मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंचायतीराज संस्थाओं और सरपंचों को देश के विकास की धुरी बताया है। उन्होंने कहा कि गांव के व्यक्ति की समस्या के समाधान और हर उम्मीद का पहला केंद्र सरपंच होता है। इसलिए सरपंच का यह पहला लक्ष्य होना चाहिए कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए वह गांव के लोगों के बीच जाकर निरंतर संवाद करे। मुख्यमंत्री शुक्रवार को तक्षशिला ऑडिटोरियम में पंचायतीराज जनप्रतिनिधि संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, ग्राम स्वराज, स्वावलंबन और जनभागीदारी के उन मूल्यों की याद दिलाती है, जो राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। राष्ट्रपिता का मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साझा किए अपने अनुभव
मुख्यमंत्री ने अपने सरपंच कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें गांव के लोगों के बीच काम करने का अवसर मिला, तो उन्होंने योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचाने और मोतियाबिंद कैम्प का आयोजन करने जैसे जनसेवा के अनेक कार्य किए। उन्होंने कहा कि हमारे गांव मजबूत होंगे तो राजस्थान मजबूत होगा। ग्राम पंचायतें पारदर्शी, जवाबदेह और जनभागीदारी वाली होंगी तो विकास की गति और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि पंचायतीराज के सभी जनप्रतिनिधि पूरी निष्ठा, ऊर्जा और सेवा भावना के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने पौने तीन वर्षों में प्रदेश को नई दिशा और नई गति देने का कार्य किया है। सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा को शासन की पहचान बनाया है। कानून व्यवस्था को मजबूत कर भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया है और आधारभूत ढांचे के विकास को भी गति दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास के मूलमंत्र से प्रेरणा लेते हुए किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं को अब तक 1 लाख 93 हजार पदों पर नियुक्तियां दी हैं। वहीं, 1 लाख 18 हजार पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। साथ ही, सवा लाख पदों के लिए भर्ती कलैंडर भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान’ के माध्यम से गांवों के सर्वांगीण विकास का रोडमैप तैयार कर रही है। इसी दिशा में पंचायत स्तर पर अटल ज्ञान केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें लाइब्रेरी, ई-लाइब्रेरी, ऑनलाइन कोचिंग एवं ई-मित्र जैसी सुविधाओं से ग्रामीण युवा लाभान्वित होंगे।
उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं को सशक्त बनाने के लिए किसान सम्मान निधि की राशि को बढ़ाकर 9 हजार रुपये किया गया है। इस योजना के तहत 76 लाख से अधिक किसानों को 14 हजार 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है और 150 बीज बैंकों की भी स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 तक पूरे प्रदेश में किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर तेजी से काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि को बढ़ाकर 1 हजार 450 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि को बढ़ाकर 1 हजार 450 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 3 लाख 82 हजार आवास बनवाए हैं तथा 4 लाख 53 हजार आवासों का निर्माण प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 10 हजार किलोमीटर मिसिंग लिंक सड़कों का निर्माण किया है। साथ ही, 327 अटल प्रगति पथों के लिए 813 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, इनमें से 282 कार्य पूर्ण हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान को चार महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं की सौगात मिली है, जिसके तहत पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के लिए राम जल सेतु लिंक परियोजना, शेखावाटी के लिए यमुना समझौता सहित किशाऊ परियोजना एवं नर्मदा परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार देवास, आईजीएनपी, गंगनहर, ब्राह्मणी नदी-बीसलपुर एवं सोम कमला अंबा-जवाई जैसी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान में 7 लाख से अधिक गतिविधियां आयोजित हुई हैं एवं कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान में करीब 9 हजार रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए हैं। इसी प्रकार जेजेएम के जरिये 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि घुमंतू, अर्द्धघुमंतू एवं विमुक्त आवासहीन परिवारों को अब तक 52 हजार से अधिक पट्टे तथा स्वामित्व योजना के तहत 15 लाख से अधिक स्वामित्व कार्ड वितरित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 41 हजार से अधिक ओडीएफ प्लस मॉडल गांव घोषित किए हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मानदेय में लगातार तीन वर्ष में 10-10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ही 8 नई जिला परिषदें, 94 नई पंचायत समितियां और 3 हजार 467 नई ग्राम पंचायतें बनाई हैं। वहीं, वन स्टेट-वन इलेक्शन के संकल्प को भी पूरा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में स्वच्छता, रक्तदान, मेडिकल कैंप, आंगन मिलन, नमो सेवा लाभार्थी और एक पेड़ मां के नाम जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में जनप्रतिनिधियों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया और सेवा-संकल्प रथों के जरिये गांवों तक योजनाओं और नीतियों की जानकारी पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों से किया संवाद,उत्कृष्ट कार्यों के लिए संदेश पत्र देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत में विकास कार्यों और विशेष उपलब्धियों के लिए देवलिया की स्वरूप चौधरी, रूण्डल की मोहिनी देवी, बोराज के सुरेन्द्र सिंह मीणा, आसलपुर की सरला कुमावत और साईवाड़ के राजेन्द्र बुनकर को संदेश पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही, धौबलाई के रमेश चन्द शर्मा, दुर्जनियावास के नारायण लाल जाट, बस्सी की नीतू मीणा तथा वीसी के माध्यम से जुड़े लुधावई के गौरव सिंह, आंवा के दिव्यांश भारद्वाज, पोषाणा की पिन्टू देवी गर्ग, लांबी अहीर की नीरू यादव, रटावद के नरेन्द्र मीणा, ओलनाखेड़ा के दिनेश वैष्णव तथा पीलीबंगा के जगतार सिंह बराड़ ने अपने सरपंच कार्यकाल के अनुभव एवं नवाचार मुख्यमंत्री के साथ साझा किए।
इस अवसर पर पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सांसद मंजू शर्मा, विधायक कैलाश वर्मा, शत्रुघन गौतम, महेन्द्रपाल मीणा, कुलदीप धनकड़, सरपंच संघ अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल सहित प्रदेशभर के पंचायतीराज के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं, सभी जिलों से जनप्रतिनिधि वीसी के जरिये संवाद कार्यक्रम में जुड़े।