राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल तबादला–पदस्थापन पर लगाई रोक, 27 जनवरी को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल तबादला–पदस्थापन पर लगाई रोक, शिक्षा विभाग में मचा प्रशासनिक हलचल

aaatack

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के शिक्षा विभाग को बड़ा झटका देते हुए उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रिंसिपलों के तबादला और पदस्थापन पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद न केवल शिक्षा प्रशासन में हड़कंप मच गया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को तय की गई है, जिस पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

यह आदेश उन याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद दिया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में किए गए प्रिंसिपल तबादले और पदस्थापन तबादला नीति के विरुद्ध, पारदर्शिता के बिना और कथित तौर पर राजनीतिक दबाव में किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कई वरिष्ठ और योग्य अधिकारियों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से आदेश जारी किए गए, जिससे न केवल प्रशासनिक असंतुलन पैदा हुआ बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।


हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि जब तबादलों को लेकर नियमों और नीति के उल्लंघन के आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह जाता, बल्कि संवैधानिक और न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बन जाती है।

कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार का नया तबादला या पदस्थापन प्रभावी नहीं होगा, चाहे वह आदेश जारी हो चुका हो या प्रस्तावित हो। इस अंतरिम रोक का सीधा असर प्रदेश भर के सैकड़ों उच्च माध्यमिक विद्यालयों पर पड़ा है।


शिक्षा विभाग में बढ़ी अनिश्चितता

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में असमंजस की स्थिति बन गई है। कई ऐसे प्रिंसिपल, जिनके तबादला आदेश हाल ही में जारी हुए थे, अब यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें वर्तमान पद पर बने रहना है या नई जगह कार्यभार संभालना है। वहीं, कई स्कूलों में प्रशासनिक फैसले अटक गए हैं।

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, कुछ जिलों में ऐसे विद्यालय भी हैं जहां प्रिंसिपल के तबादले के बाद नए अधिकारी ने कार्यभार संभाल लिया था, लेकिन अब कोर्ट के आदेश के बाद स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे स्कूलों की प्रशासनिक निरंतरता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


छात्रों की पढ़ाई पर असर की आशंका

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रिंसिपल जैसे महत्वपूर्ण पद पर बार-बार तबादले होने से स्कूलों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। प्रिंसिपल न केवल प्रशासनिक प्रमुख होता है, बल्कि शिक्षकों और छात्रों के बीच समन्वय की अहम कड़ी भी होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तबादलों को लेकर पैदा हुई यह अनिश्चितता छात्रों की पढ़ाई, परीक्षा प्रबंधन और स्कूल अनुशासन पर भी असर डाल सकती है, खासकर तब जब बोर्ड परीक्षाओं का समय नजदीक हो।


राजनीतिक हलकों में भी तेज प्रतिक्रिया

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग में तबादले राजनीतिक हस्तक्षेप और सिफारिशों के आधार पर किए जा रहे थे, जिस कारण मामला अदालत तक पहुंचा।

विपक्ष का कहना है कि तबादलों को “इनाम और सजा” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ईमानदार अधिकारियों का मनोबल गिरता है। वहीं, सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने कहा है कि सरकार कोर्ट के आदेश का पूरा सम्मान करेगी और 27 जनवरी को अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।


तबादला नीति पर फिर उठे सवाल

यह मामला एक बार फिर राजस्थान की तबादला नीति को लेकर सवाल खड़े करता है। इससे पहले भी विभिन्न विभागों में तबादलों को लेकर अदालतों में याचिकाएं दायर होती रही हैं। जानकारों का मानना है कि तबादला नीति स्पष्ट होने के बावजूद उसके पालन में लगातार लापरवाही देखी जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में तबादले केवल प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर और पूरी पारदर्शिता के साथ होने चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता, तो इसका सीधा नुकसान शिक्षा व्यवस्था और छात्रों को भुगतना पड़ता है।


सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि प्रिंसिपलों के तबादले प्रशासनिक आवश्यकता और विभागीय संतुलन को ध्यान में रखकर किए गए थे। सरकार का दावा है कि किसी भी तरह का नियम उल्लंघन नहीं हुआ है और सभी आदेश निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी किए गए।

सरकार अब 27 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई की तैयारी में जुट गई है। शिक्षा विभाग और विधि विभाग मिलकर कोर्ट में जवाब दाखिल करने की रणनीति बना रहे हैं।


अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम तारीख 27 जनवरी मानी जा रही है। यदि हाईकोर्ट इस अंतरिम रोक को आगे भी बरकरार रखता है, तो शिक्षा विभाग को तबादला नीति में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। वहीं, यदि कोर्ट सरकार के जवाब से संतुष्ट होता है, तो तबादला प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकती है।

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले का फैसला केवल प्रिंसिपलों के तबादलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राजस्थान में तबादला नीति, प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी एक अहम नजीर साबित हो सकता है।


निष्कर्ष

कुल मिलाकर, राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश शिक्षा प्रशासन के लिए एक बड़ा संकेत है कि नियमों और पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता। शिक्षा विभाग, सरकार और राजनीतिक दलों—सभी के लिए यह मामला बेहद अहम बन गया है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट का अंतिम फैसला न केवल शिक्षा व्यवस्था को दिशा देगा, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गहरा असर डालेगा।