैल 2026 से शुरू किए जाएंगे। यह कदम न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा सेवाओं में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी मील का पत्थर माना जा रहा है।
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि लड़कियों को कम उम्र से ही अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, शारीरिक दक्षता और देशसेवा की भावना से जोड़ते हुए उन्हें सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस सेवाओं में करियर के लिए तैयार किया जाए। अब तक सैनिक स्कूलों को लेकर यह धारणा रही है कि वे मुख्यतः लड़कों के लिए हैं, लेकिन राजस्थान सरकार की इस पहल ने उस सोच को बदलने का काम किया है।
पहले चरण में दो स्कूल होंगे शुरूसरकारी योजना के अनुसार, पहले चरण में दो बालिका सैनिक स्कूल स्थापित किए जाएंगे। इनमें से एक स्कूल बीकानेर और दूसरा सीकर जिले में खोला जाएगा। दोनों स्कूल पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा संचालित होंगे और इनमें आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
इन स्कूलों में छात्राओं को सामान्य पाठ्यक्रम के साथ ड्रिल, शारीरिक प्रशिक्षण, खेलकूद, अनुशासन और नेतृत्व विकास से जुड़े विशेष कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार होंगी।
प्रवेश प्रक्रिया और सीटेंप्रत्येक सैनिक स्कूल में सीमित संख्या में सीटें रखी जाएंगी, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनी रहे। सरकार के अनुसार, इन स्कूलों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अभिभावकों और छात्राओं में इस योजना को लेकर खासा उत्साह है। प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और मेरिट आधारित रखा जाएगा।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदमविशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस और व्यावहारिक कदम है। अब तक लड़कियों को रक्षा सेवाओं में आने के लिए सीमित अवसर मिलते थे, लेकिन इन सैनिक स्कूलों के माध्यम से उन्हें प्रारंभिक स्तर से ही उसी माहौल और प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा, जो भविष्य में उनके करियर को मजबूत आधार देगा।
भविष्य की योजनाएँराज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि यह योजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में अन्य जिलों में भी बालिका सैनिक स्कूल खोले जाएंगे। खासतौर पर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की छात्राओं को इस योजना से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, ताकि उन्हें भी समान अवसर मिल सकें।
शिक्षा और सुरक्षा का संगमराजस्थान की यह पहल शिक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगी। इससे न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश को प्रशिक्षित, अनुशासित और आत्मनिर्भर महिला नेतृत्व मिलेगा। यह योजना आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
बजट से राजस्थान में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय बजट 2026–27 को राजस्थान के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि इस बजट से राज्य में निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह बजट विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसका सीधा लाभ राजस्थान को मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, औद्योगिक निवेश, स्टार्टअप्स और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस किया गया है। इससे राजस्थान जैसे बड़े और संभावनाओं से भरपूर राज्य में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
निवेश के लिए अनुकूल माहौलसीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार पहले से ही निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियां लागू कर रही है और केंद्रीय बजट में किए गए प्रावधान इन प्रयासों को और मजबूती देंगे। उन्होंने कहा कि उद्योगों के विस्तार से न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर भी मिलेंगे।
युवाओं और किसानों को मिलेगा लाभमुख्यमंत्री ने बताया कि बजट में युवाओं के लिए कौशल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और रोजगार योजनाओं पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही किसानों के लिए कृषि से जुड़ी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विपक्ष पर परोक्ष निशानासीएम भजनलाल शर्मा ने विपक्ष की आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट को राजनीति के चश्मे से नहीं, बल्कि विकास के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बजट के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।
विकसित राजस्थान की दिशा में कदममुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्रीय बजट 2026–27 राज्य को विकसित राजस्थान की दिशा में आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करती रहेंगी।
जयपुर में नारी चौपाल कार्यक्रम: महिला सशक्तिकरण को व्यावहारिक रूप देना जारी
जयपुर: जयपुर जिले में महिला सशक्तिकरण को व्यावहारिक धरातल पर साकार करने के लिए सक्षम जयपुर अभियान के तहत चल रहे नारी चौपाल कार्यक्रम ने एक बार फिर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा और जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशानुसार, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के तहत उपखंड स्तर पर चौपाल का आयोजन किया गया।
चाकसू उपखंड में नारी चौपाल का आयोजनबुधवार को चाकसू उपखंड में आयोजित नारी चौपाल में हजारों महिलाओं और बालिकाओं ने भाग लिया। बड़ी संख्या में सहभागिता ने स्पष्ट किया कि महिलाएँ अब संवाद, निर्णय और नेतृत्व में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश डोगीवाल ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान मारवाड़ी लोकगीत, लोकनृत्य, नुक्कड़ नाटक और आत्मरक्षा प्रशिक्षण की प्रस्तुतियाँ दी गईं। "हम होंगे कामयाब" और "मेरा काम—मेरा सम्मान" जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से महिलाओं ने स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का संदेश साझा किया।
अनुभव साझा करने से मिली प्रेरणाविभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियाँ हासिल करने वाली महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे उपस्थित महिलाओं और बालिकाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। चाकसू उपखंड अधिकारी श्रीमती निधि मीणा की उपस्थिति में महिलाओं ने आत्मविश्वास, कौशल और नेतृत्व क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा, शिक्षा, पुलिस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने महिलाओं से सीधे संवाद कर स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, पोषण, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
सक्षम जयपुर अभियान और शपथकार्यक्रम के दौरान महिलाओं और बालिकाओं ने सक्षम जयपुर अभियान का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए और बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ की शपथ ली। नोडल अधिकारी और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री मृणाल कुमार ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया।
नारी चौपाल का उद्देश्यडॉ. डोगीवाल ने बताया कि नारी चौपाल का उद्देश्य महिलाओं को जागरूक, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना जा रहा है, जिससे नीति और क्रियान्वयन में सकारात्मक बदलाव संभव हो रहा है।
जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशानुसार, जयपुर जिले के सभी उपखंडों में चरणबद्ध रूप से नारी चौपाल आयोजित किए जाएंगे। यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए सिर्फ संवाद का मंच नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की सशक्त पहल बनकर उभर रहा है।
राज्यभर में 941 शिविर, किसानों-ग्रामीणों को 13 योजनाओं की एक ही जगह जानकारी
जयपुर: राजस्थान सरकार द्वारा ग्रामीण विकास और जनकल्याण को मजबूती देने के उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे ‘ग्राम उत्थान शिविर’ राज्य के गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रहे हैं। प्रदेशभर में अब तक 941 ग्राम उत्थान शिविरों का आयोजन किया जा चुका है, जिनके माध्यम से किसानों और ग्रामीण नागरिकों को 13 प्रमुख सरकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य यह है कि ग्रामीणों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें और सरकारी योजनाओं की जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और समाधान सीधे गांव में ही मिल सके। शिविरों में राजस्व, कृषि, पशुपालन, चिकित्सा, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रह रहे हैं।
किसानों को मिल रहा विशेष लाभग्राम उत्थान शिविरों में किसानों को फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि उपकरण अनुदान, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सिंचाई योजनाओं और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। कई स्थानों पर मौके पर ही आवेदन स्वीकार कर समस्याओं का निस्तारण भी किया जा रहा है।
ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधानशिविरों के दौरान ग्रामीण अपनी राजस्व संबंधी शिकायतें, पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य योजनाएं, आवास योजना, श्रमिक कार्ड जैसी समस्याएं अधिकारियों के सामने रख रहे हैं। सरकार का दावा है कि बड़ी संख्या में मामलों का तत्काल या समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है।
सरकार का फोकस – अंतिम व्यक्ति तक योजनाराज्य सरकार का कहना है कि ग्राम उत्थान शिविरों के जरिए “सरकार आपके द्वार” की भावना को साकार किया जा रहा है। इन शिविरों से न केवल योजनाओं की जानकारी बढ़ी है, बल्कि पात्र लाभार्थियों को वास्तविक लाभ भी मिलने लगा है।
आगे और शिविरों की तैयारीप्रशासन के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश के शेष गांवों में भी ग्राम उत्थान शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
विधानसभा का बजट सत्र शुरू, पंचायत-निकाय चुनाव विधेयक सहित कई अहम बिलों पर होगी चर्चा
राजस्थान: राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है। सत्र की शुरुआत राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के अभिभाषण से हुई। बजट सत्र के दौरान सरकार द्वारा पंचायत-निकाय चुनाव, शहरी विकास, कानून-व्यवस्था और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तय कर ली है।
राज्यपाल का अभिभाषणराज्यपाल ने अपने अभिभाषण में राज्य सरकार की उपलब्धियों, विकास योजनाओं और आगामी प्राथमिकताओं को सदन के सामने रखा। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, रोजगार और ग्रामीण विकास को सरकार के प्रमुख एजेंडे के रूप में बताया। अभिभाषण के बाद सदन में दिवंगत पूर्व जनप्रतिनिधियों को श्रद्धांजलि दी गई।
कब पेश होगा बजटसरकारी सूत्रों के अनुसार राज्य बजट 11 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार का यह बजट बेहद अहम माना जा रहा है। बजट में युवाओं, किसानों, महिलाओं और शहरी-ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं और घोषणाओं पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।
इन विधेयकों पर रहेगी नजरबजट सत्र के दौरान जिन विधेयकों पर सबसे ज्यादा चर्चा होने की संभावना है, उनमें शामिल हैं—
पंचायत एवं निकाय चुनाव से संबंधित संशोधन विधेयक
डिस्टर्ब एरिया बिल
शहरी विकास और नगर निकाय सुधार से जुड़े कानून
प्रशासनिक सुधार एवं कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव
इन विधेयकों को लेकर विपक्ष पहले ही सरकार को घेरने की तैयारी में है।
विपक्ष के तेवर सख्तविपक्षी दलों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं में देरी और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरेंगे। ऐसे में सत्र के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की पूरी संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक महत्वराजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बजट सत्र भजनलाल सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आने वाले पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए सरकार के फैसले सियासी रूप से काफी अहम माने जा रहे हैं।
निष्कर्षराजस्थान विधानसभा का यह बजट सत्र न केवल आर्थिक नीतियों के लिहाज से, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। सरकार जहां अपने विकास एजेंडे को मजबूती से रखने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरता नजर आएगा।